शिरीष बी. पटेल

Shirish Patelशिरीष बी. पटेल, आईआईएचएस बोर्ड के सदस्य के रूप में सेवारत हैं।

शिक्षाः
शिरीष ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से यांत्रिक विज्ञान (मैकेनिकल साइंस) में एमए (ऑनर्स) (1951-1954) किया।
वे इंस्टीट्‌यूट ऑफ इंजीनियर्स, इंडिया, इंस्टीट्‌यूशन ऑफ सिविल इंजीनियर्स (लंदन) तथा अमेरिकन कांक्रीट इंस्टीट्‌यूट के फेलो हैं।

कैरियर की विशेषताएं

शिरीष बी. पटेल एक सिविल इंजीनियर हैं जिनकी अभिरूचि के क्षेत्र सार्वजनिक कार्यों के इंजीनियरिंग डिजाइन, उल्लेखनीय बांधों, सेतुओं, और सामुद्रिक संरचनाओं; नगरीय नियोजन, तथा नगरीय मामलों, फैक्टरियों का नियोजन, तथा अन्य परिसर जो एक अंतर्वैषयिक उपागम से लाभान्वित हैं, सौर ऊर्जा एवं ऊर्जा संरक्षण अनुसंधान, तथा सॉफ्टवेयर विकास तक विस्तृत हैं।

आईआईएचएस की स्थापना से शिरीष गहनता से जुड़े रहे हैं। वे वर्तमान में रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई में मानद प्रोफेसर हैं। वे मुम्बई विरासत संरक्षण समिति के सदस्य भी हैं और मुम्बई महानगर क्षेत्र विरासत संरक्षण समिति के गवर्नर हैं। वे नगरीय मामलों पर लेखन करते हैं और नगरीय नीति पर सरकार से संलग्न हैं।

शिरीष, शिरीष पटेल एंड एसोसिएट्‌स एमिरात्स के अध्यक्ष हैं जिसकी उन्होंने 1960 में स्थापना की थी। यह अब लगभग पूर्णतया एसपीए एजुकेशन फाउंडेशन के स्वामित्व में है, जो कि धारा 25 के अंतर्गत एक अलाभकारी कंपनी है और जो सलाहकार कंपनी से प्राप्त होने वाला लाभांश पिछड़े क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा तथा ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा पर व्यय करती है। अब लगभग सौ लोगों के पूरे स्टॉफ का कंपनी में लाभांश, कर पश्चात आय का 50% है।

शिरीष की पेशेवर सम्बद्धताओं में निम्न शामिल हैं:

  • सदस्य, कंसल्टिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन (भारत)
  • सदस्य, अमेरिकन सोसाइटी ऑफ सिविल इंजीनियर्स
  • सदस्य, इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ब्रिज एंड स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग
  • पूर्व-सदस्य, एसोसिएशन फॉर कम्प्यूटर मशीनरी
  • एसोसिएट सदस्य, इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर शेल एंड स्पैटिएल स्ट्रक्चर्स

शिरीष, हाउसिंग डेवेलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन (1977) के संस्थापक निदेशक हैं। वे मुम्बई महानगर क्षेत्र विरासत संरक्षण समिति (2003) के भी सदस्य हैं। तेरह वर्षों से उन्होंने मुम्बई महानगर विकास प्राधिकरण की कार्यकारिणी समिति के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं जो बम्बई के आसपास (1983-1996) महानगरीय क्षेत्र के नियोजन हेतु उत्तरदायी है। इसके अलावा, वे मुम्बई विरासत संरक्षण समिति (1196-1999 तथा 2005-2008) के सदस्य भी रहे और इंडियन फेडरेशन अगेंस्ट सॉफ्टवेयर थेफ्ट (इनफॉस्ट, 1992) के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे। अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, लाभ हेतु गैरकानूनी सॉफ्टवेयर के उपयोग को आपराधिक कृत्य घोषित करने वाला कानून पारित हुआ। शिरीष, महाराष्ट्र सरकार/भारत सरकार की अनेक समितियों जैसे कि मुम्बई फ्लडिंग इत्यादि में सदस्य रहे हैं।

