अरोमार रेवी

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अरोमार रेवी दि इंडियन इंस्टीट्‌यूट फॉर ह्‌यूमन सेटलमेन्ट्‌स (भारतीय मानव अधिवास संस्‍थान) (आईआईएचएस) के निदेशक हैं- जो शिक्षा, शोध, परामर्श व सलाहकार सेवाओं के एकीकृत कार्यक्रम के माध्‍यम से शहरीकरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत का पहला भावी राष्‍ट्रीय अनुसंधान एवं नवाचार विश्‍वविद्यालय है।

शिक्षा: वह दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के आईआईटी-दिल्‍ली और विधि एवं प्रबंधन स्‍कूल के पूर्वछात्र हैं। वह न्‍यू स्‍कूल यूनिवर्सिटी, न्‍यूयार्क के इंडिया-चाइना इंस्‍टीट्यूट के फेलो भी हैं।

 

कैरियर विशेषताएं

अरोमार रेवी सार्वजनिक नीति एवं शासन, सुधार, विकास, प्रौद्योगिकी, वहनीयता एवं मानव अधिवास की राजनीतिक अर्थव्‍यवस्‍था में चालीस वर्षों से भी अधिक के अंतर-अनुशासनात्‍मक अनुभव के साथ एक अंतरराष्‍ट्रीय प्रैक्टिशनर, सलाहकार, शोधकर्ता और शिक्षक हैं।

वह भारत सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों में वरिष्‍ठ सलाहकार रहे हैं, उन्‍होंने यूएन, बहुपक्षीय, द्विपक्षीय विकास और निजी क्षेत्र के संस्‍थानों की विस्‍तृत श्रृंखला के साथ परामर्श तथा वैश्विक, क्षेत्रीय एवं नगरीय पैमाने पर आर्थिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक परिवर्तन पर कार्य किया है।

अरोमार ने भारत तथा विदेश में सौ से अधिक प्रमुख अनुसंधान, परामर्श और कार्यान्‍वयन कार्य किए हैं; संरचना, डिजाइन और 4 अ‍रब डालर से अधिक के समीक्षा विकास निवेशों में सहायता की है;  आधा दर्जन देशों में कई अंतरराष्‍ट्रीय परियोजनाओं के अलावा भारत के अठ्ठाईस राज्‍यों में से पच्‍चीस राज्‍यों के समुदायों के साथ दुनिया के दस सबसे बड़े शहरों में से तीन पर कार्य किया है।

साथ ही वह दक्षिण एशिया के प्रमुख आपदा न्‍यूनीकरण एवं प्रबंधन विशेषज्ञों में से एक हैं और पचास लाख से अधिक लोगों को प्रभावित करने वाली दस प्रमुख भूकम्‍प, चक्रवात, तूफान एवं बाढ़ की घटनाओं के लिए मूल्‍यांकन, योजना तथा बहाली एवं पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए आपात टीमों का नेतृत्‍व किया है।

अरोमार को विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं न्‍यूनीकरण पर वैश्विक पर्यावरणीय परिवर्तन का एक प्रमुख विशेषज्ञ माना जाता है। वे आईपीसीसी 5वीं आकलन रिपोर्ट (2014) के नगरीय क्षेत्र अनुभाग के लिए समन्‍वय लीड लेखकों में से एक हैं। उन्‍होंने रिस्‍क रिपोर्ट (2011) के वैश्विक मूल्‍यांकन के लिए वैश्विक सलाहकार बोर्ड के सदस्‍य के रूप में भी कार्य किया है।

उन्‍होंने भारत और दक्षिण एशिया के लिए मैक्रो-गवर्नेंस की गतिशीलता तथा दीर्घकालिक भावी सौदों पर कार्य किया है। वह वर्तमान में विकासशील भारत 2050- एक गतिशील दीर्घकालिक राष्‍ट्रीय अर्थव्‍यवस्‍था-संसाधन-जनसांख्यिकीय मॉडल में शामिल हैं।

