के बारे में

आईआईएचएस मीडिया लैब एक मंच है जो बहु मीडिया प्रैक्टिस के माध्‍यम से नगरीय प्रश्‍नों को समझने का प्रयास और उनकी चर्चा करता है।  मीडिया लैब अधिदेश डिजिटल ऑडियो-वीडियो का उपयोग करके कक्षा के भीतर और बाहर शोध, शिक्षण और अध्‍यापन संस्‍कृति का निर्माण करता है। यह लघु फिल्‍म निर्माण पाठ्यक्रम भी आयोजित करता है जो डिजिटल वीडियो एवं अचल फोटोग्राफी के माध्‍यम से शहर के विचार पता लगाने में मदद करता है और नियमित फिल्‍म प्रदर्शनों का संचालन करता है। मीडिया लैब प्रमुख शिक्षाविदों और वृत्तिकारों के साथ नगरीय ऑडियो वीडियो संवाद का संग्रह भी है।  आईआईएचएस मीडिया लैब वह स्‍थान है जहां नगरीय रचनात्‍मक अभिव्‍यक्ति का प्रदर्शन किया जा सकता है, ताकि कई ‘देखने के तरीके’ उन शहरों जिनमें हम रहते हैं, की नयी एवं अगल समझ को बढ़ावा दे सकें।

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ऑडियो-वीडियो संग्रह

आईआईएचएस यूट्यूब चैनल पर 400 वीडियों हैं और यह प्रमुख शिक्षाविदों एवं नगरीय वृत्तिकारों के साथ संवाद सहित वीडियो की विविध श्रेणी के रूप में नगरीय संबंधित ऑडियो-विजुअल सामग्री को रिकार्ड करने और साझा करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। यूट्यूब चैनल समकालीन नगरीय भारत की सबसे अहम चिंताओं में से कुछ के बारे में वार्तालाप के लिए एक संग्रह है।

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स्विसनेक्‍स में प्रोफेसर गेरहार्ड श्मिट का व्‍याख्‍यान

स्विसनेक्‍स इंडिया तथा भारतीय मानव अधिवास संस्‍थान (आईआईएचएस) ने वैश्विक शहरीकरण प्रक्रिया से संबंधित चुनौतियों और भारत के लिए इसके निहितार्थ पर आधारित इस व्‍याख्‍यान श्रृंखला का सह-आयोजन किया।

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लॉरेंस लिआंग की कॉमिक्‍स एवं नगरीय कल्‍पना- एक उद्धरण

भारतीय मानव अधिवास संस्‍थान (आईआईएचएस) में कॉमिक्‍स और नगरीय अनुभव के बीच संबंध के बारे में कालॉरेंस लिआंग का व्‍याख्‍यान। आईआईएचएस में यह भीड़ भरी सभा थी और व्‍याख्‍यान ने आकर्षक अंतर्दृष्टि प्रस्‍तुत की।

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ग्रीष्‍मकालीन संस्‍थान 2013

ग्रीष्‍मकालीन संस्‍थान उभरते सामाजिक उद्यमियों के लिए एक गहन कार्यशाला है। कार्यक्रम का उद्देश्‍य सफलतापूर्वक मार्गदर्शन और शुरूआत करने के लिए सुविधा एवं संसाधनों के साथ सामाजिक उद्यमियों को प्रारंभिक चरण प्रदान करना है। वेंचर टीम प्रारंभिक चरण वाले वेंचर मॉडलों के साथ उपस्थित रहती है और प्रारंभिक धन आकर्षित करने एवं मार्गदर्शन के लिए तैयार रहती है।

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प्रकाश बेलावाड़ी (पत्रकार और रंगमंच कलाकार)

‘नगरीय” अर्थव्‍यवस्‍था भारत के आर्थिक विकास में बहुत ही महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। आईआईएचएस और कैलिफोर्निया विश्‍वविद्यालय, बर्कले द्वारा 26 एवं 27 मार्च 2013 को संयुक्‍त दो दिवसीय सम्‍मेलन का आयोजन किया गया जिसमें भारतीय कस्‍बों, शहरों और महानगरों की अर्थव्‍यवस्‍था की प्रभावी एवं न्‍यायसंगत कार्यप्रणाली से संबंधित कई महत्‍वपूर्ण प्रश्‍नों की चर्चा करने के लिए भारत और विश्‍व स्‍तर के अग्रणी विद्वान शामिल हुए।

