सम्मेलन एवं कार्यशालाएं

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IIHS पिछले तीन वर्षों के दौरान भारतीय नगरीकरण पर नीतिगत एवं अनुसंधान संवादों के अग्रणी आयोजनकर्ता के रूप में उभरा है। IIHS द्वारा आयोजित किए गए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों की एक चयनित सूची निम्न हैः

तुलनात्मक नगरीय एवं क्षेत्रीय अनुसंधान
अपने दूसरे वर्ष में IIHS में पीएचडी कार्यशाला का फोकस वैश्विक दक्षिण के नगरों पर तथा इनमें अनुसंधान पर बना रहा। निर्देशात्मक (नियामक) नगरीय सिद्धांत की चुनौतियों के समुच्चय के उभार की पृष्ठभूमि में स्थित यह कार्यशाला, वैश्विक दक्षिण के नगरों के बारे में, तथा इनसे नए ज्ञान को उत्पन्न करने में सहायता हेतु प्रतिबद्ध है। ऐसा करने के लिए यह प्रश्न हैः नगरीय और क्षेत्रीय अनुसंधान को कैसे संरचित, अभिकल्पित और संचालित किया जाए- और किसके लिए?

आपदा जोखिम घटोत्तरी पर 2015 वैश्विक मूल्यांकन प्रतिवेदन
एक ओर आपदा जोखिम घटोत्तरी में अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और स्थानीय प्रयासों में की गई प्रगति, तथा दूसरी ओर निरंतर बढ़ते आपदा जोखिम व हानि के बीच स्पष्ट अलगाव है। जहां भौतिक संकटों जैसे कि बाढ़ों, भूकम्पों, सूखे और चक्रवातों से जुड़ी आपदाओं से हानियों के रूझान स्पष्ट रूप से अधिक रहे हैं व निरंतर बढ़े हैं-कम से कम आर्थिक संदर्भों में-और अधिक चिंताजनक रूप में, भविष्य में जीवन तथा संपत्तियों की हानि के जोखिम अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं। इस अलगाव की पहचान करते हुए हम आपदा जोखिम प्रबंधन व घटोत्तरी हेतु एक चुनौती की पहचान करते हैं: यदि इनपुट और आउटपुट भी, जैसा कि हम दावा करते हैं, मात्रा और गुणवत्ता में बढ़ रहे हैं, तो हमारे प्रयासों के परिणाम और प्रभाव समग्र जोखिम व आपदा हानियों में घटोत्तरी के संदर्भ में इंद्रियगोचर क्यों नहीं हैं?

भारत में उदार कलाओं एवं विज्ञान का भविष्य
भारत में उदार कलाएं और विज्ञान शिक्षा, कई नए संस्थानों और प्रयासों के माध्यम से जड़ें जमा रही है, जिससे यह इनमें से कुछ नए उपक्रमों को प्रदर्शित करने तथा यह अन्वेषित करने का उपयुक्त अवसर बन गया है कि किस तरह से भारतीय उदार कलाएं अपने तरीके से विकसित की जा सकती हैं, इसकी अपनी अकादमिक परंपराएं बनाई जा सकती हैं जो समाज पर स्थायी व सार्थक प्रभाव डालें। ऑनलाइन शिक्षा, शिक्षणविधियां और पाठ्‌यक्रम समामेलित हो रहे हैं, और हमें ऐसी प्रेरक कार्यशालाएं तैयार करने की आशा है जहां भारतीय उच्चतर शिक्षा को बढ़ावा देने वाले लीडर, भारत में शिक्षा के भावी परिदृश्य पर चर्चा कर सकें।

’21वीं शताब्दी के भारतीय नगर’ (2013)-कस्बे, महानगर, और भारतीय अर्थव्यवस्था, पर IIHS-UC बर्कले सम्मेलन

‘नगरीय’ अर्थव्यवस्था की भारत के आर्थिक विकास में भूमिका अधिक महत्त्वपूर्ण होती जा रही है। IIHS और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले द्वारा 26 व 27 मार्च, 2013 को संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में भारत व वैश्विक स्तर के अग्रणी अध्येता एकत्र हुए और भारतीय कस्बों, नगरों और महानगरों की अर्थव्यवस्था की प्रभावी व समतापूर्ण कार्यप्रणाली से संबंधित अनेक महत्त्वपूर्ण प्रश्नों पर चर्चा की। चर्चाओं का फोकस रियल एस्टेट बाज़ारों, संकुलन अर्थव्यवस्थाओं, नगरीकरण के नए स्वरूपों तथा नगरीय प्रशासन की संरचनागत समस्याओं व इसके अतिरिक्त, विकसित नगरीय अवसंरचना, नौकरियों के सृजन में वृद्धि, किफायती आवासन तक पहुंच में बढ़ोत्तरी, प्रशासन की पारदर्शी प्रणालियों का विकास, नगरीय वित्त के नए स्रोत उत्पन्न करने, और नगरीय निर्धनों के लिए व्यावहारिक सामाजिक कल्याण प्रणालियों के निर्माण हेतु ठोस नीतियों को बढ़ावा देने में सहायक तरीकों पर रहा।

तुलनात्मक नगरीय और क्षेत्रीय अनुसंधानः एक डॉक्टोरल कार्यशाला (2013)