भारत में सतत नगरीय विकास के लिए अरोमार की प्रतिबद्धता भारत के राष्‍ट्रीय सार्वजनिक आवास कार्यक्रम जो अब ग्रामीण भारत में प्रति वर्ष लगभग दो  मिलियन घरों का निर्माण कर रहा है, के लिए उनके योगदान द्वारा अच्‍छी तरह से स्‍पष्‍ट है। 1990 के दशक में वे भारत के दो तिहाई राज्‍यों के लिए आवास एवं नगरीय विकास योजनाओं के विकास के लिए जिम्‍मेदार थे।

पुरस्‍कार एवं सम्‍मान

अरोमार ने भारत में मानव अधिवास विकास में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है, जिसके लिए उन्‍हें 1990 में अशोका फेलो चुना गया। इसमें भारत के राष्‍ट्रीय सार्वजनिक आवास कार्यक्रम जो अब एक वर्ष में 2 मिलियन से अधिक ग्रामीण घरों के निर्माण; दस लाख से अधिक शहरों में  बुनियादी सुविधाओं, उन्‍नयन एवं संस्‍थागत सुधार को सुगम बनाता है; की डिजाइन में मुख्‍य भूमिका शामिल है। अशोका फेलोज अग्रणी सामाजिक उद्यमी हैं जो सामाजिक समस्‍याओं के लिए अपने अभिनव समाधान और समाज को बदलने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते हैं।

वह न्‍यू स्‍कूल यूनिवर्सिटी, न्‍यूयार्क में इंडिया चाइना इंस्‍टीट्यूट के फेलो हैं, जहां वे प्रारंभिक 21वीं सदी में इन देशों से पहले महत्‍वपूर्ण रणनीतिक चुनौतियों को संबोधित करने में भारतीय, चीनी और अमेरिकी विद्वानों के साथ व्‍यस्‍त हैं।

प्रकाशन एवं अनुसंधान

अरोमार रेवी ने पांच पुस्‍तकें लिखी और संपादित की हैं तथा कई विषयों से संबंधित पत्रिकाओं की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने के लिए तीस से अधिक शैक्षिक लेखों में योगदान दिया है। उन्‍होंने पांच महाद्वीपों में विश्‍व के लगभग तीन दर्जन अग्रणी विश्‍वविद्यालयों और विचार मंचों पर लेक्‍चर दिया है और शिक्षा प्रदान की है तथा पर्यावरण व शहरीकरण एशिया और नगरीय सतत विकास के संपादकीय बोर्ड  में कार्य किया है।

चयनित प्रकाशन:
रेवी, ए. व पटेल,एस (संस्‍करण) (2010) रिकवरिंग फ्रॉम अर्थक्‍वेक्‍स: भारत में प्रतिक्रिया, पुनर्निर्माण और प्रभाव न्‍यूनीकरण। रुटलेज: नई दिल्‍ली और लंदन।

रेवी, ए. व मुखोपाध्‍याय, पी (2009) कीपिंग इंडियाज इकोनोमिक इंजन गोइंग: जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण प्रश्‍न। आर्थिक एवं राजनीतिक साप्‍ताहिक। खंड XLIV, नम्‍बर 31, पेज 59-70

रेवी, ए. (2008) जलवायु परिवर्तन: भारतीय शहरों के लिए अनुकूलन एवं न्‍यूनीकरण एजेंडा। पर्यावरण एवं शहरीकरण  खंड 20, अंक 1

रेवी, ए. (2005) लेसन्‍स फ्रॉम डेलयूज (बाढ़ से उदाहरण): मुम्‍बई में बहु-संकट जोखिम न्‍यूनीकरण के लिए प्राथमिकताएं। आर्थिक एवं राजनीतिक साप्‍ताहिक, खंड XL, नम्‍बर 36, 3-9 सितम्‍बर,  पेज 3911­3916

रेवी, ए. और अन्‍य (2007)  सेनगुप्‍ता, एन (संस्‍करण) में ” आवास-सार्वजनिक नीति प्राथमिकताएं” स्‍वदेशी और पारम्‍परिक ज्ञान का आर्थिक अध्‍ययन, अकादमिक फाउंडेशन। नई दिल्‍ली।