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IIHS द्वारा प्रकाशित संस्थागत प्रतिवेदन, कार्यपत्र और प्रकाशन निम्नवत्‌ प्रदर्शित हैं। IIHS द्वारा अतिरिक्त प्रकाशनों के लिए, कृपया उनके व्यक्तिगत प्रोफाइल पुस्तकें देखें।

IIHS कार्यपत्र श्रृंखला

  • अम्लानज्योति गोस्वामी (2011) भू अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनःस्थापनः विधि एवं राजनीति
  • तम भान (2012) क्या भारतीय नगरों में नगर नियोजन प्रासंगिक है?
  • तम भान एवं स्वाति शिवानंद (2012) नगर का (अन) स्थापनः दिल्ली में 1990-2007 में विस्थापन का विश्लेषण
  • विता वानखेडे और कृष्णचंद्रन बालकृष्णन (2011) भारतीय नगरों में भूमि, अवसंरचना एवं पारिस्थितिकीय धारणीयता
  • हा सामी (2011) भारत में नगरीय भूमि की राजनैतिक अर्थव्यवस्था-प्रमुख मुद्‌दे
  • तिका हिंगोरानी (2011) आवासन समाधानः मॉडलों की एक समीक्षा
  • प्रीतिका हिंगोरानी (2011) निम्न आयवर्ग आवासन पुनरावलोकन : नीतियों व दृष्टिकोणों की एक समीक्षा

चुनिंदा IIHS कोर टीम प्रकाशन

  • भान, जी (2013) नियोजित अवैधताएं: आवासन एवं दिल्ली में नियोजन की विफलता 1947-2010. इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली खंड XLVII (24).
  • भान, जी. (2009) बेदखली, नगरीय निर्धन, एवं सहस्राब्दी दिल्ली में नगर का अधिकार, एन्वायरनमेंट एंड अर्बनाइजेशन खंड 29 (1) में
  • भान, जी. एवं मेनन-सेन, के. (2008) नक्शे से सफायाः नई दिल्ली में बेदखली और पुनःस्थापन के बाद जीवन (योडा प्रेसः नयी दिल्ली) * हिन्दी संस्करण (2009) नक्शे से बाहरः दिल्ली में विस्थापन के बाद जिंदगी
  • भान जी. भंडारी एन. तनेजा एस. मजूमदार, एस, और बहल, आर. (2005) बाल्यावस्था की सामान्य बीमारियों के उपचार में लैंगिक पक्षपात पर मातृत्व शिक्षा के प्रभाव, सोशल साइंस एंड मेडिसिन में खंड 60 (5), p. 715-724.
  • भान जी एवं नरैन, ए. [2012 (2005)] क्योंकि मेरी एक आवाज़ हैः भारत में क्षुद्र राजनीति (योडा प्रेस: नयी दिल्ली)
  • जाना ए. और भान, जी. (2013) मलिन बस्तियां या निर्धनता. इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली XLVIII(18)
  • जैन जी. जिज्ञासु, आर, तथा पाहवा-गज्जर, एस (2013) मानव विकास पर केंद्रीकरण के साथनिर्धनता और भेद्यता घटोत्तरी, आपदा जोखिम घटोत्तरी और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन IIHS-UNDP: दिल्ली एवं बंगलौर
  • बालकृष्णन, के. कोंडोल्फ जी.एम., मोजिंगो, एल. मर्जियोन, आर al. (2011). कैरो को नील से जोड़ते हुएः नदी पर जीवन व विरासत का नवजीवनकरण. इंस्टीट्‌यूट फॉर अर्बन एंड रीजनल डेवेलपमेन्ट वर्किंग पेपर नं. WP-2011-06. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले
  • पाहवा-गज्जर, एस. निर्धन अफ्रीकी परिवारों में जलवायु सहनशीलता निर्माण. पर्सपेक्टिव्स, हेनरिच बोल स्टिफटंगःफोर्थकमिंग
  • पाहवा-गज्जर, (2012) राष्ट्रमंडल खेलों के पश्चात दिल्लीः ‘विश्व नगर’ या नगरीय घोरअसफलता? यूएनईपी सिटी गाइड्‌l
  • पाहवा-गज्जर, एस. ब्रेंट ए और वान हेनिंजेन, पी (2012) “बिजनेस सेक्टर,” इन स्वेलिंग, M (ed) सस्टेनेबल स्टेलेनबॉश. सस्टेनेबिलिटी इश्यू: स्टेलिनबॉश.
  • रेवी, ए. एवं पटेल, एस. (Eds.) (2010) भूकम्पों से बहालीः भारत में प्रतिक्रिया, पुनर्निर्माण तथा प्रभाव न्यूनीकरण. रटलेजः नयी दिल्ली एवं लंदन
  • रेवी, ए तथा मुखोपाध्याय, पी. (2009) भारत के आर्थिक इंजन को चालू रखते हुएः जलवायु परिवर्तन तथा नगरीकरण का प्रश्न. इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली, खंड XLIV, सं. 31, pp 59-70
  • रेवी, ए. (2008) जलवायु परिवर्तनः भारतीय नगरों के लिए एक अनुकूलन व न्यूनीकरण एजेंडा. एन्वॉयरनमेंट एंड अर्बनाइजेशन खंड 20, अंक 1
  • रेवी, ए. (2005) जलप्लावन के सबकः मुम्बई में बहुल-संकट जोखिम न्यूनीकरण हेतु प्राथमिकताएं. इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली, खंडXL सं.. 36, सितम्बर 3-9, pp 3911­3916.
  • रेवी, ए. al. (2007) “आवासन– सार्वजनिक नीति प्राथमिकताएं”  इन सेनगुप्ता एन. (Ed.) स्वदेशी तथा पारंपरिक ज्ञान के आर्थिक अध्ययन, अकादमिक फाउंडेशन, नयी दिल्ली
  • सैमी, एन. (2013) किसानी से विकास तकः पुणे, भारत में नगरीय गठबंधन. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ अर्बन एंड रीजनल रिसर्च, 37, 151-164.
  • सैमी, एन. और लोह सी. जी.(2013). एक योजना विभाग की मौतः दुर्बल जनादेश वाले राज्य में क्षेत्रवाद की चुनौतियां. भू उपयोग नीति, 32 (0), 39-49.
  • सैमी, एन. (2013) “जनता की शक्ति?: बंगलौर के नगरीय कार्य बलों का एक अध्ययन. इन शैटकिन, जी. (Ed.) भारतीय नगरों की प्रतिद्वंद्विताः वैश्विक विज़न तथा स्थानीय राजनीति. विली-ब्लैकवेल-लंदन
  • सैमी, एन. वेइंस्टीन, एल. एवं शैटकिन, जी. “प्रतिरोधी विकासः समकालीन नगरीय भारत में मजबूत धरोहरें और उभरते राजनैतिक कार्यकर्ता.”In: शैटकिन, जी. (ed.) भारतीय नगरों की प्रतिद्वंद्विताः वैश्विक विज़न तथा स्थानीय राजनीति.. आगामी.
  • वानखेडे, के. एवं बालाकृष्णन, के. (2010). बस्तियों के धारणीय डिजाइन: पाठ्‌यक्रम में नवप्रवर्तन, डिजाइन में धारणीयता: अब! लेन्स कॉन्फ्रेन्स की कार्यवाहियां 2010,  खंड.2: 832-839