परियोजनाएं

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भारत की कुछ उभरती हुई नगरीय विकास चुनौतियों के लिए अग्रणी और एकीकृत समाधान उपलब्‍ध कराने के विचार से राष्‍ट्रीय और राज्‍य सरकारों, सार्वजनिक, पैरा-राज्‍यीय नगर-निगम एजेंसियों, अंतर्राष्‍ट्रीय एजेंसियों और निजी फर्मों को IIHS मानव बस्तियों एवं नगरीयकरण के विस्‍तृत क्षेत्र में सलाहकार सेवाएं प्रदान करती है। साथ ही यह अनेक राष्‍ट्रीय और राज्‍यस्‍तरीय सरकारी समितियों और नीति मंचों पर भी सेवा करती है।

घरेलू नीति एवं अभ्यास (प्रैक्टिस) समर्थन

जलवायु एवं विकास नेटवर्क (सीडीकेएन) एकीकृत नगरीय जलवायु मूल्‍यांकन
”फ्यूचर प्रूफिंग इंडियन सिटीज”  एक 0.5 मिलियन पाउंड की परियोजना है जो बैंगलोर और मदुरै के लिए पहले महानगरीय एकीकृत जलवायु मूल्‍यांकन शुरू करेगी। आईआईएचएस, अटकिंस यूके और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के बीच यह 14 माह की सहयोगी परियोजना जलवायु वित्‍तपोषण के लिए नगरीय अनुकूलन एवं न्‍यूनीकरण अवसर तैयार करने में सबसे अलग हटकर कार्य करेगी।  परियोजना का उद्देश्‍य संभावित जलवायु खतरों का जवाब देकर, निर्धनता कम करते हुए तथा आर्थिक विकास को उत्‍प्रेरित करते हुए निम्‍न कार्बन अर्थव्‍यवस्‍था के लिए संक्रमण सक्षम करके बैंगलोर (आईआईएचएस के नेतृत्‍व में) और मदुरै (अ‍टकिंस के नेतृत्‍व) में हितधारकों की मदद करना है। ऐसा करते हुए, यह विशेष रूप से स्‍थानीय स्‍वामित्‍व और नीति प्रक्रियाओं के कार्यान्‍वयन को बढ़ावा देने का प्रयास करती है।

प्रैक्टिस क्षेत्र: जलवायु परिवर्तन, सहनशीलता नियोजन, जोखिम मूल्‍यांकन
भागीदार और सेवार्थी: जलवायु एवं विकास नेटवर्क (सीडीकेएन), अटकिंस, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल)


रॉकफेलर- आईआईएचएस अर्बन इंडिया पॉलिसी सपोर्ट पार्टनरशिप (शहरी भारत नीति समर्थन साझेदारी) 2012-2014
यह साझेदारी अपर्याप्‍त रूप से विश्‍लेषित पार-क्षेत्रीय विषयवस्‍तुओं और संभावित नीति एवं कार्यक्रम मध्‍यवर्तनों के क्षेत्रों की खोज करके भारत में शहरी रूपांतरण के लिए संभावित लाभ उठाना चाहती है। 0.4 मिलियन डालर की दो वर्षीय साझेदारी 2012 के अंत में शुरू हुई थी और अक्‍टूबर 2014 के अंत तक जारी रहेगी। आईआईएचएस कार्य पत्रों, नीति सारपत्रों, डिजिटल, साक्षात्‍कारों की श्रृंखला और विविधि शिक्षण-अधिगम सामान का उत्‍पादन करेगा जो भारतीय शहरों द्वारा सामना की जा रहीं विवि‍ध प्रकार की शहरीकरण चुनौतियों की चर्चा करने की दिशा में निर्देशित हैं। सभी ज्ञान आउटपुट राष्‍ट्रीय, राजकीय और शहरी नीति निर्धारकों, वृत्तिकारों, उद्यमियों, नागरिक समाज नेताओं तथा समुदायों एवं स्‍थानीय हितधारकों पर लक्षित हैं। यह परियोजना उन नीति चिंताओं को समझेगी जो वृद्धि-निष्‍पक्ष-सहनशील-परिवर्तनकारी विकास स्‍पेक्‍ट्रम को फैलाती हैं, विशेष रूप से तब जब दक्षिण परिदृश्‍य की तुलना में इनका अवलोकन किया जाता है।

प्रैक्टिस क्षेत्र: शहरी अर्थव्‍यवस्‍था, शहरी निर्धनता, जल, पर्यावरण, आवास, आपदा जोखिम न्‍यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, गतिशीलता, संस्‍थान, कानून एवं प्रशासन, नगरीय भूमि, ग्रामीण शहरी संबंध और नए उभरते शहर
भागीदार और सेवार्थी: रॉकफेलर फाउंडेशन (आरएफ)


