नगरीय वृत्तिकार कार्यक्रम – पूर्व पाठ्‌यक्रम

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2014

एकीकृत विकास प्रविधि के माध्यम से लोचशीलता निर्माण पर पालिका अधिकारियों हेतु UNDP-IIHS पाठ्‌यक्रम
15-20 सितम्बर, 2014

हाल के समय में, जलवायु परिवर्तन तथा आपदा जोखिम, भारत द्वारा सामना की जाने वाली विकट चुनौतियां बन गई हैं। यदि मुम्बई की बाढ़, भुज के भूकम्प, उत्तराखंड में बादल फटने, और हाल के समय में हुई अन्य प्राकृतिक आपदाओं से कोई सबक सीखा जा सकता हो, तो ‘यथास्थिति वाली सोच’ अब तर्कसंगत नहीं रह गई है। भविष्य में मौसम के चरम रूपों में बढ़ोत्तरी होने की संभावना यह बताती है कि मौसम आधारित आपदाओं की संख्या और भयावहता में भी बढ़ोत्तरी होगी। ये आधारभूत ढांचे तथा प्राकृतिक संपत्त्यिों को नष्ट करेंगी, महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक गतिविधियों को बाधित कर देंगी, तथा आजीविकाओं व मानव स्वास्थ्य पर अनियमित व दीर्घकालीन प्रभाव डालेंगी। विस्तारित समय अवधि के दौरान अनेक मोर्चों पर विकासात्मक लाभों जैसे कि निर्धनता घटोत्तरी और शिक्षा व स्वास्थ्य में सुधार के सापेक्ष आपदाओं को शीघ्र ही दुर्बल कर दिया जाएगा।

मानवीय विकास पर फोकस के साथ सीसीए और डीआरआर प्रविधि के एकीकरण के माध्यम से लोचशीलता निर्माण में नगरीय वृत्तिकारों को सक्षम बनाना, इस पाठ्‌यक्रम का ध्येय है। विभिन्न क्षेत्रों व पैमानों पर सीसीए, डीआरआर, और विकास योजनाओं, नीतियों व कार्यक्रमों को इस प्रकार डिजाइन व लागू करने का उद्‌देश्य है कि वे जलवायु एवं आपदा जोखिमों के प्रति व्यक्तियों, संपत्तियों (प्राकृतिक एवं निर्मित), तथा व्यवसायों की भेद्यता कम करें।


डिजिटल मानचित्रों के साथ कार्य करना- जीआईएस की शक्ति का लाभ उठाना
25-27 अगस्त, 2014

3 दिवसीय जीआईएस पाठ्‌यक्रम का ध्येय प्रतिभागियों को डेटा संग्रह, निर्माण एवं विश्लेषण से लेकर वेब प्रस्तुतिकरण तक में जीआईएस का अनुप्रयोग-उन्मुख ज्ञान प्रदान करना है। यह जीआईएस के विभिन्न घटकों, स्थानिक डेटा हेतु इसकी प्रासंगिकता, तथा प्रतिभागियों के कार्यक्षेत्र में इसे क्रियान्वित करने के तरीकों से परिचित कराता है।


भूस्थानिक प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षण
24-26 जुलाई, 2014

भौगोलिक जानकारी के उपयुक्त तथा कार्यकुशल प्रबंधन हेतु जीआईएस अनेक आधारभूत प्रकार्य प्रदान करता है। भौगोलिक सूचना प्रणालियों (जीआईएस) का पाठ्‌यक्रम, एक अनुप्रयोग-उन्मुख पाठ्‌यक्रम है जो प्रतिभागियों को भूस्थानिक प्रौद्योगिकी से परिचित कराने के लिए डिजाइन किया गया है। पाठ्‌यक्रम का ध्येय निम्न हैः

  • भूस्थानिक प्रौद्योगिकी के घटकों, तथा इसके अनुप्रयोगों का ज्ञान प्रदान करना
  • प्रतिभागियों को जीआईएस सॉफ्टवेयर (क्यूजीआईएस) तथा जीपीएस हस्तचालित उपकरणों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना
  • प्रतिभागियों को डेटा निर्माण, संवर्धन, विश्लेषण, दृश्यनिरूपण, प्रबंधन, तथा वेब प्लेटफार्मों का उपयोग करते हुए शेयरिंग हेतु जीआईएस सॉफ्टवेयर के उपयोगों के बारे में शिक्षित करना
  • बेहतर निर्णय लेने के लिए प्रतिभागियों को उनके कार्य क्षेत्र में भूस्थानिक प्रौद्योगिकी के उपयोग के बारे में संवेदनशील बनाना।

किफायती आवासनः राज्य नीतियां एवं कार्यवाहियां में प्रबंधन विकास कार्यक्रम
22-23 जुलाई, 2014

प्रबंधन विकास कार्यक्रम का लक्ष्य प्रतिभागियों को किफायती आवास के बारे में राज्यों द्वारा लागू की जा रही नीतियों से परिचित कराना, उनकी उपलब्धियों तथा भावी चुनौतियों का मूल्यांकन करना, और उनकी स्थितियों के बारे में अद्यतन जानकारी साझा करना है। यह कार्यक्रम, सार्वजनिक क्षेत्र के ऐसे आवासन पेशेवरों के लिए है जो सार्वजनिक क्षेत्र की नगरीय सामाजिक आवास योजनाओं की अवधारणा, डिजाइन, प्रबंधन और आपूर्ति से जुड़े हुए हैं।


तमिलनाडु महिला विकास निगम के लिए डेटा विजुअलाइजेशन
3-5 जुलाई, 2014, 7-9 जुलाई, 2014

विविध प्रकार के डेटा को समझना, और उनका उपयोग करते हुए विवरण तैयार करना, प्रैक्टिस (अभ्यास) का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। हालांकि वृत्तिकार प्रायः विविध माध्यमों का उपयोग करते हुए जटिल सूचनाएं संकलित, अनूदित, और प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने की प्रक्रिया में कठिनाईयां अनुभव करते हैं। यह पाठ्‌यक्रम, नगरीय एवं विकासात्मक सेक्टरों के संदर्भ में डेटा का उपयोग करने के महत्त्व को रेखांकित करता है तथा प्रशिक्षणार्थियों को एक संरचनागत प्रक्रिया के उपयोग द्वारा इस पर आधारित विवरण तैयार व साझा करने के लिए प्रशिक्षित करता है।


