प्रैक्टिस के क्षेत्र

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IIHS प्रैक्टिस को अपने शिक्षण, अधिगम, एवं अनुसंधान एजेंडों से गहराई से जुड़ा हुआ, तथा नगरीय रूपांतरण के अपने मिशन का आधारभूत अंग मानता है। वर्तमान में IIHS का उभरता हुआ प्रैक्टिस कार्यक्रम, मानव बस्तियों एवं नगरीयकरण के व्यापक क्षेत्र में राष्ट्रीय और राज्य सरकारों, सार्वजनिक, अर्ध-राजकीय पालिका एजेंसियों, अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों तथा निजी फर्मों को सलाह सेवाएं प्रदान करता है। विभिन्न परियोजनाओं में यह भारत के नगरीय विकास की कुछ उभरती चुनौतियों के अत्याधुनिक एवं एकीकृत समाधान उपलब्ध कराता है जो भारतीय बस्तियों की विशिष्ट आर्थिक, स्थानिक, संस्थागत तथा राजनैतिक वास्तविकताओं से संबंधित व उनमें स्थित हैं। संस्थागत परियोजनाओं के अतिरिक्त IIHS संकाय, व्यक्तिगत रूप से अनेक राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय सरकारी समितियों एवं नीतिगत मंचों को सेवाएं प्रदान करता है। हमारे मुख्य प्रैक्टिस क्षेत्र निम्न हैं:

प्रैक्टिस के क्षेत्र

नगरीय व परिधीय-नगरीय क्षेत्र
पर्यावरणीय धारणीयता
हरित संवृद्धि
सहनशीलता नियोजन
पर्यावरणीय नियोजन

नगरीय ग्राम्य संपर्क
नए एवं उभरते हुए कस्बे
द्वितीयक कस्बे
नगरीय-परिधीय-नगरीय विकास रणनीतियां

जलवायु परिवर्तन एवं आपदा जोखिम
जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं न्यूनीकरण
आपदा जोखिम न्यूनीकरण
जोखिम एवं भेद्यता मूल्यांकन

आर्थिकी
नगरीय आर्थिक विकास
अनौपचारिक क्षेत्र में आजीविकाएं
नगरीयकरण का आर्थिक भूगोल

निर्धनता
नगरीय निर्धनता न्यूनीकरण
निर्धनों हेतु पर्यावरणीय सेवाएं
किफायती आवासन

जल एवं पर्यावरणीय सेवाएं
जल संसाधन एवं पेयजल
पारिवारिक एवं पर्यावरणीय स्वच्छता
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन

आवासन
किफायती आवासन
किराए पर आवासन
विनिर्माण

परिवहन
धारणीय परिवहन नियोजन

नगरीय भूमि प्रशासन एवं प्रबंधन
भूमि अर्जन, आर एंड आर
भूमि पंजीयन एवं अभिलेख प्रबंधन

शिक्षा
उच्चतर शिक्षा

संस्थान, विधि, एवं प्रशासन
संस्थागत एवं मानव विकास
नगरीय प्रशासन एवं विकेंद्रीकरण
सार्वजनिक निजी साझेदारियां
नगरीय सेवाओं का सामुदायिक प्रबंधन