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Publics@iihs: शिरीष बी पटेल

शिरीष बी पटेल एक सिविल इंजीनियर हैं उन्‍हें लोक निर्माण कार्यों जिनमें मुख्‍य रूप से बांध, सेतु और समुद्री संरचनाओं की इंजीनियरिंग डिजाइन करने; नगरीय नियोजन और नगरीय मामलों; कारखानों, अन्‍य परिसरों के नियोजन जिन्‍हें अनुशासनात्‍मक दृष्टिकोण से लाभ होता है;  सौर ऊर्जा एवं ऊर्जा संरक्षण अनुसंधान; और सॉफ्टवेयर विकास में रूचि है।

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‘अनुसंधान, नीति एवं आगे की योजना’ पर डॉ. मोंटेक अहलूवालिया का भाषण

भारत नगरीय सम्‍मेलन (आईयूसी) भारतीय विकास पर जारी बहस में नगरीय चुनौतियों और अवसरों को प्रमुखता से प्रस्‍तुत करने के लिए बनाए गए कार्यक्रमों की एक श्रृंखला है। आईयूसी नीति, वृत्ति एवं नागरिक समाज कार्य को प्रेरित करने के लिए लागू अनुसंधान पर बहु-स्‍तरीय बातचीत के लिए एक ओपेन-फ्रेम ‘स्‍थान’ तैयार करना चाहता है।

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सामाजिक उद्यमिता पर संघट्ट निवेशकों के साथ वार्ता: प्रश्‍न एवं उत्‍तर

महत्‍वाकांक्षी, अनुभवहीन या प्रतिष्ठित सामाजिक उद्यमी प्राय: अपनी विकास यात्रा में वित्‍त पोषण संबंधी चुनौतियों का सामना करते हैं। जटिल वित्‍त पोषण पारितंत्र को देखते हुए, कैसे ये उद्यमी संघट्ट निवेशकों के लिए खुद को प्रभावी ढंग से उपयुक्‍त स्‍थान पर खड़ा कर सकते हैं? यह चर्चा संघट्ट निवेशकों के साथ बातचीत करने और उनके तर्क को समझने हेतु उद्यमियों के लिए एक मंच प्रदान करने पर लक्षित है। चर्चा ने सामाजिक उद्यमियों और क्षेत्र के अन्‍य कर्ताओं को संघट्ट निवेश की कार्यप्रणालियों में एक अंतर्दृष्टि दी है।

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Publics@iihs: अरुणा रॉय- I, एमकेएसएस

Publics@iihs समूचे भारत में बस्तियों के साथ और उनके भीतर उन्‍मुक्‍त एवं सामान्‍य सम्‍पर्क के लिए व्‍याख्‍यानों, विचार गोष्ठियों, कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों, सड़क पर क्रियाकलापों, डिजाइन शैरेट, पब्लिक स्‍टूडियों एवं अभियानों की पारस्‍परिक क्रियाओं की एक श्रृंखला, दूसरों के बीच आईआईएचएस की प्रतिबद्धता के मर्म का प्रति‍निधित्‍व करता है। सभी कार्यक्रम जनता के लिए नि:शुल्‍क और खुले हैं।

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लघु पाठ्यक्रम

मीडिया लैब लघु शिक्षण कार्यक्रम चलाता है जो छवि निर्माण के विचार और शहर पर केंद्रित हैं। पाठ्यक्रम हर उस व्‍यक्ति के लिए खुला है जो छवियों और शहरों जिनमें हम रहते हैं, के बीच संबंधों; साथ ही उन तरीकों जिनमें छवि निर्माण का विचार सस्‍ती डिजिटल एवं मोबाइल प्रौद्योगिकी के आगमन के साथ बदलता रहता है, में रूचि रखता है। पाठ्यक्रम कुछ फिल्‍मी अध्‍ययनों के सिद्धांत और व्‍यवहार का मिश्रण है जहां पाठ्यक्रम के शिक्षार्थियों को पाठ्यक्रम के अंत तक अपनी स्‍वयं की फिल्‍मों के निर्माण के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है।