सामाजिक उपक्रम डिजाइन
1 – 7 जून, 2014

सामाजिक उपक्रम डिजाइन, उभरते सामाजिक उद्यमियों के लिए एक सघन कार्यशाला थी। उपक्रम टीमें, आरंभिक स्तर के उपक्रम मॉडलों के साथ आईं और उन्हें सफलतापूर्वक अग्रगामी योजना तथा शुरूआत करने के लिए आधारभूत वित्तपोषण व संसाधन आकर्षित करने योग्य बनाया गया। एसवीडी का ध्येय, अनुभवी कार्पोरेट लीडर्स तथा उद्यमियों की सर्वोत्तम प्रविधियों से प्रतिभागियों को परिचित कराना था।


देखने के तरीके (वेज ऑफ सीइंग)-फिल्म निर्माण के माध्यम से नगरों का अन्वेषण
21 – 25 मई, 2014

नगर को एक कैनवास की तरह उपयोग करते हुए, आपको दृश्य माध्यम के प्रभावी उपयोग में मदद के लिए ‘वेज ऑफ सीइंग’ को डिजाइन किया गया। ‘वेज ऑफ सीइंग’, एक 5 दिवसीय पाठ्‌यक्रम था, जो छवियां निर्मित करने, तथा हमारे निवास वाले नगर के बीच संबंधों की पड़ताल करता है। यह पाठ्‌यक्रम, किसी भी वैषयिक पृष्ठभूमि वाले प्रतिभागियों को विशिष्ट सामग्री तैयार करने में सक्षम बनाता है। उनको ऐसे कौशलों से लैस करना इसका ध्येय है जो उनके अभ्यास क्षेत्रों में उनकी मदद करें-चाहे वे शोधकर्ता हों, डिजाइनर हों, वास्तुकार हों, कार्यकर्ता हों, या बस स्वयं को रचनात्मक तरीकों से अभिव्यक्त करना चाहते हों।


निष्क्रिय सोलर डिजाइन
24 – 25 अप्रैल, 2014

हरित भवनों हेतु निष्क्रिय सोलर डिजाइन, डेलाइटिग (धूप) और सिम्युलेशंस पर पाठ्‌यक्रम, एक अंतर्क्रियात्मक और अनुप्रयोग-उन्मुख कार्यक्रम था जिसमें सौर ज्यामिति की आधारभूत अवधारणाओं को कवर किया गया, और त्वरित गणनाओं तथा सरल नियमों के प्रयोग द्वारा रणनीतियां स्पष्ट की गईं। इसके अलावा, प्रतिभागियों को ऐसे सॉफ्टवेयर टूल्स से परिचित कराया गया जो निष्क्रिय सोलर डिजाइन की अवधारणाओं को और मजबूत बनाते हैं। प्रतिभागियों ने कागज़-कलम माध्यम और कम्प्यूटर के बीच अदला-बदली करते हुए अनुकूलित कार्यपत्रकों, भौतिक मॉडलों और सॉफ्टवेयर टूल्स का उपयोग करते हुए अभ्यासों पर कार्य किया। इस पाठ्‌यक्रम में सिद्धांतों व व्यावहारिकता का उत्कृष्ट संयोजन किया गया, जिसके साथ नए सॉफ्टवेयर टूल उपयोग करते हुए नवीन परिप्रेक्ष्यों से परिचित कराया गया। इस कार्यक्रम को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा समर्थित किया गया।


सार्वजनिक डेटा स्रोतों के उपयोग द्वारा नगरीय शोध
28 – 30 मार्च, 2014

इस पाठ्‌यक्रम में डेटा सेटों, चरों के प्रकार जिनके लिए डेटा संग्रह किया जाता है, तथा डेटा संग्रह की प्रक्रिया की प्रकृति स्पष्ट करते हुए इन स्रोतों से डेटा विश्लेषण के बारे में स्पष्ट किया गया। शिक्षणार्थियों को निदर्शन की अवधारणा, मल्टीप्लायर्स के उपयोग द्वारा मूल एनएसएस डेटा से जनसंख्या अनुमानों की गणना करने के बारे में बताया गया तथा निदर्श डेटा पर कार्य की कुछ समीक्षाओं से परिचित कराया गया। उन्होंने, भारत में नगरीकरण की बदलती वास्तविकताओं को परिलक्षित करने के लिए निदर्शन ढांचे में परिवर्तनों पर भी चर्चा की। पाठ्‌यक्रम के अंत में, शिक्षणार्थियों को उनके नगरीय शोध संबंधित प्रश्नों के समाधान के लिए जनगणना तथा एनएसएस डेटा दोनों का विश्लेषण करने में सक्षम बनाया गया।


वेज ऑफ सीइंग
26 – 30 मार्च, 2014

प्रभाव जो छवियों में हो सकते हैं, उनके बारे में कोई किस प्रकार से सोचता और कैसे उनका उपयोग करता है? नगर को एक कैनवास की तरह उपयोग करते हुए, आपको दृश्य माध्यम के प्रभावी उपयोग में मदद के लिए ‘वेज ऑफ सीइंग’ को डिजाइन किया गया। ‘वेज ऑफ सीइंग’, एक 5 दिवसीय पाठ्‌यक्रम था, जो छवियां निर्मित करने, तथा हमारे निवास वाले नगर के बीच संबंधों की पड़ताल करता है। यह पाठ्‌यक्रम, किसी भी वैषयिक पृष्ठभूमि वाले प्रतिभागियों को विशिष्ट सामग्री तैयार करने में सक्षम बनाता है। उनको ऐसे कौशलों से लैस करना इसका ध्येय है जो उनके अभ्यास क्षेत्रों में उनकी मदद करें-चाहे वे शोधकर्ता हों, डिजाइनर हों, वास्तुकार हों, कार्यकर्ता हों, या बस स्वयं को रचनात्मक तरीकों से अभिव्यक्त करना चाहते हों।