तुलनात्मक नगरीय और क्षेत्रीय अनुसंधान नामक चार दिवसीय डॉक्टोरल कार्यशाला का आयोजन भारतीय मानव बस्ती संस्थान (IIHS) के बंगलौर नगर परिसर में 09 से 13 जुलाई, 2013 तक किया गया। इस कार्यशाला के उद्‌देश्य ये थेः (a) स्थापित तथा उभरते नगरीय अध्येताओं के समुदाय को एकजुट करना, (b) उन्नत डॉक्टोरल छात्रों या हाल के पीएचडी के लिए बौद्धिक विनिमय व प्रतिक्रियाओं हेतु अवसर तैयार करना तथा (c) पद्धतिशास्त्रीय विकल्पों तथा नवप्रवर्तनों पर और लेखन से प्रकाशन तक की यात्रा पर फोकस करते हुए अनुसंधान एवं विश्लेषण की प्रकृति व प्रक्रिया पर चिंतन करना। इस कार्यशाला में विविध विषयों व वृत्ति क्षेत्रों में अनेक नगरीय मुद्‌दों पर कार्य करने वाले, भारत के आठ  व पांच अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से 21 पीएचडी छात्रों ने भाग लिया।

‘भारतीय नगरों में कार पर निर्भरता खत्म करने व परिवहन विकल्प उन्नत बनाने के विकल्प’ पर कार्यशाला (2013)

21वीं शताब्दी की धारणीय परिवहन प्रणालियों के विकास में समावेशी बहु-मॉडल विकल्पों का प्राविधान -प्रधानतः जन परिवहन, पैदल चलने व साइकिल से चलने की सुविधाएं-तथा कारों व अन्य निजी मोटर वाहनों का प्रयोग सीमित किया जाना शामिल है।

कर्टिन विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर IIHS ने एक कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें विचारात्मक लोकतंत्र प्रक्रियाओं के माध्यम से पारवहन उन्मुख अभिकल्प से संबंधित कौशलों को समझने व विकास करने के बारे में खोजबीन की गई। ऑस्ट्रेलियाई व भारतीय परिवहन पेशेवरों के बीच संबंध सुदृढ़ बनाना, इस कार्यशाला का एक प्राथमिक उद्‌देश्य था।

सौदेबाजी नगर कार्यशाला (2012)

केंद्रीय नीति अनुसंधान केंद्र (सीपीआर) दिल्ली के साथ मिलकर IIHS ने IIHS बंगलौर नगर परिसर में 28 व 29 सितम्बर, 2012 को ‘सौदेबाजी नगर’ पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। किसी नगर में पक्षकारों के बीच संबंधों को समझने, निवासियों, तथा सरकार के विविध स्तरों के बीच संपर्क पर जोर देने का प्रयास सौदेबाजी नगर में किया गया। विशेषरूप से, कार्यशाला में इसे रेखांकित किया गया कि विविध सेवाओं की उपलब्धता या अभाव के संदर्भ में किस तरह से निवासीगण, राज्य के विभिन्न स्वरूपों को महत्त्व देते हैं और राज्य के कार्यकर्ता, निवासियों को किस तरह से देखते हैं। हमने यह भी अन्वेषित किया कि किस तरह से विविध पक्षकार राज्य से, निजी सेवाप्रदाताओं से, और राज्य की विभिन्न शाखाओं को आवंटित विधिक दायित्वों के परिप्रेक्ष्य में स्व-प्राविधान द्वारा ये सेवाएं प्राप्त करने के लिए सौदेबाजी करते हैं।

भारत नगरीय सम्मेलन (2011)

येल और जेसीसीडी की साझेदारी में तथा भारत सरकार के शहरी विकास एवं आवास तथा नगरीय निर्धनता उन्मूलन मंत्रालयों, आईडीएफसी, और हुडको के सहयोग से IIHS ने 2011 में भारत के सबसे बड़े नगरीय सम्मेलन का आयोजन मैसूर में इन्फोसिस परिसर में किया जिसमें 600 से अधिक प्रतिनिधि एकत्रित हुए।

इसी के साथ विज्ञान भवन में आयोजित दिल्ली नीति सम्मेलन में इस बारे में एक चर्चा शुरू हुई कि भारत में नगरीय विकास का मापन, निगरानी और समर्थन किस प्रकार किया जाए। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय, राज्य और नगर स्तर के नीतिनिर्माताओं और अन्य पक्षकारों ने भाग लिया जो नगरीय विकास में साक्ष्य अंतरालों व संस्थागत चुनौतियों से भलीभांति परिचित थे। इसे शहरी विकास, ग्राम्य विकास, एवं आवास, तथा निर्धनता उन्मूलन के केंद्रीय मंत्रियों व योजना आयोग के उपाध्यक्ष द्वारा सम्बोधित किया गया। IIHS अनुसंधान प्रकाशन नगरीय भारत 2011 को इस सम्मेलन में जारी किया गया।

भारत में समावेशी नगर कार्यशाला (2011)

सेवा, IIHS, विश्व बैंक तथा डीएफआईडी द्वारा संयुक्त रूप से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया। नगरीय संदर्भ में अपवर्जन का आशय समझना, समावेशी भारतीय नगरों का ‘विज़न’ विकसित करने की शुरूआत, मौजूदा नगरीय विकास नीतियों व कार्यक्रमों के ‘समावेशन व अपवर्जन’ प्रभावों का विश्लेषण, तथा सरकारी नीतियों में व बारहवीं योजना में कार्यक्रमों में नगरीय समावेशन संसूचन हेतु संभावित नीतिगत निर्देशनों को समझना, इस कार्यशाला के मुख्य उद्‌देश्य थे।