भारत में उदारवादी कला और विज्ञान के भविष्‍य पर एक सम्‍मेलन

परिचय

भारत में उदारवादी कला और विज्ञान शिक्षा बड़ी संख्‍या में नए संस्‍थानों और पहलों के रूप में अपनी जड़े स्‍थापित कर रही है, जिसके कारण इन कुछ नए उपक्रमों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ इस बात को भी अनुभव करने का उपयुक्‍त समय है कि भारतीय उदारवादी कला स्‍वत: ही किस प्रकार विकसित हो सकती है, अपनी स्‍वयं की शैक्षणिक परंपराएं निर्मित कर सकती है जो समाज के लिए स्‍थाई और अर्थपूर्ण प्रभाव पैदा करती हैं। ऑनलाइन शिक्षा, अध्‍यापन और पाठ्यक्रम में उन्‍नति हो रही है और हम एक प्रेरक कार्यशाला तैयार करने की आाशा करते हैं जहां भारतीय उच्‍च शिक्षा को उन्‍नत बनाने में नेतृत्‍वकर्ता भारत में शिक्षा के भावी परिदृश्‍य की चर्चा कर सकते हैं।

प्रमुख वक्‍ता, जिनमें रामचन्‍द्र गुहा (लेखक, स्‍तम्‍भकार, इतिहासकार और दार्शनिक), नंदन नीलकणि (इंफोसिस के पूर्व सीईओ, और सम्‍मानित लेखक एवं वक्‍ता) और आन्‍द्रे बेटेल (लेखक एवं दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसर)शामिल हैं, इस बात पर चर्चा करने के लिए कि भारत उदारवादी कला स्‍नातक शिक्षा की अपनी विधा को कैसे विकसित कर सकता है, शैक्षणिक नेतृत्‍वकर्ताओं और प्रोफेसरों के एक स्‍फूर्त एवं प्रगतिशील समूह से जुड़ेंगे।

अपनी बैठक में, हम भारत में उच्‍च शिक्षा के क्रियान्‍वयन हेतु ऐसी सर्वश्रेष्‍ठ रणनीति पर चर्चा करेंगे जो नए देश में भारत के द्वारा सामना की जाने वाली कुछ चुनौतियों को हल करने में मदद करेगी। उदारवादी कला और विज्ञान शिक्षा स्‍नातकों की ऐसी नई पीढ़ी का सृजन करने में सहायता कर सकती है जो जटिल मुद्दों जैसेकि नगरीय-ग्राम्‍य विभाजन, भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की तेजी से विकास करती हुई प्रकृति के बारे में सृजनात्‍मक तरीके से विचार करने के लिए प्रशिक्षित हों। भारत के द्वारा सामना किए जाने वाले कुछ गम्‍भीर मुद्दों का पता लगाने के लिए उदारवादी कला और विज्ञान शिक्षा को मानविकी और दर्शनशास्‍त्र का विलय विज्ञान व तकनीक में करे।

क्‍या उदारवादी कला और विज्ञान शिक्षा जवाब देती है? उदारवादी कला और विज्ञान शिक्षा ‘’समग्र’’ शिक्षा उपलब्‍ध कराती है जो सृजनात्‍मक और स्‍वतंत्र विचारों को बढ़ावा देने के लिए है। यह एक ऐसी शिक्षा है जो लोगों को उनकी अभिलाषाओं के लिए प्रयास करने हेतु उदारवादी बना सकती है, उन्‍हें उनके सर्वोत्‍तम प्रयास में सक्षम कर सकती है और सभी क्षेत्रों में उनकी क्षमताओं का प्रसार कर सकती है। इस प्रकार की शिक्षा का एक लक्ष्‍य ऐसे स्‍नातक तैयार करना है जो दुनिया में और भी संतुलित परिदृश्‍य के साथ पहुंचेगे और जो सामाजिक जिम्‍मेदारी की समझ के साथ दूसरों की सहायता करने के लिए नई नौकरियां और कार्यक्रम तैयार कर सकें।

