परियोजनाएं

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नगरीय समावेशन का पुनःरेखांकन
IIHS की एक मुख्य अनुसंधान परियोजना, जो फोर्ड फाउंडेशन की ओर से $0.6 मिलियन अनुदान से वित्तपोषित है, यह भारत में तथा वैश्विक दक्षिण के नगरों में शिक्षण एवं अधिगम सेट हेतु मध्य-2015 तक 40 अंतर्वैषयिक केसों का निकाय तैयार करने हेतु लक्षित है जिनमें से कम से कम एक तिहाई पारदेशीय, तुलनात्मक केस होंगे। इस परियोजना को आकार देने वाली तीन थीमैटिक, समावेशन पर बहसों को समझने व हस्तक्षेप करने के लिए ज़रूरी हैं: (a) मलिन बस्ती उन्नयन व बस्तियों का रूपांतरण पर पुनर्विचार, (b) पूर्व-निर्धन नियोजन की नई प्रक्रियाएं, तथा (c) समावेशन के नए मापदंड। साथ मिलकर, यह केसों का निकाय नगरीय शिक्षा को नवऊर्जित करेगा और भारतीय नगरों के बारे में ऐसे शिक्षण व अधिगम हेतु नया ज्ञानपूर्ण आधार निर्मित करेगा जिसकी जड़ें हमारे अपने संदर्भों की वास्तविकताओं व अभ्यासों में होंगी, यह दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, व मिस्र तथा अन्य सहित पूरे वैश्विक दक्षिण से केसों को एकत्रित करेगा। मुख्य साझेदारों में एसीसी, केपटाउन विश्वविद्यालय, तथा यूएफएबीसी, साओ पाओलो शामिल हैं।

नगरीय समावेशन का पुनःरेखांकन का कार्यभार आंतरिक रूप से गौतम भान, जेसिका सेडोन, स्मिता श्रीनिवास, सोमनाथ सेन और दीपा मेहता के पास है जो वाह्‌य रूप से स्थापित केसों के अतिरिक्त, कोर टीम के सभी सदस्यों के साथ केसों के लिए योगदान करते हैं।

दैनिक लोकतंत्र का निर्माण

IIHS हिंसा, सार्वजनिक विचारों, तथा लोकतंत्र की गुणवत्ता के बीच संबंधों पर एक अंतर्राष्ट्रीय दीर्घकालीन अनुसंधान साझेदारी का सदस्य है। जेंडर, हिंसा, और सार्वजनिक स्पेस का अवलोकन करना तथा लोकतंत्र की गुणवत्ता पर असमानता के प्रभाव की पड़ताल पर फोकस करना इस परियोजना में IIHS की विशेष भूमिका में शामिल है। यह पांच वर्षीय परियोजना, साओ पाओलो विश्वविद्यालय में स्थापित है और IIHS के साथ पूरे वैश्विक दक्षिण, केपटाउन विश्वविद्यालय, फ्लास्को (इक्वाडोर) और कोलेजियो डे मैक्सिको के बीच संपर्क स्थापित करती है।

टीमः
गौतम भान
अम्लानज्योति गोस्वामी

यूनेस्को रचनात्मक अर्थव्यवस्था

IIHS ने दक्षिण एशिया में रचनात्मक तथा सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था, तथा धारणीय विकास में इसकी भूमिका पर यूनेस्को रचनात्मक अर्थव्यवस्था प्रतिवेदन 2013 के लिए एक अध्याय का योगदान किया। यह अध्याय, भारत पर विशेष रूप से फोकस करते हुए रचनात्मक अर्थव्यवस्था के विविध पहलुओं का अवलोकन करता है जिसमें अनौपचारिकता की चुनौतियां, संपत्ति अधिकार नियमों के असमंजस, नीतिगत हस्तक्षेप हेतु या इसके विरूद्ध तर्क, तथा भारतीय नगरीकरण में रूपांतरणकारी संभावना के रूप में संस्कृति की भूमिका शामिल हैं। इसके अलावा, IIHS ने लोक संगीत तथा आजीविकाएं, और सांस्कृतिक प्रयासों की मैपिंग व अभिलेखीकरण पर दो केस तैयार किए।