डेटा विजुअलाइजेशन
25 – 27 मार्च, 2014

विविध प्रकार के डेटा को समझना, और उनका उपयोग करते हुए विवरण तैयार करना, प्रैक्टिस (अभ्यास) का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। हालांकि वृत्तिकार प्रायः विविध माध्यमों का उपयोग करते हुए जटिल सूचनाएं संकलित, अनूदित, और प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने की प्रक्रिया में कठिनाईयां अनुभव करते हैं। यह पाठ्‌यक्रम, नगरीय एवं विकासात्मक सेक्टरों के संदर्भ में डेटा का उपयोग करने के महत्त्व को रेखांकित करता है तथा प्रशिक्षणार्थियों को एक संरचनागत प्रक्रिया के उपयोग द्वारा इस पर आधारित विवरण तैयार व साझा करने के लिए प्रशिक्षित करता है। यह पाठ्‌यक्रम, शिक्षणार्थियों को मामलों और उदाहरणों के विविधतापूर्ण सेट के साथ डेटा विश्लेषण एवं दृश्यनिरूपण में मानव-केंद्रित सैद्धांतिक रूपरेखाओं तथा समकालीन टूल्स से परिचित कराता है। पाठ्‌यक्रम के अंत में, सरल, समझने योग्य तथा प्रभावशाली विवरण तैयार करने के लिए शिक्षणार्थियों को स्थानिक, मात्रात्मक और गुणात्मक डेटा पर कार्य करने के लिए सक्षम किया गया।


हरित भवनों हेतु सौर डिजाइन
1 मार्च, 2014, इंडिया हैबिटेट सेंटर, दिल्ली
8 मार्च, 2014, आईआईएचएस बंगलौर सिटी कैम्पस

जलवायु एवं सूर्य के संदर्भ में हरित भवनों हेतु अनिवार्य डिजाइनिंग अग्रभाग/एनवेलप डिजाइन का भवनों में ऊष्मा स्थानांतरण, धूप अवशोषण, तथा ऊर्जा उपयोग के संदर्भ में बड़ा प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, अग्रभाग एक महत्त्वपूर्ण सौंदर्यात्मक घटक भी होता है। अतः अग्रभाग के डिजाइन को ऊर्जा, आराम और सौंदर्य के तत्वों को संतुलित रखते हुए अनुकूलित करना आवश्यक है। सम्पूर्ण भवन ऊर्जा उपयोग पर भवन डिजाइन के मानदंडों जैसे कि अवस्थिति, दिशा, परिमाण, छाया तत्व, दीवार एवं अवरोधक चयन, कांच क्षेत्र तथा धूप के तुलनात्मक विश्लेषण हेतु सॉफ्टवेयर टूल ईक्वेस्ट का उपयोग किया गया।


डिजिटल मानचित्रों के साथ कार्य करना- जीआईएस की शक्ति का लाभ उठाना
24 – 26 फरवरी, 2014

3 दिवसीय जीआईएस पाठ्‌यक्रम का ध्येय, प्रतिभागियों को डेटा संग्रह, निर्माण एवं विश्लेषण से लेकर वेब प्रस्तुतिकरण तक में जीआईएस का अनुप्रयोग-उन्मुख ज्ञान प्रदान करना है। यह जीआईएस के विभिन्न घटकों, स्थानिक डेटा हेतु इसकी प्रासंगिकता, तथा प्रतिभागियों के कार्यक्षेत्र में इसे क्रियान्वित करने के तरीकों से परिचित कराता है।


निष्क्रिय सोलर डिजाइन
16-17 फरवरी, 2014 | 21-22 फरवरी, 2014

हरित भवनों हेतु निष्क्रिय सोलर डिजाइन, डेलाइटिग और सिम्युलेशंस पर पाठ्‌यक्रम, एक अंतर्क्रियात्मक और अनुप्रयोग-उन्मुख कार्यक्रम था जिसमें सौर ज्यामिति की आधारभूत अवधारणाओं को कवर किया गया, और त्वरित गणनाओं तथा सरल नियमों के प्रयोग द्वारा रणनीतियां स्पष्ट की गईं। इसके अलावा, प्रतिभागियों को ऐसे सॉफ्टवेयर टूल्स से परिचित कराया गया जो निष्क्रिय सोलर डिजाइन की अवधारणाओं को और मजबूत बनाते हैं। प्रतिभागियों ने कागज़-कलम माध्यम और कम्प्यूटर के बीच अदला-बदली करते हुए अनुकूलित कार्यपत्रकों, भौतिक मॉडलों और सॉफ्टवेयर टूल्स का उपयोग करते हुए अभ्यासों पर कार्य किया। इस पाठ्‌यक्रम में सिद्धांतों व व्यावहारिकता का उत्कृष्ट संयोजन किया गया, जिसके साथ नए सॉफ्टवेयर टूल उपयोग करते हुए नवीन परिप्रेक्ष्यों से परिचित कराया गया।

इस कार्यक्रम को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा समर्थित किया गया।

2013

डिजिटल मानचित्रों के साथ कार्य करना- जीआईएस की शक्ति का लाभ उठाना
18-20 जनवरी 2013 | 22- 24 फरवरी 2013 |  23-25 मई 2013

डिजिटल मानचित्रों के साथ कार्य करना- जीआईएस की शक्ति का लाभ उठाना पर अल्पावधि पाठ्‌यक्रम, मानव आवासन के विभिन्न पहलुओं पर कार्य करने वाले, विविध पृष्ठभूमियों वाले कार्यकारी पेशेवरों हेतु एक अद्वितीय और सघन कार्यक्रम था। इसे भौगोलिक सूचना विज्ञान एवं प्रणालियों के अनिवार्य तत्वों से मिश्रित किया गया और तत्पश्चात विशिष्ट केस अध्ययनों पर व्यावहारिक अभ्यास कार्य कराया गया। अल्पावधि पाठ्‌यक्रम प्रतिभागियों को मुख्य अवधारणाओं के ज्ञान से परिचित कराते हुए उन्हें जीआईएस की तकनीकें त्वरित रूप से सीखने, विश्लेषित करने तथा उनके संबंधित विषयक्षेत्रों में प्रयुक्त करने, तथा अंततः वांछित परिणाम प्राप्त करने में सक्षम बनाने के लिए था। इसने शिक्षणार्थियों को लोकप्रिय वेब आधारित जीआईएस अनुप्रयोगों जैसे कि गूगल मैप्स पर आधारित मैश-अप उपयोग/विकसित करने से भी परिचित कराया और शिक्षणार्थियों को स्वयंसेवी भौगोलिक जानकारी तथा क्राउट-सोर्स्ड ज्ञान का उनके संबंधित उपयोग वाले मामलों में प्रयोग करने के बारे में भी अवगत कराया।