हालांकि, विदेश में शिक्षा की इस विधा की एक लम्‍बी परंपरा है,विशेष रूप से संयुक्‍त राज्य में, लेकिन क्‍या भारत के सन्‍दर्भ यह कारगर होगी? भारत में इस प्रकार के कुछ उपक्रमों का अनुभव कैसा रहा? किस प्रकार नई तकनीकें, उनमें से कई भारत से, उच्‍च शिक्षा के परिदृश्‍य को बदल सकती हैं? हम मौके का उपयोग केवल भारत में उदारवादी कला और विज्ञान शिक्षा की उपयुक्‍तता एवं आवश्‍यकता के लिए ही नहीं करते, बल्कि भारत और दुनिया के युवा की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए सीखने और प्रेरित होने या प्रेरक कार्यवाही करने के उद्देश्‍य से अनुभवों और विचारों के विनिमय में शामिल होने के लिए मार्गदर्शकों और विचारकों तथा ट्रायल ब्‍लैजरों से मिलने के लिए भी करते हैं।

भारत में, नए उपक्रम उदारवादी कला प्रतिमान अपना रहे हैं और शिक्षण की नई शैलियां लागू कर रहे हैं। कुछ सक्रिय नए संस्‍थानों में अशोक विश्‍वविद्यालय, ओ.पी. जिंदल ग्‍लोबल विश्‍वविद्यालय, बंगलौर में इंडियन इंस्‍टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स, पुणे में टैगोर विश्‍वविद्यालय, नया सिम्‍बॉयसिस स्‍कूल फॉस लिबरल आर्ट्स शामिल हैं। समाज में परिवर्तन लाने के लिए अन्‍य उपक्रम नए एनजीओ तैयार करने में सहायता करते हैं और रचनात्‍मक तकनीकों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने में सहायता करते हैं जैसेकि अम्‍बेडकर दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय द्वारा विकसित, डेवलपमेंट प्रैक्टिस में नया कार्यक्रम और पीआरएडीएएन।

सम्‍मेलन इन संस्‍थानों को अपने कार्य को प्रस्‍तुत करने, और एक संवाद में यह समझने का अवसर मिलेगा कि किस प्रकार ये संस्‍थान मिलकर कार्य कर सकते हैं, एक-दूसरे से सीख सकते हैं और शिक्षा को उन्‍नत बनाने के सार्व लक्ष्‍यों की दिशा में कार्य कर सकते हैा तथा भारत के नेतृत्‍वकर्ताओं की अगली पीढ़ी का भारत में सशक्‍तीकरण भी कर सकते हैं।

रमण रिसर्च इंस्‍टीट्यूट में और इंडियन इंस्‍टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेंट (IIHS), बंगलौर के सम्‍मेलन में भारत और विदेश के इन नए उपक्रमों से कुछ नेतृत्‍वकर्ता शामिल होंगे, और उन्‍हें इन नए कार्यक्रमों के कुछ परिणामों का साझा करने का मौक मिलेगा।

शायद उदारवाद कला और विज्ञान फिर से उठ खड़े होने वाले हैं क्‍योंकि ऐसे मूल प्रश्‍न जिनके उत्‍तर सभी मनुष्‍यों को देने ही होते हैं, कभी बदलते नहीं, और शायद दुनिया में बुद्धिमत्‍ता और गहन ज्ञान की जरूरत विद्यार्थियों में बढ़ रही है अर्थात व्‍यापक जानकारी उपलब्‍ध है।

समिति का गठन करना
सम्‍मेलन के आयोजकों में पोमोना, येल, IIHS और आरआरआई (RRI) से एक समूह शामिल है।