टीमः
श्रिया आनंद
अम्लानज्योति गोस्वामी
काये लुशिंगटन

IGC-JNNURM

परियोजना-जो कि अंतर्राष्ट्रीय संवृद्धि केंद्र (आईजीसी) द्वारा आंशिक वित्तपोषित है-यह इसका मूल्यांकन करने को लक्षित है कि JNNURM के विज़न, कार्यक्रम अभिकल्पन व क्रियान्वयन में पर्यावरणीय धारणीयता (स्पष्ट रूप से या निहित रूप से) को किस सीमा तक समावेशित किया गया है। अतः एक विस्तृत विश्लेषणात्मक ढांचा, विभिन्न सेक्टरों में बीसवीं शताब्दी की विकास योजनाओं की पड़ताल करता है जिनमें जल आपूर्ति, स्वच्छता व वाहित मल, वर्षा जल प्रवाह जलनिकासी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व परिवहन शामिल हैं। जमीनी वास्तविकताओं को समझने व सत्यापित करने तथा परियोजनाओं व सुधारों की क्रियान्वयन स्थिति देखने के लिए आरंभिक फील्ड कार्य का आयोजन नांदेड नगर में किया गया।

टीमः
कविता वानखेडे
गीतिका आनंद
जेसिका सेडॉन (सलाहकार)
सोमनाथ सेन (सलाहकार)

नगरीय स्वरूप के नीति निर्धारकों पर IIHS – IDFC फाउंडेशन परियोजना

IIHS ने एक अनुसंधान अध्ययन आयोजित किया जो भारत में नगरीय प्रसार पर तथा मध्यम आकार वाले नगरों की स्थानिक संरचना के उद्‌भव पर केंद्रित था। नगरीय स्थानिक उद्‌भव को बेहतर समझना इसका प्रयोजन था, जिसके धारणीयता व समानता के लिए महत्त्वपूर्ण निहितार्थ होते हैं और इसे प्रायः नीतिगत चर्चाओं में उपेक्षित कर दिया जाता है जो नगरीय अर्थव्यवस्था, संवृद्धि व जनांकिकी पर केंद्रित होने को प्रवृत्त होती हैं। अवसंरचनात्मक निवेशों, नगरीय नियोजन, विनियमन, व भूमि बाज़ारों से संबंधित प्रक्रियाओं, तथा स्थानिक संरचना से संबंधित अन्य ऐतिहासिक कारकों व प्राकृतिक विशेषताओं के प्रभाव समझने के लिए तीन अन्वेषणात्मक केस अध्ययन इस अध्ययन में शामिल थे। केस अध्ययन के लिए जिन नगरों को चुना गया उनके जनसंख्या आकार समान किन्तु स्थानिक संरचना भिन्न थी, तथा क्षेत्रीय प्रसार सुनिश्चित किया गयाः ग्वालियर (मध्य प्रदेश), सोलापुर (महाराष्ट्र), और त्रिची (तमिलनाडु)।

टीमः
श्रिया आनंद
कविता वानखेडे
अनुश्री देब
शशिकला गौड़ा
जेसिका सेडॉन (सलाहकार)

एकीकृत नगरीय जल प्रबंधनः अगले दौर की शुरूआत

एकीकृत नगरीय जल प्रबंधन (IUWM) का वर्तमान संवाद समझने के लिए IIHS के अनुसंधानकर्ताओं ने बंगलौर स्थित एक अलाभकारी संगठन, अर्ध्यम से गठबंधन किया। उन्होंने ऐसी प्रणाली लागू करने के लिए आवश्यक क्षमताओं का परीक्षण किया, इसे भारतीय नगरीय संदर्भ में अवलोकित अंतरालों के परिप्रेक्ष्य में देखा। इस अध्ययन में उन प्रयासों की प्रकृति पर भी चर्चा हुई जो IUWM को कारगर बनाने के लिए आवश्यक हैं, और प्रभाव के संदर्भ में उनके प्राथमिकताकरण का प्रयास करते हैं। अंत में, इसमें महत्त्वपूर्ण रूप से यह परीक्षण किया गया कि अर्घ्यम इस संदर्भ में क्या कर सकता है।

टीमः
गीतिका आनंद
राजीव के. रमन (अर्ध्यम)
जेसिका सेडॉन (सलाहकार)
सोमनाथ सेन (सलाहकार)