एक इंजीनियर के रूप में शिरीष ने करीबा डैम पर कोयन एंड बेलर, जाम्बेजी नदी (1955-1956) और कोयना डैम में नियोजन, डिजाइन, और समस्त अस्थायी कार्यों के पर्यवेक्षण तथा केबल क्रेन फाउंडेशन (1956-1958) का कार्य किया। इसके पश्चात उन्होंने कैलिको मिल्स, मुम्बई में मुख्य सिविल अभियंता (चीफ सिविल इंजीनियर) के रूप में कार्य किया जहां उन्होंने दो नई रसायन फैक्टरियों के नियोजन, डिजाइन और विनिर्माण पर्यवेक्षण (1958-1960) का कार्यभार संभाला। 1960 में शिरीष ने शिरीष पटेल एंड एसोसिएट्‌स (एसपीए) की स्थापना की जो विकसित होकर भारत की एक अग्रणी सिविल, स्ट्रक्चरल तथा परियोजना प्रबंधन फर्म बन गई जिसे बहुमंजिला भवनों, सेतुओं, उच्चीकृत रेलमार्ग, रेलवे स्टेशनों, हाइड्रोलिक और सामुद्रिक संरचनाओं, होटलों और औद्योगिक संरचनाओं के निर्माण में विशेषज्ञता प्राप्त है। शिरीष, केम्प’स कॉर्नर फ्लाईओवर, बम्बई के प्रधान डिजाइनर रहे हैं जो कि छह महीनों में निर्मित हुआ भारत का प्रथम उपरिगामी सेतु है। इसके अलावा, शिरीष पेटिट हॉल, बॉम्बे में कई 27 मंजिला भवनों वाले एक परिसर के भी प्रधान डिजाइनर रहे हैं।

वे नए नगर की अवसंरचना तथा निर्माण के वित्तपोषण हेतु सरकार द्वारा अधिग्रहीत भूमि के स्वामित्व का उपयोग करते हुए हार्बर के किनारे नई बम्बई के विकास हेतु एक योजना के तीन मूल लेखकों में से भी एक रहे हैं। 1970 में, सरकार ने नई बम्बई हेतु प्रस्ताव स्वीकृत किया और सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवेलपमेंट कार्पोरेशन ऑफ महाराष्ट्र (सीआईडीसीओ) की स्थापना की। शिरीष ने एक बहुवैषयिक टीम के कार्यों का समन्वय और नेतृत्व किया जिसमें अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, प्रचालन अनुसंधानकर्ता, परिवहन एवं नगर नियोजनकर्ता, वास्तुकार और इंजीनियर, तथा नई बम्बई की विनिर्माण टीम शामिल थी (1970-1974)।

शिरीष ने दो अलाभकारी न्यासों, भूमि संस्थान (एलआई) तथा भूमि अनुसंधान संस्थान (एलआरआई) की स्थापना वाली छह वर्ष की परियोजना (1975-1980) पर कार्य किया। इसके अंतर्गत कृषि में सुधार के लिए मैट्रिकुलेट्‌स को सरल सिविल इंजीनियरिंग कौशलों में प्रशिक्षित करने का कार्य, तथा इन कौशलों का उपयोग भूमि को आकार देने तथा लिफ्ट सिंचाई के कार्यों में किया गया।