मीडिया और शहर
दिनांक- 17-21 अप्रैल, 2013

हमारे शहर, मीडिया के विभिन्न स्वरूपों से अभिन्न रूप से सम्बद्ध हैं। पारम्परिक और नए शहरों ने दृश्य-श्रृव्य माध्यम, विशेषकर सिनेमा में प्रस्तुतिकरण की गुंजाइश सदैव निर्मित की है। इसने कुछ सीमा तक हमारे शहरों को लेकर हमारे नजरिए और सोच को आकार दिया है। कम लागत वाली डिजिटल तकनीक का प्रचलन होने के साथ, छवियों के निर्माता और छवियों के उपभोक्ता के बीच के अंतर धुंधले हो गए हैं। ‘मीडिया और शहर’ पाठ्‌यक्रम हमारे दैनिक जीवन में शहर के विविध आयामों की पड़ताल करता है। यह शहर की विभिन्न विशेषताओं से जुड़ने के लिए मीडिया, और विशेषकर डिजिटल वीडियो का उपयोग करता है जो हमारे राजनैतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों की पड़ताल करता है।


 हरित भवनों हेतु निष्क्रिय सोलर डिजाइन, डेलाइटिग और सिम्युलेशंस
दिनांक 2- 3 फरवरी 2013 | 4- 5 मई 2013 | 14- 15 जून 2013

हरित एवं धारणीय भवनों पर विचार करते हुए, दिन का प्रकाश एक महत्त्वपूर्ण तत्व है क्योंकि कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था पर निर्भरता, किसी भवन की ऊर्जा और लागत अकुशलताएं काफी बढ़ा देती है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि ओ एंड एम की लागतें कम रखने तथा काम करने और रहने के लिए अधिक स्वास्थ्यप्रद वातावरण सुनिश्चित करने के लिए भी अनिवार्य है।

यह अल्पावधि पाठ्‌यक्रम, सिद्धांत को व्यवहार से एकीकृत करने पर केंद्रित था- मानवीय अभ्यासों जैसे कि 3डी प्रोटेक्टर के उपयोग द्वारा शैडो मॉस्क उत्पन्न करना, शेडिंग युक्तियों के आकार निर्धारण के लिए आसान नियमों का प्रयोग, तथा अन्य कई अंतर्क्रियात्मक अभ्यासों का उपयोग करते हुए पहले मूलभूत अवधारणाओं का वर्णन किया गया। इसके पश्चात, आत्मविश्वासपूर्ण सार्थक परिणाम प्राप्त करने के लिए, शेडिंग युक्तियों को डिजाइन करने तथा दिवस प्रकाश का विश्लेषण करने हेतु सिमुलेशन टूल्स का उपयोग किया गया।


धारणीय स्थल नियोजन (साइट प्लॉनिंग)
दिनांकः 3-5 मई, 2013

जहां साइट प्लॉनिंग का कार्य वास्तुकारों तथा इकाई प्रबंधकों द्वारा प्रायः अल्पकालीन लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है, वहीं उनके लिए उनके निर्णयों के दीर्घकालीन परिणामों को समझना अत्यावश्यक नहीं तो महत्त्वपूर्ण अवश्य है। किसी साइट के परिक्षेत्र-निर्धारण, तथा किसी साइट पर भवनों और सुविधाओं के भौतिक अवस्थापन के बारे में निर्णय, न केवल अल्पकालीन फायदों जैसे कि अभिगम्यता एवं सेवाओं के संदर्भ में समझे जाने चाहिए, बल्कि स्थानीय परिवेशों और संदर्भों में परिवर्तनों के सापेक्ष भी ‘भविष्य हेतु उपयुक्त’ होने चाहिए। जल एवं ऊर्जा चक्रों पर ‘हरित अवसंरचना’ सृजन के लिए फोकस किया जाना चाहिए। अतः साइटों के समग्र निष्पादन मानदंडों में उच्चतर मानक प्राप्त करने के लिए उनके नियोजन में सम्पूर्ण परिपक्वता/जीवनचक्र प्रविधि अपनाया जाना अनिवार्य हो जाता है।

यह पाठ्‌यक्रम, नवीन (ग्रीनफील्ड) आवासीय विकास पर फोकस के साथ 10 से 200 एकड़ वाली साइटों के धारणीय जीवनचक्र-उन्मुख नियोजन तथा मौजूदा कार्पोरेट/संस्थागत परिसरों के पुनर्परिकल्पन के बारे में था। इस पाठ्‌यक्रम द्वारा ‘मुख्यधारा हरित’ प्रविधि के साथ इन मसलों का समाधान किया गया। इसमें हरित भवन संहिताओं तथा प्रमाणन प्रणालियों को कवर करते हुए, ये परिणाम प्राप्त करने हेतु पारम्परिक/देशी पद्धतियों को रेखांकित किया गया।


नगरीय सेवाओं में सार्वजनिक-निजी भागीदारी – भावी कार्यवहियों हेतु सबक
दिनांकः 29 अप्रैल – 02 मई, 2013

इस पाठ्‌यक्रम में सार्वजनिक – निजी भागीदारी (पीपीपी) रूपरेखा के बारे में जानकारी प्रदान की गई। इसमें भारत में नगरीय सेक्टर में पीपीपी का गहन विश्लेषण किया गया और इस क्षेत्र में भावी कार्यवाही हेतु महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले गए। नगरीय जल, नगरीय वाहित मल, नगरीय ठोस अपशिष्ट, तथा नगरीय सुविधाओं जैसे कि बाज़ारों इत्यादि पर सत्रों को केंद्रित किया गया। इस पाठ्‌यक्रम की विशिष्ट प्रविधि यह थी कि उक्त समस्त क्षेत्रों में शिक्षणार्थियों को सेक्टर में तकनीकी, संस्थागत, नीति एवं विनियमों को कवर करते हुए समस्त प्रणालियों के बारे में व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान किया गया। शिक्षणार्थियों को नगरीय विकास प्रयासों में पीपीपी की सफलताएं और विफलताएं निर्धारित करने के लिए अनेक केस अध्ययनों से भी परिचित कराया गया। उनको ऐसे पीपीपी मॉडलों पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया जो समकालीन परिदृश्य में कारगर होने संभावित हैं।