फिल्‍म निर्माण के माध्‍यम से शहरों को देखने-खोजने के तरीके
21-25 मई 2014

Ways of Seeing

प्रभाव जो छवियों में हो सकते हैं, उनके बारे में कोई किस प्रकार से सोचता और कैसे उनका उपयोग करता है? कैनवास के रूप में शहर का उपयोग करके ‘देखने के तरीके’ को प्रौद्योगिकी एवं विजुअल मीडियम को एक साथ लाकर सम्‍पर्क बनाने हेतु विजुअल भाषा का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में आपकी मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है। ‘देखने के तरीके’ एक पांच दिवसीय पाठ्यक्रम होगा जो तैयार दृश्‍यों और शहरों जिनमें हम रहते हैं, के बीच संबंध का पता लगाएगा। यह पाठ्यक्रम सहभागियों को विशिष्‍ट सामग्री तैयार करने के प्रति सक्षम करेगा, चाहे उनकी अनुशासनात्‍मक पृष्‍ठभूमि कुछ भी हो। इसका उद्देश्‍य उन्‍हें कौशलों से सुसज्जित करना है जो उनकी अपने अभ्‍यास के कार्यक्षेत्रों में मदद करेंगे- चाहे वे शोधकर्ता, डिजाइनर, आर्किटेक्‍ट, कार्यकर्ता हों या वे स्‍वयं को सिर्फ रचनात्‍मक व्‍यक्‍त करते हों।


पिछले पाठ्यक्रम

मीडिया और शहर का परिचय- अप्रैल 2013
‘मीडिया और शहर’ पाठ्यक्रम का उद्देश्‍य डिजिटल वीडियो फॉर्मेट में शहर के बहु पहलुओं को समझने, ग्रहण और प्रस्‍तुत करने में शिक्षार्थियों को जागरूक और प्रशिक्षित करना है। इसका उद्देश्‍य राजनीतिक, सांस्‍कृतिक, आर्थिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में शहर की विभिन्‍न अनुभूतियों को समझना और उनकी चर्चा करना है। फिल्‍म निर्माण  पर आधारित यह 5 दिवसीय पाठ्यक्रम सिद्धांत और व्‍यवहार का मिश्रण है जिसमें पूरी तरह से नगरीय सेटिंग में लघु फिल्‍मों के निर्माण के बारे में व्‍यावहारिक व क्रियाशील तकनीकी कौशल प्रशिक्षण शामिल है।

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फिल्‍म महोत्‍सव

अर्बन लेंस फिल्‍म महोत्‍सव
अर्बन लेंस फिल्‍म महोत्‍सव के दूसरे संस्‍करण में, इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेन्ट्स (आईआईएचएस) आपके लिए भारत, दक्षिण अफ्रीका, पेरू, चिली एवं कनाडा से लगभग 35 कथेतर साहित्‍य फिल्‍में  लेकर आया है। 26 से 28 सितम्‍बर 2014 तक चलने वाला यह महोत्‍सव यह समझाने का प्रयास करता है कि किस प्रकार पूरे समय कथेतर साहित्‍य फिल्‍मों में ‘शहर’ को सिनेमाई अभिव्‍यक्ति मिली।

आईआईएचएस मीडिया लैब ने अप्रैल 2013 में ”अर्बन लेंस: फिल्‍मों और शहर का महोत्‍सव” के प्रथम संस्‍करण का प्रसारण किया। महोत्‍सव कथेतर फिल्‍मों के प्रदर्शन के लिए पूरी तरह से समर्पित था जो भारत में बहु लेंसों के माध्‍यम से शहर के विचार को अच्‍छी तरह से दर्शाती हैं। इस महोत्‍सव के पीछे का विचार उन तरीकों का पर्यवेक्षण करना था जिनमें फिल्‍म निर्माता/कलाकार बहु मीडिया वृत्तियों के माध्‍यम से शहर के विचार समझते हैं और उससे संबंधित वार्तालाप करते हैं।

फिल्‍म प्रदर्शन

आईआईएचएस मीडिया लैब फिल्‍म निर्माताओं के साथ नियमित रूप से फिल्‍मों का प्रदर्शन और वार्तालाप करता है जो अपने कार्य के माध्‍यम से शहर का अन्‍वेषण करते हैं, ताकि शहर के विचार की एक अलग समझ उभर सके।


हाल के प्रदर्शन

क्‍या हुआ इस शहर को
निर्देशक: दीपा धनराज
20 नवम्‍बर 2013 को आईआईएचएस बैंगलोर सिटी परिसर में शाम 5:30 बजे प्रदर्शन। फिल्‍म निर्माता फिल्‍म प्रदर्शन के बाद चर्चा के लिए उपस्थित रहेगा।


वार्तालाप

सुरभी शर्मा
फिल्‍म निर्माता सुरभी शर्मा के साथ उनकी नई फिल्‍म बिदेशिया इन बम्‍बई पर वार्तालाप
वीडियो देखें