  • ब्रेयान पेनप्रेस, फ्रैंक पी. ब्रैकेट पोमोना कॉलेज में खगोलशास्‍त्र के प्रोफेसर
  • लक्ष्‍मी श्रीपल्‍ली, ताराभौतिकविद्, रमण फेलो, रमण रिसर्च इंस्‍टीट्यूट, बंगलौर, भारत।
  • के. शिवरामकृष्‍णन दिनकर सिंह, इंडिया एंड साउथ एशियन स्‍टडीज के प्रोफेसर, अध्‍यक्ष, साउथ एशियन स्‍टडीज काउंसिल ऑफ येल यूनिवर्सिटी; निदेशक, येल इंडिया इनिशिएटिव
  • जॉर्ज जोसेफ, येल विश्‍वविद्यालय में अंतर्राश्‍ट्रीय संबंध एवं नेतृत्‍व कार्यक्रमों के निदेशक
  • एरोमर रेवी, इंडियन इंस्‍टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेंट के निदेशक, सतत विकास, वैश्विक जलवायु परिवर्तन व पर्यावरणीय परिवर्तन के संबंध में सम्‍मानित विशेषज्ञ।
  • प्रमाथ राज सिन्‍हा, अशोक विश्‍विविद्यालय के संस्‍थापक एवं ट्रस्‍टी, एवं इंडियन स्‍कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के संस्‍थापक डीन।
दिन 1 (7 जनवरी 2014)

स्‍थल: रमण रिसर्च इंस्‍टीट्यूट ऑडीटोरियम, आरआरआई पोमोना और येल की ओर से स्‍वागत

9:00 – 9:15 am शुरूआती टिप्पणियां
9:15 – 10:15 am मुख्‍य भाषण ‘’भारत और विदेश में बहुलवाद एवं विश्‍वविद्यालयी शिक्षा’’, सम्‍मानित इतिहासकार, लेखक, और विचारक। उनके कार्यों में वर्तमान राजनीति के बारे में समय-समय पर आने वाले स्‍तम्‍भ और भारत के इतिहास के बारे में मूल सोच एवं भविष्‍य (के. शिवरामकृष्‍णन, येल द्वारा शामिल)
10:15 – 10:30 am शॉर्ट-ब्रेक
10:30 – 12:30 pm सत्र I – शुरूआती बातचीत- भारत के लिए नए संस्‍थान, नया पाठ्यक्रम
स्‍थल: रमण रिसर्च इंस्‍टीट्यूट ऑडीटोरियम,
वक्‍ता स्‍वयं से परिचय कराएंगे और उदारवादी कला की दिशा में अपने संस्‍थानों की विजन की बारे में जानकारी देंगे। वे अपने पाठ्यक्रम और कार्यक्रमों, और अपनी विशेष परेशानियों, और अपने जिन प्रश्‍नों के जवाब पाना चाहते हैं, उनके बारे में चर्चा करेंगे। इन वक्‍ताओं में से प्रत्‍येक को 30 मिनट का समय दिया जाएगा, जिसमें श्रोताओं के साथ प्रश्‍न एवं चर्चा के 5-10 मिनट भी शामिल हैं।
10:30 – 11:00 am ओ.पी. जिंदल ग्‍लोबल यूनिवर्सिटी
वैश्विक मामलों का पाठ्यक्रम, और भविष्‍य की विजन (राज कुमार, संस्‍थापक कुलपति)
11:00 – 11:30 am अशोक विश्‍वविद्यालय
उदारवादी कला पाठ्यक्रम, और भविष्‍य के लिए विजन (प्रमाथ सिनहा, अशोक विश्‍वविद्यालय के संस्‍थापक एवं ट्रस्‍टी)
11:30 – 12:00 noon अजीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय
उच्‍च शिक्षा तक पहुंच एवं समानता तथा भावी योजनाएं (अनुराग बेहर, संस्‍थापक कुलपति)
12:00 – 12:45 pm पूर्ण पैनल चर्चा I
उच्‍च शिक्षा तक व्‍यापक पहुंच- मापनीयता एवं सामर्थ्‍य- और उत्‍कृष्‍टता निर्माण एवं चयनात्‍मकता के मध्‍य सही संतुलन क्‍या है?