डेटा विजुअलाइजेशन
दिनांकः 28 मई-01जून, 2013

विविध प्रकार के डेटा को समझना, और उनका उपयोग करते हुए विवरण तैयार करना, प्रैक्टिस (अभ्यास) का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। हालांकि वृत्तिकार प्रायः विविध माध्यमों का उपयोग करते हुए जटिल सूचनाएं संकलित, अनूदित, और प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने की प्रक्रिया में कठिनाईयां अनुभव करते हैं। इस पाठ्‌यक्रम में, नगरीय एवं विकासात्मक सेक्टरों के संदर्भ में डेटा का उपयोग करने के महत्त्व को रेखांकित किया गया तथा प्रशिक्षणार्थियों को एक संरचनागत प्रक्रिया के उपयोग द्वारा इस पर आधारित विवरण तैयार व साझा करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। यह पाठ्‌यक्रम, शिक्षणार्थियों को मामलों और उदाहरणों के विविधतापूर्ण सेट के साथ डेटा विश्लेषण एवं दृश्यनिरूपण में मानव-केंद्रित सैद्धांतिक रूपरेखाओं तथा समकालीन टूल्स से परिचित कराता है। पाठ्‌यक्रम के अंत में, सरल, समझने योग्य तथा प्रभावशाली विवरण तैयार करने के लिए शिक्षणार्थियों को स्थानिक, मात्रात्मक और गुणात्मक डेटा पर कार्य करने के लिए सक्षम किया गया।


सामाजिक उपक्रम डिजाइन
दिनांकः 16-22 जून, 2013

सामाजिक उपक्रम डिजाइन, सामाजिक उद्यमिता पर एक अल्पावधि पाठ्‌यक्रम था जिसे संयुक्त रूप से Acara और आईआईएचएस द्वारा आयोजित किया गया। सामाजिक उपक्रम डिजाइन, निवेशकों तथा इन्क्यूबेटर प्रतिनिधियों के पैनल हेतु सामाजिक व्यवसाय विचार डिजाइन करने, विकसित करने तथा प्रस्तुत करने का एक अवसर था। इस पाठ्‌यक्रम ने उद्यमिता के बारे में-विशेषकर सामाजिक एवं पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान विकसित करने में सामाजिक उद्यमिता एवं नेतृत्व के उदाहरणों सहित सघन, व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया। इस अल्पावधि पाठ्‌यक्रम ने शिक्षणार्थियों को आधारभूत मसलों की पहचान करने, तथा चिन्हित चुनौती को हल करने के लिए प्रस्तावित समाधान के बिजनेस मॉडल घटकों को विकसित या परिष्कृत करने में सक्षम बनाया।


सजीव नगरीय विरासत का संरक्षण एवं प्रबंधन
दिनांक- 27-31 अगस्त, 2013

विरासत संरक्षण के लिए मौजूदा संस्थागत और नीतिगत ढांचों द्वारा अभी ‘सजीव विरासत’ की धारणा को पूरी तरह से अपनाया नहीं गया है जिसमें नगरों में मूर्त तथा अमूर्त मूल्यों को विचार में लिया जाता है-ऐसे मूल्य जो ऐतिहासिक स्थलों तथा दैनिक उपयोग के भवनों से जुड़े होते हैं, जिनका सांस्कृतिक महत्त्व होता है, और जो इन क्षेत्रों की जीवंतता तथा धारणीयता में योगदान करने वाली पारम्परिक सामाजिक एवं आजीविका प्रणालियों के भाग होते हैं।

यह पाठ्‌यक्रम, नगरीय वृत्तिकारों को ऐसी प्रविधि में सक्षम बनाने के लिए था जिसमें मौजूदा विनियमों तथा दिशानिर्देशों के ढांचे में नगरीय संरक्षण एवं विकास में सजीव विरासत प्रविधि को एकीकृत किए जाने का प्रयास किया जाता है। ऐसे दृष्टिकोण निर्मित करने पर यह लक्षित था कि नगरीय विरासतों के विविध पहलुओं से जुड़े मूल्यों का परीक्षण करते हुए तथा धारणीय विकास हेतु उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले अवसरों की पहचान करते हुए उन्हें कैसे चिन्हित किया, समझा और जोड़ा जाए। इस बारे में समझ विकसित करने का उद्‌देश्य था कि निश्चित मामलों में संरक्षित स्मारकों सहित, नगरीय सजीव विरासत स्थलों में संरक्षण के मसलों का कैसे समाधान किया जाए, जो अनेक सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अंतर्संबंधों के भाग हैं।


भूस्थानिक प्रौद्योगिकी को समझना
दिनांकः 10 दिसम्बर, 2013

इस 1 दिवसीय कार्यक्रम में जीआईएस, इसके घटकों, बहुवैषयिक जुड़ावों का परिचय प्रदान करते हुए मजबूत आधारभूत ज्ञान प्रदान किया गया, जो जीआईएस के वास्तविक जीवन अनुप्रयोगों की पड़ताल करता है। इसमें इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर दिए गएः क्या हमें वास्तव में जीआईएस की आवश्यकता है? जीआईएस से क्या लाभ मिल सकते हैं? क्या लोग सचमुच जीआईएस का उपयोग करते हैं?

कार्यक्रम की विशेषताएं:

  • अंतर्क्रियात्मक सत्रों के माध्यम से जीआईएस का परिचय, डेटा प्राप्ति,
  • निर्माण, विश्लेषण तथा निर्णय-सृजन में जीआईएस का प्रयोग
  • जीपीएस को समझना व इसके साथ कार्य करना
  • सॉफ्टवेयर के बारे में व्यावहारिक सत्र
  • इंडियन इंस्टीट्‌यूट फॉर ह्‌यूमन सेटलमेन्ट्‌स की ओर से प्रमाणपत्र

देखने के तरीके (वेज ऑफ सीइंग)-एक नगर केंद्रित फिल्म एवं फोटोग्राफी पाठ्‌यक्रम
दिनांकः 18-22 दिसम्बर, 2013

‘वे’ज ऑफ सीइंगः इमेज मेकिंग एंड दि सिटी’ एक 5 दिवसीय पाठ्‌यक्रम है जो छवियां (स्थिर या वीडियो) निर्मित करने तथा हमारे निवास वाले नगर के बीच संबंधों की पड़ताल करता है। यह पाठ्‌यक्रम, किसी भी वैषयिक पृष्ठभूमि वाले प्रतिभागियों को विशिष्ट सामग्री तैयार करने में सक्षम बनाता है। उनको ऐसे कौशलों से लैस करना इसका ध्येय है जो उनके अभ्यास क्षेत्रों में उनकी मदद करें-चाहे वे शोधकर्ता हों, डिजाइनर हों, वास्तुकार हों, कार्यकर्ता हों, या बस स्वयं को रचनात्मक तरीकों से अभिव्यक्त करना चाहते हों।