अंजलि मोंटीरो और के पी जयशंकर
फिल्‍म निर्माताओं के साथ उनकी फिल्‍म सो हेड्डन सो होड्डन पर वार्तालाप
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फिल्‍म प्रदर्शन

25/10/2013

दि ह्यूमन फैक्‍टर
निर्देशक: रूद्रदीप भट्टाचारजी

सारांश  | ट्रेलर

7/12/2012

वेरिकल सिटी
निर्देशक: अविजीत मुकुल किशोर

सारांश | ट्रेलर

25/9/2013

बिदेशिया इन बम्‍बई
निर्देशक: सुरभी शर्मा

सारांश | ट्रेलर

23/11/2012

इनवोकिंग जस्टिस
निर्देशक: दीपा धनराज

सारांश | ट्रेलर

5/3/2013

ओ फ्रैंड, दिस वेटिंग!
निर्देशक: संध्‍या कुमार और जस्टिन मैककार्थी

सारांश

11/9/2012

मेरा अपना शहर
निर्देशक: समीरा जैन

सारांश | ट्रेलर

2/1/2013

सो हेड्डन सो होड्डन
निर्देशक: अंजलि मोंटीरो और के पी जयशंकर

सारांश
 | ट्रेलर

26/10/2012

कोडिंग कल्‍चर
निर्देशक:  गौतम सोंती

सारांश | ट्रेलर

13/1/2013

वाटर एंड ए सिटी
निर्देशक: स्‍वाति दांडेकर

सारांश | ट्रेलर

26/10/2012

प्रेजेंस
निर्देशक: यशस्विनी रघुनंदन और एकता मित्‍तल

सारांश ट्रेलर

11/12/2012

क्‍यू2पी
निर्देशक: पारोमिता वोहरा

सारांश | ट्रेलर

अध्‍यापन अनुसंधान

आईआईएचएस मीडिया लैब अधिदेश का य‍ह भाग कक्षा में शिक्षण कार्यक्रम तथा इससे संबंधित कुछ अध्‍यापन प्रश्‍नों के लिए ऑडियो विजुअल सामग्री तैयार करने में मदद करता है। शिक्षण कार्यक्रम का व्‍यापक ऑडियो विजुअल प्रलेखन उपलब्‍ध है जो भविष्‍य में- एक संग्रह के रूप में, ऑनलाइन उपलब्‍ध शिक्षण सामग्री (संपादित) के रूप में बहु उपयोग और अपनी शिक्षण पद्धतियों के संबंधित संकाय के परावर्तन के लिए होंगे।

लोग

सुबाश्री कृष्‍णन
प्रमुख- मीडिया लैब

सुबाश्री जामिया मिलिया इस्‍लामिया में मास कम्‍युनिकेशन रिसर्च सेंटर की एक भूतपूर्व छात्रा हैं। उन्‍होंने पिछले 10 वर्षों में स्‍वतंत्र वृत्‍तचित्र निर्माता के रूप में काम किया है। आईआईएचएस मीडिया लैब के भाग के रूप में, उनके कार्य ने शहर से संबंधित विचारों को समझने के लिए ऑडियो विजुअल माध्‍यम का पूरी तरह से उपयोग किया है- चाहे वह नियमित फिल्‍म प्रदर्शन, अर्बन लेंस फिल्‍म महोत्‍सव (2013) आयोजित करना हो या शहर के शिक्षाविदों एवं वृत्तिकारों के साथ दस्‍तावेज संभाषण के लिए डिजिटल वीडियो का उपयोग करना हो।

उनका फिल्‍म निर्माण का कार्य वृत्‍तचित्र के लिए मुद्दों पर आधारित अधिकारों पर कई प्रमाणित कथेतर साहित्‍य फिल्‍मों के निर्माण तक फैला है। दक्षिण पूर्व एशिया में इंटरनेट सेंसरशिप पर आधारित उनका पहला वृत्‍तचित्र ‘ब्रेव न्‍यू मीडियम’ राष्‍ट्रीय एवं अंतरराष्‍ट्रीय दोनों फिल्‍म महोत्‍सवों में प्रदर्शित किया गया। लोक सेवा प्रसारण ट्रस्‍ट (पीएसबीटी) द्वारा निर्मित पुरस्‍कार विजेता ”दिस आर दैट पर्टीकुलर पर्सन” आधिकारिक पहचान दस्‍तावेजों के विचार और विशिष्‍ट पहचान संख्‍या के संदर्भ को अच्‍छी तरह से दर्शाता है। फिल्‍म केरल अंतरराष्‍ट्रीय वृत्‍तचित्र एवं लघु फिल्‍म महोत्‍सव (आईडीएसएफएफके), 2013 में सर्वश्रेष्‍ठ लघु वृत्‍तचित्र के रूप में घोषित की गयी। उनकी आगामी फिल्‍म (निर्माणाधीन)1980 के दशक में असम में हुए नेली नरसंहार में घटित हिंसक सार्वजनिक घटनाओं के माध्‍यम से स्‍मरणोत्‍सव (या उनकी कमी) के विचार को अच्‍छी तरह से दर्शाती है।