पैनल: दिलीप रांजेकर* (अजीम प्रेमजी), राधिकाहर्जबर्गर (रिशि वैले), प्रमाथ सिन्‍हा (अशोक), पवन अग्रवाल (इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट)

12:45 – 1:45 pm वर्किंग लंच; रमण रिसर्च इंस्‍टीट्यूट
1:45 – 2:45 pm पूर्ण पैनल चर्चा II
भारतीय उच्‍च शिक्षा किस प्रकार भारत की संस्‍कृति की पूर्ण समृद्धता-इसकी विविध धरोहर और धार्मिक एवं आध्‍यात्मिक परंपराओं की श्रृंखला और इसके गहन साहित्‍य को बेहतर तरीके से परिलक्षित कर सकती है? और उच्‍च शिक्षा की इस नई विधा का भारत के भविष्‍य पर क्‍या प्रभाव पड़ेगा?
पैनल: वसुधा डालमिया (येल), राजन चांडी (रिशि वैले), तारा किनि (सृष्टि स्‍कूल)*, नीता कुमार (सीएमसी)*।
शुरूआती बातचीत (जारी)- भारत हेतु नए संस्‍थान एवं नया पाठ्यक्रम
2:45 – 3:15 pm शिव नादर विश्‍वविद्यालय
योजनाएं एवं प्रगति (निखिल सिनहा, संस्‍थापक कुलपति)
3:15 – 3:45 pm येल-एनयूएस कॉलेज (सिंगापुर)
पूर्व एशिया में सामान्‍य पाठ्यक्रम और उदारवादी कला (पेरिक्‍लस लुईस, उद्घाटन अध्‍यक्ष)
3:45 – 4:15 pm प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी
राज्‍य विश्‍वविद्यालय पाठ्यक्रम में उदारवादी कला शिक्षा: प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी कोलकाता में जेनईडीप्रोग्राम (सोमाक रायचौधरी, संकाय के डीन, प्राकृतिक एवं गणितीय विज्ञान)
4:15 – 4:30 pm टी-ब्रेक
4:30 – 5:00 pm भारत में उदारवादी सोच: समकालीन वृत्ति के लिए प्राचीन प्रतिमान (डा. लॉरी पैटन, ड्यूक यूनिवर्सिटी में कला एवं विज्ञान की डीन)
5:00 – 5:45pm भारत की सीमान्‍त आबादी के लिए शिक्षा प्रदान करने हेतु प्रगतिशील फाउंडेशंस: पैनल: रश्मि मिश्रा (विद्या फाउंडेशन), मदन पडकी (हेड हेल्‍ड हाई फाउंउेशन), शुक्‍ला बोस (परिक्रमा ह्यूमैनिटी फाउंडेशन), श्रीराम अय्यर (नालंदा वे), माया मेनन (द टीचर फाउंडेशन)
5:45 – 6:45 pm इंडियन हायर एजुकेशन एंड लिबरल आर्ट्स- एक संवाद
आन्‍द्रे बेटल (इमरिटस, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय) और रुद्रांग्‍शु मुखर्जी (राय संपादक, टेलिग्राफ) मॉडरेटर: शारदा श्रीनिवासन (एनआईएएस)
7:15 – 9:30 pm सांस्‍कृतिक कार्यक्रम के साथ सम्‍मेलन में सायं का भोजन +सायं का भोजन
स्‍थल: रमण रिसर्च इंस्‍टीट्यूट
दिन 2 (8 जनवरी 2014)

दूसरा दिन इंडियन इंस्‍टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स के बंगलौर कैम्‍पस में होगा जोकि रमण रिसर्च इंस्‍टीट्यूट के दक्षिण में थोड़ी ही दूरी (1 किमी से कम) पर है।

यह सत्र पाठ्यक्रम और संस्‍थान के विवरण पर केन्द्रित पैनल चर्चाओं की एक श्रृंखला के बारे में होगा: आपका संस्‍थान विज्ञान को किस प्रकार से सिखाता या प्रस्‍तुत करता है? ऑनलाइन अधिगम? मानविकी? सामान्‍य पाठ्यक्रम बनाम इलेक्टिव्‍स के लिए सर्वश्रेष्‍ठ संतुलन क्‍या है? आपका संस्‍थान किस प्रकार की विशेषज्ञता विकसित करेगा और आप इस दिशा में क्‍या कर रहे हैं?