URBAN LAND RECORDS MANAGEMENT AND E-GOVERNANCE SUPPORT INITIATIVE
This year-long project seeks to examine land records modernisation efforts in four Indian states of Karnataka, Haryana, Himachal Pradesh and Bihar. It involves a background study of the legal-institutional terrain as well as an analysis of the effectiveness of current and on-going land record reform programmes and e-governance initiatives, their linkages to planning and the technologies in use. The project attempts an assessment of how the above factors impact various stakeholders within Government, citizen groups (including informal settlements), and the real estate and housing finance markets.  The study involves detailed secondary analyses, primary studies and key informant interviews in the selected states and specific sites within them. It will draw in international participants who have experience of large scale records modernization and produce national and state level reports, that will be presented for discussions in state level and national level consultations to identify potential areas of improvement, institutional arrangements and pilot test sites.

Practice Areas: Urban Land management, Land tenure and Informality, Urban Planning, Law and Governance, Institutions, Housing, Rural Urban Linkages.
Partners And Clients: Omidyar Network. www.omidyar.com


संयुक्‍त राष्‍ट्र विकास कार्यक्रम: नगरीय निर्धनता रणनीति (2013-2017)
आईआईएचएस ने 2013-2017 के दौरान भारत के लिए यूएनडीपी की शहरी निर्धनता रणनीति की रूपरेखा बनाने में मदद की है। यूएनडीपी ने भारत में ऐतिहासिक सशक्‍त ग्रामीण विकास उपस्थिति दर्ज करायी है। उनका नया ग्राम कार्यक्रम अपना ध्‍यान शहरों में बदलाव के लिए बढ़ती चुनौतियों और जबरदस्‍त अवसर पर प्रतिक्रिया दर्शाने हेतु नगरीय क्षेत्रों में हस्‍तक्षेप पर केंद्रित करता है।  सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, समुदाय तथा अन्‍य संभावित दाताओं के बहुल हितधारक यूएनडीपी के लिए प्रचालनात्‍मक भागीदारी रणनीति बनाने में सहायता करने के लिए प्रवृत्‍त थे। अंतिम आउटपुट एक रणनीति रिपोर्ट के रूप में था।

प्रैक्टिस क्षेत्र: शहरी अर्थव्‍यवस्‍था, शहरी निर्धनता
भागीदार और सेवार्थी: संयुक्‍त राष्‍ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी)


महिला हाउसिंग ट्रस्‍ट (सेवा) प्रोजेक्‍ट
विस्‍तृत स्‍व कार्यरत महिला संघ (सेवा) नेटवर्क का सदस्‍य एमएचटी, बिल एवं मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की सहायता से कटिहार, बिहार में नगरीय स्‍वच्‍छता परियोजना शुरू कर रहा है। नगरीय स्‍वच्‍छा के लिए परियोजना की दूरदर्शिता ‘व्‍यापार मॉडल और सर्वोत्‍तम प्रविधियों को विकसित करना, जांच और परिष्‍कृत करना’ है जिसे बाद में बिहार के अन्‍य भागों में विस्‍तार करने के लिए बढ़ाया जा सकता है। परियोजना का उद्देश्‍य हैंडपंप और शौचालयों के लिए ऋण के माध्‍यम से कम से कम 1,200 परिवारों के लिए ‘संवेदनशील स्‍वच्‍छता समाधान’ का विस्‍तार करना और 250 लोग, मुख्‍य रूप से महिलाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार सृजन के द्वारा स्‍थानीय संसाधन समूह तैयार करना है। आईआईएचएस एमएचटी का शोध सहयोगी है जो प्रस्‍तावित हस्‍तक्षेपों की प्रभाविता, स्थिरता और मापनीयता जांचने के लिए शोध ढांचा विकसित कर रहा है। यह कार्यक्रम की प्रभाविता की निगरानी और इसके प्रभाव का पता लगाने के लिए बेसलाइन और इंडलाइन अध्‍ययन शुरू करके किया जाएगा।

प्रैक्टिस क्षेत्र: पर्यावरणीय सेवाएं, जल एवं स्‍वच्‍छता
भागीदार और सेवार्थी: स्‍व कार्यरत महिला संघ (सेवा)


