सहभागी

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संस्थागत सहभागी

दुनिया का अधिकांश नया नगर निर्माण और बस्तियों का परिवर्तन आंरभिक 21वीं सदी में भारत, चीन और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में होगा। हालाँकि, बड़े पैमाने पर शहरी परिवर्तन को सक्षम करने के संस्थागत अनुभव ज्यादातर अमेरिका, यूरोप, पूर्वी एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में केंद्रित हैं। अवसर, जमीनी ज्ञान और संस्थागत क्षमता के बीच इस विषमता को संबोधित करने के लिए वैश्विक दक्षिण और उत्तर के ज्ञान संस्थानों के बीच सक्रिय नेटवर्क महत्वपूर्ण हैं। सांदर्भिक (कॉंटेक्सचुयल) ज्ञान पैदा करना और नेटवर्क मंचों को सक्षम कर सकने वाले तुलनात्मक अनुभव से सीखना आवश्यक है।

पिछले पाँच वर्षों में, आई.आई.एच.एस. ने पाठ्यक्रम और मामले (केस) के सह निर्माण, संयुक्त शोध, शिक्षा और अभ्यास (प्रैक्टिस) के आसपास भागीदारी बनाने के माध्यम से इस तरह के नेटवर्क मंच का निर्माण करने का प्रयास किया है। ऐसा करने में, यह ज्ञान के एक वैश्विक नेटवर्क और क्रियाकलाप (प्रैक्सिस) भागीदारों – विश्वविद्यालयों, कंपनियों, विचारक समूह (थिंक टैंक) और नगर समाज संगठनों – को दक्षिण एशिया में स्थायी मानव बस्तियां बनाने की महत्वपूर्ण चुनौती को संबोधित करने के लिए एक साथ लाया है।

पाठ्यक्रम सलाहकार

संस्थागत भागीदारों के अलावा, आई.आई.एच.एस. ने पाठ्यक्रम विकास प्रक्रिया को अपने प्रस्तावित प्रमुख कार्यक्रम – शहरी अभ्यास के परास्नातक या मास्टर्स ऑफ अर्बन प्रैक्टिस (एम.यू.पी.) – को डिजाइन करने और भारत साथ ही विश्व भर से 180 से अधिक शिक्षाविदों, चिकित्सकों, नीति निर्माताओं, कार्यकर्ताओं और नगर समाज के नेताओं को एक साथ लाने के लिए इस्तेमाल किया।

दो साल के पाठ्यक्रम विकास की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप एक अद्वितीय, अंतर्विषयी (इंटरडिस्प्लिनेरी)  पाठ्यक्रम बना, जिसका उद्देश्य ऐसे शहरी अभ्यासकर्ता (प्रैक्टिशनर्स) पैदा करना है, जो भारतीय शहरों की चुनौतियों की दिशा में सिद्धांत और अभ्यास (प्रैक्टिस) दोनों का लाभ उठा सकें।