सत्र II – यूएस और भारत में उदारवादी कला शिक्षा
कुछ यूएस मेजबान संस्‍थान उदारवादी कला शिक्षा तक अपनी पहुंच थोड़ी सी पहुंच के बारे में चर्चा करेंगे। इस सत्र में, पांच प्रस्‍तुतकर्ताओं के पैनल भारत और इसके उच्‍च शिक्षा के क्षेत्र में सामने आने वाले कुछ जटिल प्रश्‍नों को उजागर करेंगे और उनके उत्‍तर देंगे, तथा इस पर भी प्रश्‍नोत्‍तर होंगे कि किस प्रकार नए संस्थान और नए उदारवादी कला एवं विज्ञान पाठ्यक्रम इन समस्‍याओं को दूर कर सकते हैं। यह सत्र प्रस्‍तुतकर्ताओं के मिश्रित समूह और श्रोताओं के मध्‍य एक कथन निर्धारित करेगा।

9:00-9:20 am शुरुआती टिप्पणियां
सी बी भावे (अध्‍यक्ष, IIHS): आगन्‍तुकों का IIHS में स्‍वागत करते हैं
लक्ष्‍मी श्रीपल्‍ली (आरआरआई): दिन की के कार्यक्रम से अवगत कराती हैं
9:20-9:50 am पोमोना कॉलेज एवं इसका उदारवादी कला मिशन (डेविड ऑक्‍टोबाइ, अध्‍यक्ष, पोमोना कॉलेज)
9:50-10:00 am येल में उदारववादी और अंतर्राष्‍ट्रीय शिक्षा (के. शिवरामकृष्‍णन, येल विश्‍वविद्यालय में साउथ एशियन स्‍टडीज एवं इंडिया इनिशिएटिव के निदेशक)
10:00-10:15 am रिसर्च एवं इंस्‍टीट्यूशनल कल्‍चर एट लिबरल आर्ट्स कॉलेज

उदारवादी कला कॉलेज में एक शिक्षक/छात्र होने का क्‍या अर्थ है? (ब्रेयन पेनप्रेस, पोमोना कॉलेज)
10:15-10:30 am शॉर्ट ब्रेक
10:30-11:00 am भारतीय और यूएस उच्‍च शिक्षा पर विचार-विमर्श प्रदीप खोसला, कुलाधिपति, यूसी सैन डिएगो
11:00-11:30 am कैलीफोर्निया विश्‍वविद्यालय, सैंता क्रूज की ओर से विचार– जॉर्ज ब्‍लूमेंथल, कुलाधिपति, यूसी सैंता क्रूज
11:30-12:00 noon उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में अनुसंधान में उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्रों का निर्माण करना: यूएस में विज्ञान अनुसंधान नीति और पाठ्यक्रम की समीक्षा

डेविड ड्रियू, क्‍लोरमोंट ग्रेजुएट यूनिसर्विटी।

12:00-12:30 pm द ग्‍लोबल लिबरल आर्ट्स इंपरेटिव (हिराम छोड़ोस, सीएमसी)
12:30-1:30 pm दोपहर का भोजन: IIHS बंगलौर शहर के कैंपस में दिया जाएगा जहां सम्‍मेलन हो रहा है। एक ‘’क्रियात्‍मक लंच’’ होगा जिसमें दोपहर के बाद हमारे ब्रेकआउट सत्रों के लिए मेज तैयार की जाएंगी
सत्र III – उदारवादी कला में उत्‍कृष्‍टता निर्माण हेतु, शासन, पाठ्यक्रम और सहयोग का विवरण

बैठक दो समांतर सत्रों में बंटी होगी, जो पैनल चर्चाओं को प्रकट करेगी कि जिनमें स्‍नातक शिक्षा में विज्ञान, मानविकी, सार्व पाठ्यक्रम और व्‍यावहारिक अधिगम को शामिल करने का वर्णन होगा और उन तरीकों के बारे में भी चर्चा होगी  जिनके द्वारा ये कार्यक्रम स्‍नातकों को परिवर्तनकारी और समग्र शिक्षा प्रदान करते हैं। प्रत्‍येक पैनल चर्चा में छोटा समूह गहन चर्चाओं और संभावित सहयोग के बारे में विचार-विमर्श करेगा।