2012

यूआईईएस-नगरीय भारत एवं पर्यावरणीय धारणीयता
दिनांकः 6-10 जनवरी, 2012

‘नगरीय भारत एवं पर्यावरणीय धारणीयता’ पर पांच दिवसीय पाठ्‌यक्रम, पर्यावरणीय धारणीयता के उन प्रमुख मसलों का अंतरवैषयिक परिचय कराने के लिए था, जिनका भारतीय नगरों को समाधान करना होगा। इस अल्पावधि पाठ्‌यक्रम ने प्रतिभागियों को, नगरीय भारत की वास्तविकताओं के सापेक्ष नगरीय धारणीयता की अवधारणात्मक सुदृढ़ताओं से परिचित कराया। समावेशन एवं निर्धनता के मसलों पर जोर देते हुए, परिवहन, ऊर्जा, जल एवं स्वच्छता, भूमि एवं आश्रय आदि प्रमुख सेक्टरों द्वारा सामना की जाने वाली महत्त्वपूर्ण चुनौतियों का परीक्षण किया गया।


सामाजिक उपक्रम डिजाइन
दिनांकः 04-08 जून, 2012

सामाजिक उपक्रम डिजाइन, सामाजिक उद्यमिता पर एक अल्पावधि पाठ्‌यक्रम था जिसे संयुक्त रूप से Acara और आईआईएचएस द्वारा आयोजित किया गया। सामाजिक उपक्रम डिजाइन, निवेशकों तथा इन्क्यूबेटर प्रतिनिधियों के पैनल हेतु सामाजिक व्यवसाय विचार डिजाइन करने, विकसित करने तथा प्रस्तुत करने का एक अवसर था। इस पाठ्‌यक्रम ने उद्यमिता के बारे में-विशेषकर सामाजिक एवं पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान विकसित करने में सामाजिक उद्यमिता एवं नेतृत्व के उदाहरणों सहित सघन, व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया। इस अल्पावधि पाठ्‌यक्रम ने शिक्षणार्थियों को आधारभूत मसलों की पहचान करने, तथा चिन्हित चुनौती को हल करने के लिए प्रस्तावित समाधान के बिजनेस मॉडल घटकों को विकसित या परिष्कृत करने में सक्षम बनाया।


एकीकृत नगरीय आपदा जोखिम घटोत्तरी
दिनांक- 24-28 फरवरी, 2012

भारत के भूभाग, विविध प्राकृतिक संकटों जैसे कि भूकम्पों, भूस्खलनों, बाढ़ों और चक्रवातों की चपेट में आते हैं। देश के बड़े क्षेत्र उच्च जोखिम वाले भूकम्प परिक्षेत्रों में स्थित हैं जहां रिक्टर पैमाने पर छह या अधिक तीव्रता के भूकम्प, विशिष्ट संभावनाएं हैं। पूर्वोत्तर के भागों में विश्व में सर्वाधिक वर्षा होती है जबकि पश्चिमोत्तर के भागों में अत्यल्प वर्षा होती है। इसके अलावा, भारत की लम्बी तटरेखा, तूफानी चपेटों और सुनामी के उच्च जोखिम का सामना करती है। वर्षा, जलवायु एवं भूगोल में यह व्यापक विविधता, तेजी से नगरीकृत होती बस्तियों-विशेषकर बड़े महानगरों-को इन संकटों के प्रति अधिक भेद्य बनाती है। आपदा के प्रति लोचशील शहर बनाने के लिए, ऐसी एकीकृत प्रविधि अपनाना आवश्यक है जिसमें समग्र मूल्यांकन हेतु विविध खतरों तथा भेद्यताओं को ध्यान में रखते हुए न्यूनीकरण तथा पूर्वतैयारी के उपाय किए जाएं और आपदा जोखिम घटोत्तरी को धारणीय नगरीय विकास लक्ष्यों में एकीकृत किया जाए। यह पाठ्‌यक्रम, शिक्षणार्थियों को संकटों व जोखिमों की एकीकृत परिकल्पना में सक्षम बनाने तथा उभरते नगरीकरण के परिदृश्य में मार्गदर्शन के लिए था।


डिजिटल मानचित्रों के साथ कार्य करना- जीआईएस की शक्ति का लाभ उठाना
26-28 मार्च, 2012  / 11-13 मई, 2012  / 16-18 नवम्बर,, 2012

डिजिटल मानचित्रों के साथ कार्य करना- जीआईएस की शक्ति का लाभ उठाना पर अल्पावधि पाठ्‌यक्रम, मानव आवासन के विभिन्न पहलुओं पर कार्य करने वाले, विविध पृष्ठभूमियों वाले कार्यकारी पेशेवरों हेतु एक अद्वितीय और सघन कार्यक्रम था। इसे भौगोलिक सूचना विज्ञान एवं प्रणालियों के अनिवार्य तत्वों से मिश्रित किया गया और तत्पश्चात विशिष्ट केस अध्ययनों पर व्यावहारिक अभ्यास कार्य कराया गया। अल्पावधि पाठ्‌यक्रम प्रतिभागियों को मुख्य अवधारणाओं के ज्ञान से परिचित कराते हुए उन्हें जीआईएस की तकनीकें त्वरित रूप से सीखने, विश्लेषित करने तथा उनके संबंधित विषयक्षेत्रों में प्रयुक्त करने, तथा अंततः वांछित परिणाम प्राप्त करने में सक्षम बनाने के लिए था। इसने शिक्षणार्थियों को लोकप्रिय वेब आधारित जीआईएस अनुप्रयोगों जैसे कि गूगल मैप्स पर आधारित मैश-अप उपयोग/विकसित करने से भी परिचित कराया और शिक्षणार्थियों को स्वयंसेवी भौगोलिक जानकारी तथा क्राउट-सोर्स्ड ज्ञान का उनके संबंधित उपयोग वाले मामलों में प्रयोग करने के बारे में भी अवगत कराया।


जीआईएस तथा सुदूर संवेदन-सिंचाई एवं जल संसाधन प्रबंधन में प्रयोग, पर प्रशिक्षण कार्यक्रम
दिनांकः 15-17 मार्च, 2012

अधिक वैश्वीकृत और अंतरसंपर्कित होती दुनिया में पेशेवरों और नागरिकों के रूप में हम किस प्रकार ऐसे नगरीय भविष्य बना सकते हैं जिनकी जड़ें स्थानीय संदर्भों में हों और जो किसी स्थान की संस्कृति व इतिहासों के प्रति संवेदनशील हों? हम विशिष्ट स्थानों व समुदायों के लाभार्थ, धारणीयता के सार्वभौमिक मानदंडों और मानकों को किस प्रकार लागू कर सकते हैं? हम धारणीय नगरीय भविष्य के लिए सांस्कृतिक विरासत के महत्त्व को किस प्रकार समझ सकते हैं?