पीलू मोदी के साथ शिरीष ने वास्तुकार के रूप में लार्सन एंड टूब्रो के ईसीसी प्रशासकीय भवन, चेन्नई की मूल संरचना की अवधारणा पर कार्य किया। इंजीनियरिंग डिजाइन में उत्कृष्टता हेतु इसे 1994 में फेडेरेशन इंटरनेशनेल डे ला प्रीकांट्रेन्टे (एफआईपी) से एक पुरस्कार मिला। अभी तक भारत में किसी अन्य कंपनी ने यह पुरस्कार नहीं प्राप्त किया है। शिरीष, एक लगभग पूर्णतया प्रीकास्ट फैक्टरी इमारत एल एंड टी हाइड्रोलिक एक्सकैवेटर फैक्टरी, बंगलौर की डिजाइन टीम के एक सक्रिय सदस्य (1981-1982) रहे हैं।

वे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, बंगलुरू की डिजाइन टीम के भी सक्रिय सदस्य रहे हैं। इस टीम ने भूमि पर स्ट्र्रक्चरल स्टील स्ट्रेस्ड-स्किन रूफ का निर्माण करने तथा फिर प्रत्येक कॉलम के शीर्ष पर लगे साधारण ट्रक जैकों का इस्तेमाल करते हुए इसे सही स्थिति तक उठाने के लिए समाधान विकसित किया।

शिरीष ने राहुल मेहरोत्रा के सहयोग से दक्षिणी 4,000 हेक्टेयर वसई-विरार क्षेत्र हेतु विकास योजना तैयार की। विशेषरूप से, उन्होंने परियोजना स्व-वित्तपोषण हेतु एक योजना (1992) तैयार की। उन्होंने इंडियन हैबिटेट सेंटर, नयी दिल्ली में सन-स्क्रीन को सपोर्ट करने वाली संरचना डिजाइन की और जुईनगर आरसीसी पैदल सेतु (फुट ब्रिज), नवी मुम्बई, की रूपरेखा एवं अवधारणा हेतु भी प्रधान डिजाइनर रहे जिसे इंडियन इंस्टीट्‌यूशन ऑफ ब्रिज इंजीनियर्स तथा महाराष्ट्र चैप्टर ऑफ दि अमेरिकन कांक्रीट इंस्टीट्‌यूट (1998) की ओर से प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुए।

पुरस्कार एवं सम्मान

फेलो, इंस्टीट्‌यूट ऑफ इंजीनियर्स, इंडिया फेलो, इंस्टीट्‌यूट ऑफ सिविल इंजीनियर्स फेलो, अमेरिकन कांक्रीट इंस्टीट्‌यूट

क्षेत्र तथा अभिरूचियां

नगरीय मामलों में शिरीष की दीर्घकालीन व स्थायी अभिरूचि रही है। वे उन तीन लेखकों में से एक हैं जिन्होंने नई बम्बई परियोजना का मूल प्रारूप 1965 में तैयार किया था। 1970 में, जब महाराष्ट्र सरकार ने परियोजना स्वीकार की और सिडको नामक नया नगरीय प्राधिकरण स्थापित किया, तो उन्हें नियोजन एवं कार्य का निदेशक बनाया गया।

अपने द्वारा स्थापित की गई सलाहकार फर्म से सेवानिवृत्त होने के पश्चात (उन्होंने अध्यक्ष-एमिररात्स एसपीए के रूप में कार्य किया) वे अब नगरीय विकास एवं नगरीय मामलों पर कार्य में अपना समय देते हैं। मूलरूप में एक सिविल इंजीनियर होने के साथ उनकी अभिरूचियों का विस्तार निम्न क्षेत्रों तक हैः

  • सार्वजनिक कार्यों के इंजीनियरिंग डिजाइन, उल्लेखनीय बांध, सेतु, और सामुद्रिक संरचनाएं;
  • नगरीय नियोजन, तथा नगरीय मामले,
  • फैक्टरियों का नियोजन, तथा अन्य परिसर जो एक अंतर्वैषयिक उपागम से लाभान्वित हैं,
  • सौर ऊर्जा अनुसंधान,
  • सॉफ्टवेयर विकास।
पेटेंट तथा आविष्कार