1:30-2:30 pm समांतर पैनल चर्चा I
उदारवादी कला संस्‍थानों में विज्ञान एवं सार्व पाठ्यक्रम
सत्र ए: पैनल 1 – उदारवादी कला संस्‍थानों में विज्ञान
पैनल में शामिल हैं: सोमक राय चौधरी (प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी, कोलकाता), प्रिया नटराजन (येल), अर्जेन्‍दुपटनायक (कार्लटन), उर्बसी सिन्‍हा (आरआरआई), और शारदा श्रीनिवासन (NIAS)।
सत्र बी: पैनल- 2 – सार्व पाठ्यक्रम और सामान्‍य शिक्षा प्रतिमान
पैनल में शामिल हैं: अनीता कुरुप (NIAS), राजाराम कुडली* (प्रजनन इंटरप्राइजेज), ऊषाराजाराम (अजीमप्रेमजी), और निखिल सिन्हा* (शिव नादर)
2:40-3:40 pm समांतर पैनल चर्चा II
उदारवादी कला संस्‍थानों में मानविकी और व्‍यावहारिक अधिगम
सत्र ए: पैनल 3- 21वीं सदी के भारत के लिए मानविकी-सर्वश्रेष्‍ठ तरीका क्‍या है?
पैनल में शामिल है: राजीव पटके* (येल, एनयूएस), बेथ मैककिंस्‍ले (कार्लटन), सिंथिया ह्यूम्‍स (सीएमसी), सतीश इनामदार* (केएफआई), जेरोम निर्मलराज (सेंट जोसेफ्स कॉलेज), और सुप्रिया चौधरी (जादवपुर यूनिवर्सिटी कोलकाता)।

सत्र बी: पैनल 4 – उदारवदी कला संस्‍थानों में स्‍नातकों के लिए व्‍यावहारिक अधिगम, इंटर्नशिप्‍स, और विज्ञान अनुसंधान।
पैनल में शामिल हैं: सारा स्मिथ ऑर्र* (सीएमसी), बिदुशी भट्टाचार्य* (सीएमसी, स्क्रिप्‍स, और पिट्जर कॉलेज), राजारामनित्‍यानंद (एनसीआरए और अजीमप्रेमजी), ब्रायन मैकएड्डो (येल-एनयूएस), और कविता वांखेड़े (IIHS)

3:40-4:00 pm टी ब्रेक
4:00-5:00 pm पूर्ण पैनल चर्चा III
पूरी 21वीं सदी में-राजनीतिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में भारत की परिवेशीय और आर्थिक संवृद्धि को बरकरार रखने में उच्‍च शिक्षा किस प्रकार सहायता कर सकती है।
पैनल में शामिल हैं: एम्‍लन गोस्‍वामी (IIHS), स्‍टीवन विल्किन्‍सन* (येल), राधा गोपालन (रिशि वैले), दिलीप अहूजा (NIAS) 

सत्र IV – कार्यकारी समूह बैठकें
इस सत्र में छोटे समूह परस्‍पर रुचि वाले विशिष्‍ट विषयों पर एक साथ काम करने के लिए एकत्र होंगे। हम बैठक को विषयों के एक संभावित समूह और एक व्‍हाइटबोर्ड के साथ शुरू करेंगे जो लोगों को इन ‘’ब्रेकआउट्स’’ या ‘’बर्ड्स ऑफ फीदर’’ समूहों के लिए साइन अप होने में समर्थ करेगा। इनमें से 6-8  समूह जिन शीर्षकों के साथ एकत्र होंगे, उनमें शामिल हैं, ‘’ऑनलाइन अधिगम हेतु साझेदारी’’, ‘’सार्व पाठ्यक्रम निर्माण’’, ‘’आउटरीच एंड एक्‍सेस’’ तथा अन्‍य विषय टीबीडी। इन सत्रों के लिए IIHS में 6 बैठक कक्षों की जरूरत होगी। प्रत्‍येक कार्यकारी समूह विषय लंच के समय शुरू होगा, और कार्यकारी समूह लीडर खड़ा होगा और  उन विषयों का एक संक्षिप्‍त लघु छवियों के साथ वर्णन प्रस्‍तुत करेगा जिन्‍हें कार्यकारी समूह चर्चाओं में फोकस किया जाएगा।