बैंगलोर विकास प्राधिकरण (बीडीए) ज्ञान भागीदारी
आईआईएचएस ने संशोधित बैंगलोर मास्‍टर प्‍लान 2035 के विकास में बीडीए की मदद की है। इसमें संरचना, प्रबंध एवं परामर्शदाताओं के चयन में सलाहकारी सहायता; मानव संसाधन मूल्‍यांकन और क्षमता निर्माण योजना; और पूरी तरह कार्यात्‍मक जीआईएस सेल तथा योजना निष्‍पादन की सहायता के लिए डेटा शामिल है

प्रैक्टिस क्षेत्र: संस्‍थागत विकास
भागीदार और सेवार्थी: बैंगलोर विकास प्राधिकरण (बीडीए)


कर्नाटक सरकार: प्रमुख कर्नाटक नगरीय विधान में संशोधन
कर्नाटक नगर एवं ग्राम आयोजना अधिनियम की प्रक्रिया को भारतीय संविधान के 74वें संशोधन के विकेन्‍द्रीकरण प्रावधानों के अनुरूप लाने में सहायता करना। इसमें नगरीय प्रशासन, संस्‍थागत ढांचे के साथ साथ राजनीतिक आर्थिक कारणों को शामिल करने वाले नीति एवं विधायी मुद्दों की वैचारिक समझ शामिल है। इसमें बैंगलोर हेतु  विकास नियंत्रण विनियमों में संशोधन करने के लिए जारी प्रयास का समर्थन करना भी शामिल है।

प्रैक्टिस क्षेत्र: नगरीय कानून एवं प्रशासन
भागीदार और सेवार्थी:  कर्नाटक सरकार (जीओके)


राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली सरकार
आईआईएचएस टीम ने दिल्‍ली नगर निगम अधिनियम, 1957 में संशोधन करने के लिए सहायता प्रदान की है। टीम को विशेष रूप से अनौपचारिक बस्तियों एवं निम्‍न आय वाली बस्तियों के लिए बुनियादी पर्यावरणीय और सामाजिक सेवाओं के प्रावधान पर जानकारी प्रदान करने के साथ अधिनियम में संशोधन करने हेतु  विशेषज्ञों की समिति को बुलाने का कार्य सौंपा गया था।

प्रैक्टिस क्षेत्र: नगरीय कानून एवं प्रशासन
भागीदार और सेवार्थी:  दिल्‍ली सरकार (जीओएनसीटी)


अन्‍य सलाहकार क्षेत्र
इसके अतिरिक्‍त, आईआईएचएस स्‍टॉफ के सदस्‍य भारत सरकार की प्रमुख समितियों के सदस्‍यों के रूप में नीति विचार-विमर्श की एक विस्‍तृत श्रृंखला में भाग लेते हैं।

योजना आयोग
निर्माण क्षेत्र पर बारहवीं योजना संचालन समिति
उच्‍च शिक्षा पर बारहवीं योजना संचालन समिति
उच्‍च शिक्षा में कॉर्पोरेट क्षेत्र की भागीदारी पर नारायणमूर्ति समिति
उच्‍च शिक्षा में समुदाय नियुक्ति पर बारहवीं योजना उप-समिति
शिक्षा क्षेत्र सुधारों के लिए रोडमैप
नालंदा विश्‍वविद्यालय के लिए राष्‍ट्रीय निगरानी समिति

मानव संसाधन विकास मंत्रालय
अनुसंधान एवं नवाचार के लिए राष्‍ट्रीय विश्‍वविद्यालयों पर परामर्श

शहरी विकास मंत्रालय
औद्योगिक तथा शहरी जल आपूर्ति एवं स्‍वच्‍छता पर बारहवीं योजना कार्य समूह

आवास एवं शहरी निर्धनता उन्‍मूलन मंत्रालय
राजीव आवास योजना पर विचार-विमर्श
राष्‍ट्रीय शहरी अजीविका मिशन पर विचार-विमर्श