शिरीष ने बस रूटिंग स्टडी, मुम्बई नामक बस यात्रियों के एक प्रस्थान-गंतव्य सर्वेक्षण को डिजाइन और पर्यवेक्षण किया। निष्कर्षों, तथा बस यात्रा की अनुकृति रूप में विकसित गणितीय मॉडल के आधार पर उन्होंने नगर में बस मार्ग प्रणाली को आदर्श रूप देने के लिए, तथा नए मार्गों की खोज के लिए एक प्रोग्राम लिखा। बसों की संख्या बढ़ाए बिना, नई मार्ग प्रणाली द्वारा यात्रियों के लिए बसों हेतु प्रतीक्षा समय में एक-तिहाई तक कमी लाई गई (1968)

शिरीष द्वारा एक उन्नत, उपयोग में आसान तथा अधिक कार्यदक्ष सौर कुकर का आविष्कार किया गया और शून्य लाभ-हानि आधार पर बिना सब्सिडी के इसके लगभग 1,000 नग बेचे गए। सरकार द्वारा केरोसेन और कुकिंग गैस पर भारी सब्सिडी देने का निर्णय करने पर यह परियोजना रोक दी गई। वूमेन फॉर सस्टेनेबल डेवेलपमेंट, नैरोबी, केन्या के अनुरोध पर इसे बाद में पुनर्जीवित किया गया।

इसके अलावा, रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ सहयोग आधारित कार्य करते हुए उन्होंने एक ऐसे कुकिंग सिस्टम का विकास किया जो खाना पकाने की पारंपरिक शैली में खपत होने वाले ईंधन की तुलना में 75% ईंधन बचत करता था। एक निर्माता ने हाल ही में इसका इकोकुकर (1980 से अब तक) के नाम से बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया। शिरीष ने नार्थलाइट्‌स के अधिक चमकदार, सस्ते, व रखरखाव में आसान विकल्प के रूप में रूफ स्काईलाइट्‌स का आविष्कार किया और इसका पेटेन्ट कराया। एसपीए फैक्टरी डिजाइनों में इनका व्यापक उपयोग किया जाता रहा है। (भारतीय पेटेन्ट सं. 168718, 18 अगस्त, 1989)

प्रकाशन

विश्व बैंक क्यों गलत है, (व्हाइ दि वर्ल्ड बैंक इज रांग) मार्च 2013

पटेल एस.बी. (2013) भवनों के मध्य जीवनः एफएसआई का उपयोग और दुरूपयोग, (लाइफ बिटविन बिल्डिंग्सः दि यूज एंड अब्यूज ऑफ एफएसआई) इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली, खंड 48, सं. 6, पृ. 68-74

‘नगरीय रूपरेखाओं का विश्लेषण-क्या रहन-सहन की अच्छी दशाओं के साथ उच्च सघनता प्राप्त की जा सकती है? (एनालाइजिंग अर्बन लेआउट्‌स-कैन हाई डेंसिटी बी एचिव्ड विद गुड लिविंग कंडीशंस?)’ एन्वायरनमेन्ट एंड अर्बनाइजेशन के आगामी अंक में प्रकाशित (ऑटम 2011)

फोर्थ आईसीआई-डॉ. एम रामैया एंडोमेंट लेक्चर ऑन क्वॉलिटी इन कांक्रीट कांस्ट्रक्शन, नवम्बर 2000

प्रमुख सम्बोधन, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मलिन बस्तियों पर सेमिनार, जनवरी, 2006

उद्‌घाटन भाषण-  टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, हैबिटेट स्कूल, उद्‌घाटन सेमिनार नवम्बर, 2009

‘रिकवरिंग फ्रॉम अर्थक्वेक्सः रिस्पांस, रिकांस्ट्रक्शन एंड इम्पैक्ट मिटिगेशन इन इंडिया’ शिरीष व अरोमार (Eds.), राउटलेज, नयी दिल्ली एवं लंदन, 2010

‘धारावीः मेकओवर ऑर टेकओवर?’ इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली, जून, 2010