2008 में, सुबाश्री को जार्ज वाशिंगटन विश्‍वविद्यालय के अंतरराष्‍ट्रीय वृत्‍तचित्र फिल्‍मकार फेलोशिप से सम्‍मानित किया गया। सुबाश्री 2012 के लिए चार्ल्‍स वालेस अल्‍पकालिक अनुसंधान और पेशेवर अनुदान की प्राप्‍त कर्ता हैं। उन्‍हें दो बार 2011 और 2013 में लोक सेवा प्रसारण ट्रस्‍ट के फिल्‍म फेलोशिप से भी सम्‍मानित  किया गया।

फिल्‍म स्‍कूल जाने से पहले सुबाश्री ने 1998 से 2000 तक अकादमिक जर्नल ‘सेमिनार’ के लिए प्रिंट मीडिया में कार्य किया।


यशोदरा उडुपा
वरिष्‍ठ सहयोगी

एक पत्रकार के रूप में शुरूआत करने के बाद, यशो शीघ्र ही अन्‍य संरूपों की तरफ प्रेरित हो गयीं। उन्‍होंने लघु फिल्‍मों की पटकथा लिखी और उनका सहनिर्देशन किया, स्‍वतंत्र फीचर फिल्‍म के रिलीज, वितरण एवं बिक्री पर काम किया और फीचर अवधि वाले वृत्‍तचित्र का संपादन किया जिसे भारत में सर्वश्रेष्‍ठ तहकीकात संबंधी फिल्‍म के लिए राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिला। उनके कार्यों में स्‍वास्‍थ्‍य, बैंगलोर और आईआईएचएस में विकेंद्रित कचरा प्रबंधन पर आधारित फिल्‍में शामिल हैं। वह अजीविका, परंपरा, अर्थव्‍यवस्‍था और शासन के कार्यस्‍थल के रूप में बैंगलोर के फूल बाजार का अन्‍वेषण करती फिल्‍म पर काम कर रही हैं।

फिल्‍म निर्माण करने के लिए उन्‍हें जिस चीज ने आकर्षित किया वह दूर भौगोलिक, सामाजिक और सांस्‍कृतिक स्‍थानों के दर्शकों के साथ अनुभव चित्रित और साझा करने की उनकी अपनी क्षमता है। उनका यह विश्‍वास है कि उत्‍सुक श्रोता होना और साक्षात्‍कार, फोटोग्राफ लिए गए या फिल्‍माए गए व्‍यक्ति में विश्‍वास भर देना और अपने काम में उनकी  संभावित प्रस्‍तुति में उनका सम्‍मान करना अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है।

गोल्‍डस्मिथ, लंदन विश्‍वविद्यालय से स्‍नातक, उन्‍होंने आईआईएचएस में शामिल होने से पहले अल जजीरा, जामिया मिलिया इस्‍लामिया और अलीपुर फिल्‍म्स सहित संगठनों के लिए काम किया है।


जोहराब रेज गामत
सहयोगी-मीडिया लैब

जोहराब ने यूएस में लघु एवं मझोले उद्यम व्‍यवसायों हेतु विज्ञापन फिल्‍मों के निर्माण में मदद करने के लिए एओएल में वीडियो प्रोडक्‍शन विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया है। उन्‍होंने भर्ती से ग्राहक सेवा तक के कार्यों को संभालते हुए विषयवस्‍तु फर्म के लिए भारत संचालन को भी प्रबंधित किया है। स्‍वतंत्र संपादक के रूप में, जोहराब का कार्य मुख्‍य रूप से कार्यक्रम कवरेज और प्रचार विज्ञापन फिल्‍मों पर केंद्रित है।

जोहराब की विशेषज्ञता शूटिंग, संपादन और वीडियो प्रोडक्‍शन में निहित है।

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