अंतर्राष्ट्रीय नीति एवं अभ्यास (प्रैक्टिस) समर्थन

जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की मूल्यांकन रिपोर्ट 5: नगरीय अनुकूलन पर प्रमुख लेखक का समन्वयन
रॉकफेलर फाउंडेशन के सहयोग के साथ आईआईएचएस की एक टीम ने, नगरीय अनुकूलन के मूल्यांकन पर आईपीसीसी की पांचवीं मूल्यांकन रिपोर्ट में योगदान किया है। यह अध्याय, नगरीय केंद्रों पर जलवायु परिवर्तन के प्रेरकों एवं प्रभावों, उनकी (केंद्रों की) जनसंख्या और अर्थव्यवस्थाओं के वर्तमान वैज्ञानिक ज्ञान का मूल्यांकन करता है; इन परिवर्तनों से अनुकूलन  करने के लिए (विशेषकर भेद्य समूहों को सुरक्षित करने के लिए) रणनीतियों और उपायों को चिन्हित करता है; और इसे सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक संस्थागत एवं प्रशासनिक बदलावों का मानचित्रण करता है। इस अध्याय में अकादमिक और शोध संस्थानों, नीतिनिर्माताओं और नगरीय प्रशासकों, निजी क्षेत्र तथा नागरिक समाज आदि द्वारा जलवायु परिवर्तन अनुकूलन की दिशा में किए गए अनुसंधान तथा कार्यवाही, और विश्व भर के नगरों में रूपांतरणकारी विकास की वैश्विक समीक्षा की गई है। न्यूयार्क, डरबन, लंदन और दार-अस-सलाम के केस अध्ययन प्रस्तुत किए गए हैं।

प्रैक्टिस के क्षेत्रः धारणीय नगरीय विकास, लोचशीलता नियोजन
साझेदार एवं क्लाइंट्‌सः संयुक्त राष्ट्र धारणीय विकास समाधान नेटवर्क (यूएन-एसडीएसएन)


आपदा जोखिम के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की अंतर्राष्ट्रीय रणनीति (यूएनआईएसडीआर)-जोखिम का वैश्विक मूल्यांकन 2011 और 2013
आपदा जोखिम घटोत्तरी पर वैश्विक मूल्यांकन रिपोर्ट (जीएआर) यूएनआईएसडीआर द्वारा आपदा जोखिम घटोत्तरी का द्विवार्षिक वैश्विक मूल्यांकन तथा मानवता को प्रभावित करने वाले प्राकृतिक संकटों की समग्र समीक्षा और विश्लेषण है। जीएआर, आपदा जोखिम घटोत्तरी में जोखिम पैटर्नों, रूझानों व प्रगति की निगरानी द्वारा ह्‌योगो कार्यवाही रूपरेखा की प्राप्ति में योगदान करता है तथा देशों व अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को रणनीतिक नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करता है। आईआईएचएस, जीएआर के लिए परामर्शी बोर्ड के रूप में कार्य करता है और ‘निजी क्षेत्र की भूमिका तथा आपदा जोखिम घटोत्तरी’ विषय पर एक अनुसंधान अध्ययन के माध्यम से जीएआर प्रक्रिया को सपोर्ट किया है। इस अध्ययन में दिल्ली में बड़े पैमाने वाली नगरीय परियोजनाएं क्रियान्वित करने वाले चार कार्यकर्ताओं-डीएमआरसी, डीएनडी, डीआईएएल, डीएलएफ-का द्वितीयक शोध एवं प्राथमिक सर्वेक्षणों, मूल्यांकनों एवं साक्षात्कारों के माध्यम से विश्लेषण सम्मिलित किया गया है।

प्रैक्टिस के क्षेत्रः आपदा जोखिम घटोत्तरी, सार्वजनिक निजी साझेदारी
साझेदार एवं क्लाइंट्‌सः आपदा जोखिम हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ की अंतर्राष्ट्रीय रणनीति (यूएनआईएसडीआर)


 ओईसीडी/विश्व बैंक/यूएनईपीः अंतर्राष्ट्रीय हरित संवृद्धि ज्ञान प्लेटफार्म
हरित संवृद्धि ज्ञान प्लेटफार्म शोधकर्ताओं एवं विकास विशेषज्ञों का एक वैश्विक नेटवर्क है जो हरित संवृद्धि सिद्धांत एवं व्यवहार में बड़े ज्ञान अंतरालों का चिन्हांकन एवं समाधान करता है। व्यापक परामर्श एवं शोध के माध्यम से जीजीकेपी, वृत्तिकारों एवं नीतिनिर्माताओं को आर्थिक संवृद्धि सुदृढ़ बनाने एवं धारणीय विकास क्रियान्वित करने के लिए बेहतर टूल्स उपलब्ध कराता है। आईआईएचएस जीजीकेपी परामर्शी समिति (एसी) को सेवा प्रदान करता है जिसमें हरित संवृद्धि शोध एवं अभ्यास से संबंधित गहन तकनीकी तथा/या नीतिगत अनुभव वाले विशेषज्ञ शामिल हैं।

प्रैक्टिस के क्षेत्रः हरित संवृद्धि, लोचशीलता नियोजन, धारणीय नगरीय विकास
साझेदार एवं क्लाइंट्‌सः विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी), आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी), हरित संवृद्धि ज्ञान प्लेटफार्म (जीजीकेपी)