5:00-6:30 pm कार्यकारी समूह चर्चाएं
छोटे समूह मिलकर उन विषयों पर चर्चा करेंगे जो उपस्थित लोगों के लिए उपयोगी और जरूरी हों और जो दीर्घकालिक सहयोग स्‍थापित कर सकें। समूह के लीडर चर्चा को विशिष्‍ट विषयों पर केन्द्रित करेंगे, और अपने गृह-संस्‍थानों में प्रत्‍येक विषय का पता लगाने के लिए संभावित और प्रस्‍तावित सहयोग के साथ-साथ पूरे सम्‍मेलन में कुछ योजनाओं की रिपोर्ट देंगे।

इवनिंग रिसेप्‍शन व रात्रि का भोजन– इंडियन इंस्‍टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स थारांगवना फैसिलिटी (सम्‍मेलन स्‍थल से 1.5 किलोमीटर दूर) में सी बी भावे की ओर से

दिन 3 (3 जनवरी 2014)

यह अंतिम सत्र रमण रिसर्च इंस्‍टीट्यूट कैंपस में आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में विभिन्‍न कार्यकारी समूहों से मिलने वाली प्रतिवेदनों पर बात होगी, और यह चर्चा होगी कि सहयोग और संविदा को किस प्रकार सर्वश्रेष्‍ठ तरीके से आग बढ़ाया जाए। संस्‍थानों के मध्‍य साझेदारी की चर्चा की जाएगी- हमें यूएस और भारतीय संस्थानों और साथ ही भारतीय संस्‍थानों के बीच नए संबंधों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

9:00-10:00 am सत्र V: समापन एवं ‘’अगले चरण’’

ओपनिंग प्‍लेनरी
वेन्‍यू: रमण रिसर्च इंस्‍टीट्यूट, ऑडिटोरियम
नंदन नीलकेणि, इंफोसिस, इंक के पूर्व सीईओ, वर्तमान में तकनीक आधारित भारत-सरकार की समितियों-यूआईडीएआई और टीएजीयूपी के अध्‍यक्ष, और ‘’इमैजिनिंग इंडिया’’ पुस्‍तक के लेखक। (परिचय एरोमर रेवी, IIHS द्वारा)
10:00-10:15 am ब्रेक
10:15-11:15 am पूर्ण पैनल चर्चा IV
‘’उदारवादी कला और विज्ञान किस प्रकार भारत की कुछ सामाजिक समस्‍याओं का पता लगाने में सहायता कर सकते हैं और लिंग, जाति और क्षेत्र के संबंध में समाज में समानता को बढ़ावा दे सकते हैं।’’
पैनल में शामिल हैं: स्मिता प्रेमचन्‍द्र* (सम्‍पर्क एनजीओ), अनीता रेड्डी (द्वारका), स्‍वाति डांडेकर (फिल्‍मनिर्माता), शेखर शेक्षाद्री (एनआईएमएचएएनएस) जयां कसम (पोमोना कॉलेज)
11:15-11:45 am मानव बस्तियों हेतु भारतीय संस्‍थान

भारत में अंतर्वैषयिक शिक्षा कार्यक्रम और भावी योजनाएं (एरोमर रेवी, निदेशक)

11:45-12:00 noon साथ मिलकर कार्य करने वाले समूहों के प्रतिवेदन– कार्यकारी समूह ‘’ब्रेआउट’’ चर्चाओं की 5 मिनट की पुनरावृत्तियों की एक श्रृंखला।
12:00-12:30 pm अगले चरण: एक चर्चा। (सत्र प्रशिक्षक: के. शिवरामकृष्‍णन (येल), और प्रमाथ सिन्‍हा (अशोका)]
12:30-1:00 pm समापन टिप्‍पणियां: सतीश इनामदार, KFI
1:00-2:00 pm दोपहर का भोजन
2:00 pm स्‍थगन