डॉ. ज्योति होसग्रहर, निदेशक, एसयूआई, कोलम्बिया विश्वविद्यालय, तथा बंगलौर, भारत, ने स्थानीय संदर्भ से जुड़ी तथा स्थान की विरासत, संस्कृति व ऐतिहासिकता के प्रति संवेदनशील एक समग्र प्रविधि प्रस्तुत की। सैद्धांतिक अवधारणाओं को व्यावहारिक रणनीतियों से एकीकृत करने वाले एक अल्पावधि पाठ्‌यक्रम में उन्होंने विशिष्ट स्थानों व समुदायों के लाभार्थ धारणीयता तथा विरासत संरक्षण के सार्वभौमिक मानदंडों और मानकों को लागू करने के तरीकों का अन्वेषण किया। आधुनिकीकरण हेतु लक्षित नगरीय विकास तथा विरासत संरक्षण के बीच मौजूदा विभाजन के विपरीत डॉ. होसग्रहर ने एकीकृत समाधानों का आह्‌वान किया। नगरीय भविष्यों के निर्माण के लिए स्थान-आधारित तथा समुदाय-आधारित रणनीतियों के बारे में बताने के लिए उन्होंने भारतीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दोनों प्रकार के अनुभवों व परिप्रेक्ष्यों, पद्धतियों एवं उपकरणों, और क्षेत्रीय अध्ययन का उपयोग किया।


धारणीय नगरीय भविष्य
दिनांकः 23-24 मार्च, 2012

अधिक वैश्वीकृत और अंतरसंपर्कित होती दुनिया में पेशेवरों और नागरिकों के रूप में हम किस प्रकार ऐसे नगरीय भविष्य बना सकते हैं जिनकी जड़ें स्थानीय संदर्भों में हों और जो किसी स्थान की संस्कृति व इतिहासों के प्रति संवेदनशील हों? हम विशिष्ट स्थानों व समुदायों के लाभार्थ, धारणीयता के सार्वभौमिक मानदंडों और मानकों को किस प्रकार लागू कर सकते हैं? हम धारणीय नगरीय भविष्य के लिए सांस्कृतिक विरासत के महत्त्व को किस प्रकार समझ सकते हैं?

डॉ. ज्योति होसग्रहर, निदेशक, एसयूआई, कोलम्बिया विश्वविद्यालय, तथा बंगलौर, भारत, ने स्थानीय संदर्भ से जुड़ी तथा स्थान की विरासत, संस्कृति व ऐतिहासिकता के प्रति संवेदनशील एक समग्र प्रविधि प्रस्तुत की। सैद्धांतिक अवधारणाओं को व्यावहारिक रणनीतियों से एकीकृत करने वाले एक अल्पावधि पाठ्‌यक्रम में उन्होंने विशिष्ट स्थानों व समुदायों के लाभार्थ धारणीयता तथा विरासत संरक्षण के सार्वभौमिक मानदंडों और मानकों को लागू करने के तरीकों का अन्वेषण किया। आधुनिकीकरण हेतु लक्षित नगरीय विकास तथा विरासत संरक्षण के बीच मौजूदा विभाजन के विपरीत डॉ. होसग्रहर ने एकीकृत समाधानों का आह्‌वान किया। नगरीय भविष्यों के निर्माण के लिए स्थान-आधारित तथा समुदाय-आधारित रणनीतियों के बारे में बताने के लिए उन्होंने भारतीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दोनों प्रकार के अनुभवों व परिप्रेक्ष्यों, पद्धतियों एवं उपकरणों, और क्षेत्रीय अध्ययन का उपयोग किया।

अनुदेश पद्धति में स्लाइड व्याख्यानों, पठ्‌नीय सामग्री, सेमिनार चर्चाओं, तथा क्षेत्रीय अध्ययन पर आधारित व्यावहारिक अभ्यास कार्य को सम्मिलित किया गया।


स्वच्छता हैकाथन-स्वच्छता में नवप्रवर्तन का उपयोग
01-02 दिसम्बर, 2012

स्वच्छता हैकाथन ने कार्यक्रम विकासकर्ताओं (प्रोग्रामर्स) के समक्ष ऐसे नवप्रवर्तक सॉफ्टवेयर विकसित करने की चुनौती प्रस्तुत की, जो स्वच्छता के क्षेत्र में वास्तविक-जगत की समस्याओं का समाधान करें। स्वच्छता के क्षेत्र द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों के नवप्रवर्तक समाधान खोजने के लिए तकनीकविदों ने स्वच्छता विशेषज्ञों के साथ एक सघन मैराथन में सहयोग किया। विश्व बैंक के जल एवं स्वच्छता कार्यक्रम द्वारा भारत में इंडियन इंस्टीट्‌यूट फॉर ह्‌यूमन सेटलमेन्ट्‌स (आईआईएचएस) व इन्फोसिस के सहयोग से इस कार्यक्रम को विश्व भर में एक साथ कई नगरों में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम आयोजन के पूर्ववर्ती महीनों के दौरान स्वच्छता विशेषज्ञों तथा जनता के लोगों ने ‘समस्याओं की परिभाषाएं’ तैयार कीं, प्रस्तुत कीं और वोट दिए जिनमें स्वच्छता की ऐसी विशिष्ट चुनौतियों को रेखांकित किया गया था जिनका नवपवर्तक आईसीटी द्वारा न्यूनीकरण किया जा सके। फिर सप्ताहांत भर के मैराथन कार्यक्रम में विश्व भर के नगरों से प्रोग्रामरों की टीमों ने इन समस्या परिभाषाओं के लिए नवप्रवर्तक समाधान विकसित किए।

