सुबाश्री कृष्णन

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Subasriबाहरी सलाहकार 
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शिक्षाः
एम.ए. मास कम्युनिकेशन, जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली, बी.ए. अंग्रेजी साहित्य, मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, चेन्नई


अभ्यास (प्रैक्टिस):
सुबाश्री जामिया मिलिया इस्लामिया में मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर की भूतपूर्व छात्रा और आई.आई.एच.एस. मीडिया लैब की प्रमुख हैं। वे पिछले 9 वर्षों एक स्वतंत्र डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता भी रही हैं।  आई.आई.एच.एस. मीडिया लैब के हिस्से के रूप में, उनका काम शहर के आसपास के विचारों के साथ जुड़ने के लिए श्रव्य-दृश्य (आडियो-विज्युअल) माध्यम का उपयोग करने पर केंद्रित रहा है – चाहे वह नियमित रूप से फिल्म दिखाना, अर्बन लेंस फिल्म समारोह (2013) क्यूरेट करना या शहरी के आसपास शिक्षाविदों और अभ्यासकर्ताओं के साथ बातचीत को डिजिटल वीडियो के माध्यम से दस्तावेज़ीकृत करना हो।

उनका फिल्म निर्माण का काम डॉक्यूमेंट्री फिल्मों से लेकर अधिकार आधारित मुद्दों पर कमीशन की गई कई सारी गैर फिक्शन फिल्मों तक रहा है। दक्षिण पूर्व एशिया में इंटरनेट सेंसरशिप पर उनकी पहली डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘ब्रेव न्यू मीडियम’’ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया है। लोक सेवा प्रसारण ट्रस्ट (पी.एस.बी.टी.) द्वारा निर्मित पुरस्कार विजेता ‘‘दिस और देट पार्टिकुलर पर्सन’’ आधिकारिक पहचान दस्तावेजों और उस संदर्भ में, विशिष्ट पहचान संख्या (यू.आई.डी.) पर विचार करती है। फिल्म को केरल के अंतर्राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री और लघु फिल्म समारोह में (आई.डी.एस.एफ.एफ.के.), 2013 में सर्वश्रेष्ठ लघु डॉक्यूमेंट्री फिल्म घोषित किया गया था। उनकी आगामी फिल्म (निर्माणाधीन) 1980 के दशक में हुई हिंसक सार्वजनिक घटनाओं – असम में नेली नरसंहार और दिल्ली में सिख विरोधी दंगों –  के माध्यम से याद रखने (या उसके अभाव) पर विचार करती है।

2008 में, सुबाश्री को जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार फैलोशिप से सम्मानित किया गया। सुबाश्री 2012 के लिए चार्ल्स वालेस अल्पकालिक अनुसंधान और पेशेवर अनुदान की प्राप्तकर्ता हैं। उन्हें 2011 और 2013 – दो बार लोक सेवा प्रसारण ट्रस्ट की फैलोशिप से भी सम्मानित किया गया है। फिल्म स्कूल जाने से पहले सुबाश्री ने 1998-2000 तक अकादमिक पत्रिका ‘सेमिनार’ के लिए प्रिंट मीडिया में काम किया है।