स्रोत: http://www.sanitationhackathon.org/pune

2011

विश्व-स्तरीय नगर की पुनर्कल्पना
03-09 जनवरी, 2011  I  14-18 जून, 2011

अधिक वैश्वीकृत होते विश्व में नगरीय भारत के उभार के साथ, ‘विश्व-स्तरीय’ नगर का विचार, नीति निर्माताओं, निवासियों, उद्यमियों तथा मीडिया की सोच में स्थान बना रहा है। मुम्बई को शंघाई या बंगलौर को सिंगापुर बनाने के आह्‌वान बढ़ रहे हैं। पाठ्‌यक्रम द्वारा, इन दूरदर्शी कल्पनाओं तथा उनमें निहित नगरीय संवृद्धि व विकास के महत्त्वपूर्ण प्रश्नों का पुनःपरीक्षण किया गया। समावेशी विकास, सामाजिक रूपांतरण, धारणीय नगरीयता और आजीविकाएं सक्षम बनाने के लिए भारत की चुनौतियों के नाते, यह अत्यधिक विचारोत्तेजक और सामयिक बहस है। इस पाठ्‌यक्रम में सैद्धांतिक बहसों को मौजूदा प्रविधियों के सापेक्ष लाते हुए, इन नगरों के विकास की प्रेरक प्रणालियों, प्रक्रियाओं और मूल्यों का अंतर्वैषयिक अन्वेषण संभव बनाया गया। व्याख्यानों, व्यावहारिक तत्वों, मार्गदर्शनों और मामलों के समृद्ध संयोजन के उपयोग द्वारा इस पाठ्‌यक्रम ने प्रत्येक स्तर पर प्रतिभागिता हेतु ऊर्जावान तथा रूचिकर शिक्षण परिवेश सुगम बनाया।


एकीकृत नगरीय आपदा जोखिम घटोत्तरी
दिनांक- 17-21 अक्टूबर 2011 | 24- 28 फरवरी, 2012

भारत के भूभाग, विविध प्राकृतिक संकटों जैसे कि भूकम्पों, भूस्खलनों, बाढ़ों और चक्रवातों की चपेट में आते हैं। देश के बड़े क्षेत्र उच्च जोखिम वाले भूकम्प परिक्षेत्रों में स्थित हैं जहां रिक्टर पैमाने पर छह या अधिक तीव्रता के भूकम्प, विशिष्ट संभावनाएं हैं। पूर्वोत्तर के भागों में विश्व में सर्वाधिक वर्षा होती है जबकि पश्चिमोत्तर के भागों में अत्यल्प वर्षा होती है। इसके अलावा, भारत की लम्बी तटरेखा, तूफानी चपेटों और सुनामी के उच्च जोखिम का सामना करती है। वर्षा, जलवायु एवं भूगोल में यह व्यापक विविधता, तेजी से नगरीकृत होती बस्तियों-विशेषकर बड़े महानगरों-को इन संकटों के प्रति अधिक भेद्य बनाती है। आपदा के प्रति लोचशील शहर बनाने के लिए, ऐसी एकीकृत प्रविधि अपनाना आवश्यक है जिसमें समग्र मूल्यांकन हेतु विविध खतरों तथा भेद्यताओं को ध्यान में रखते हुए न्यूनीकरण तथा पूर्वतैयारी के उपाय किए जाएं और आपदा जोखिम घटोत्तरी को धारणीय नगरीय विकास लक्ष्यों में एकीकृत किया जाए। यह पाठ्‌यक्रम, शिक्षणार्थियों को संकटों व जोखिमों की एकीकृत परिकल्पना में सक्षम बनाने तथा उभरते नगरीकरण के परिदृश्य में मार्गदर्शन के लिए था।


वॉटर हैकाथन-जल एवं स्वच्छता में नवप्रवर्तन का उपयोग
21-23 अक्टूबर, 2011

वॉटर एंकर, तथा विश्व बैंक के जल एवं स्वच्छता कार्यक्रम ने इंडियन इंस्टीट्‌यूट फॉर ह्‌यूमन सेटलमेन्ट्‌स व इंडिया वॉटर पोर्टल (आईडब्ल्यूपी) साझेदारों के साथ 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर, 2011 तक वॉटर हैकाथन का आयोजन किया। जल एवं स्वच्छता के क्षेत्र में मसलों के समाधान में सहायता हेतु मोबाइल अनुप्रयोगों में प्रोटोटाइप विकसित करना इस कार्यक्रम का उद्‌देश्य था। वॉटर हैकाथन, चिंतन व प्रोग्रामिंग की एक सघन मैराथन थी जिसमें सॉफ्टवेयर विकासकर्ताओं व डिजाइनरों ने जल एवं स्वच्छता की समस्याओं जैसे कि सुरक्षित पेयजल तथा पर्याप्त स्वच्छता सुविधाओं की सुलभता, बाढ़ एवं सूखा तथा पर्यावरण प्रदूषण आदि के हल के लिए नए टूल्स विकसित करने के लिए आपस में सहयोग किया। वॉटर हैकाथन का आयोजन बंगलौर में 21 अक्टूबर-23 अक्टूबर, 2011 के दौरान किया गया। इस कार्यक्रम को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, नगरीय विकास मंत्रालय, भारत सरकार, हैवलेट पैकार्ड, ब्रॉडविज़न ग्रुप ऑफ इंडिया, एनजेएस, इंजीनियर्स इंडिया, तथा ऑनमोबाइल द्वारा समर्थित किया गया।

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डिजिटल मानचित्रों के साथ कार्य करना- जीआईएस की शक्ति का लाभ उठाना
29 नवम्बर-03 दिसम्बर, 2011

डिजिटल मानचित्रों के साथ कार्य करना- जीआईएस की शक्ति का लाभ उठाना पर अल्पावधि पाठ्‌यक्रम, मानव आवासन के विभिन्न पहलुओं पर कार्य करने वाले, विविध पृष्ठभूमियों वाले कार्यकारी पेशेवरों हेतु एक अद्वितीय और सघन कार्यक्रम था। इसे भौगोलिक सूचना विज्ञान एवं प्रणालियों के अनिवार्य तत्वों से मिश्रित किया गया और तत्पश्चात विशिष्ट केस अध्ययनों पर व्यावहारिक अभ्यास कार्य कराया गया। अल्पावधि पाठ्‌यक्रम प्रतिभागियों को मुख्य अवधारणाओं के ज्ञान से परिचित कराते हुए उन्हें जीआईएस की तकनीकें त्वरित रूप से सीखने, विश्लेषित करने तथा उनके संबंधित विषयक्षेत्रों में प्रयुक्त करने, तथा अंततः वांछित परिणाम प्राप्त करने में सक्षम बनाने के लिए था। इसने शिक्षणार्थियों को लोकप्रिय वेब आधारित जीआईएस अनुप्रयोगों जैसे कि गूगल मैप्स पर आधारित मैश-अप उपयोग/विकसित करने से भी परिचित कराया और शिक्षणार्थियों को स्वयंसेवी भौगोलिक जानकारी तथा क्राउट-सोर्स्ड ज्ञान का उनके संबंधित उपयोग वाले मामलों में प्रयोग करने के बारे में भी अवगत कराया।