शिक्षण एवं अधिगम

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संभावनाशील IIHS विश्वविद्यालय

IIHS भारत के नगरीय रूपांतरण पर केंद्रित एक प्रथम अंतर्वैषयिक विश्वविद्यालय स्थापित करेगा। इसकी संस्थागत संरचना, चार मुख्य कार्यक्रमों पर आधारित होगीः

  • एक अकादमिक कार्यक्रम, जो तीन डिग्रियां अर्थात नगरीय वृत्ति में स्नातक (बीयूपी), नगरीय प्रविधि में परास्नातक (एमयूपी) तथा एक पीएचडी कार्यक्रम।
  • वृत्ति एवं क्षेत्र आधारित नवप्रवर्तन पर आधारित एक अनुसंधान कार्यक्रम जो क्रियात्मक अनुसंधान, यथार्थवादी सिद्धांत निर्माण, केस-आधारित अधिगम को समर्थित करता है तथा चिंतनशील वृत्तिकारों एवं शोधकर्ताओं को भारत, दक्षिण एशिया के अन्य भागों एवं विश्व में समकालीन चुनौतियों से जुड़ने के लिए अवसर प्रदान करता है।
  • एक नगरीय वृत्तिकार पेशेवर (यूपीपी) कार्यक्रम, जो सार्वजनिक, निजी, और नागरिक समुदाय के संगठनों तथा मध्यवर्ती कैरियर वाले पेशेवरों को सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता सृजन उपलब्ध कराता है। इसने 2012-13 में मध्यवर्ती कैरियर वाले पेशेवरों के लिए नगरीय विकास में कार्यशील पेशेवर (पीडब्ल्यूपी-यूडी) का 8 महीने का अंतर्वैषयिक प्रमाणपत्र कार्यक्रम प्रस्तुत किया। निजी क्षेत्र तथा नागरिक समुदाय के 1,000 से अधिक सार्वजनिक व पालिका कार्मिकों को विविध थीमों में 2013 में प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • एक वृत्ति कार्यक्रम, जो समानता, धारणीयता और सहनशीलता पर प्रबल जोर देते हुए मानव बस्तियों के क्षेत्र में नीतियों, कार्यक्रमों, एवं परियोजनाओं के विकास एवं क्रियान्वयन हेतु सरकारी, सार्वजनिक व निजी उद्यमों को समर्थित करता है।

पांच स्कूल
प्रस्तावित IIHS विश्वविद्यालय अपना प्रथम परिसर पांच अंतर्वैषयिक स्कूलों के आधार पर बंगलौर में स्थापित करेगा, जिनका नीचे वर्णन किया गया है। दो स्कूलों (पर्यावरण एवं धारणीयता तथा मानव विकास) के लिए घरेलू वित्तपोषण और संकाय पद सुरक्षित कर लिए गए हैं और तीसरे (प्रशासन एवं नीति) के लिए चर्चाएं उन्नत चरण में हैं। इन स्कूलों की परिकल्पना परस्पर उत्पादक चर्चाओं के साथ की गई है जिसमें अनेक संकाय कई स्कूलों में संयुक्त पदधारक के रूप में नियुक्त होंगे ताकि सीमाओं की संरंध्रता सुनिश्चित की जा सके। प्रस्तावित IIHS स्कूल ये हैं:

पर्यावरण एवं धारणीयता स्कूल पर्यावरण एवं धारणीयता के संदर्भ में निर्मित परिवेश में स्थित होगा। यह विविध दृष्टिकोणों एवं विषयों में पर्यावरण से सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जुड़ाव को समामेलित करेगा, निर्मित पर्यावरण एवं अवसंरचना, आपदा एवं जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तनशीलता एवं पारिस्थितिकीय प्रबंधन द्वारा परिवर्तन, नगरीय पारितंत्र एवं पर्यावरणीय डिजाइन, भेद्यता और सहनशीलता के दबावकारी मुद्‌दों का परीक्षण करेगा। यह स्कूल, पर्यावरणीय स्वास्थ्य एवं सेवा आपूर्ति व प्रदूषण की स्थानीय प्रक्रियाओं के समाधान के लिए क्षेत्रीय प्रक्रियाओं के माध्यम से वृहद एवं वैश्विक पर्यावरणीय परिवर्तनों के समाधान हेतु विशेषरूप से अन्य स्केल्स से संलग्नता रखेगा। यह पारिस्थितिकीय सेवाओं पर निर्धनों व भेद्य जनसंख्याओं की निर्भरता, तथा आघातों एवं आपदाओं के प्रति उनकी भेद्यता पर विशेष रूप से जोर देगा।

मानव विकास स्कूल का फोकस मानव एवं सामाजिक विकास की प्रक्रियाओं पर होगा जो समकालीन नगरीय भारत में आर्थिक व सामाजिक दोनों प्रकार के रूपांतरणों का केंद्रीय ध्यान बिंदु होना चाहिए। मानव विकास की उन चुनौतियों हेतु यह स्कूल व्यापक व अंतर्वैषयिक प्रविधि अपनाएगा जो निर्धनता, असमानता, भेद्यता, अधिकारों, पात्रताओं और विकास की विभिन्न राजनैतिक एवं वैषयिक प्रविधियों को परस्पर उत्पादक चर्चाओं से जोड़ने की मांग करती हैं। यह स्थानीय स्तर, सामुदायिक नेतृत्व में कार्रवाई, तथा वृहद-नीति व विकासात्मक बहसों के स्तर पर कार्य करते हुए ऐसा करेगा।

आर्थिक विकास स्कूल यह औपचारिक एवं अनौपचारिक आजीविकाओं, रोजगार एवं भेद्यता के सूक्ष्म सरोकारों से अवसंरचना, भूमि बाज़ारों सहित वृहद-स्तरीय नगरीय आर्थिक प्रणालियों और क्षेत्रीय संसाधन प्रबंधन तक आर्थिक संगठनों के एकाधिक स्तरों का अन्वेषण करेगा। यह स्कूल, नगरीय अर्थव्यवस्थाओं के अखंड अध्ययन व प्रबंधन के लिए सभी स्तरों पर नगरीय, क्षेत्रीय व महानगरीय आर्थिक विकास हेतु राजनैतिक एवं आर्थिक विश्लेषण, तथा प्रबंधकीय निर्णय-सृजन को एकीकृत करेगा।

प्रशासन एवं नीति स्कूल बस्तियों का प्रशासन करने की समस्या से स्थायी संलग्नता प्रदर्शित करता है। यह राजनैतिक प्रक्रियाओं की तथा राज्य से लेकर परिवार तक विविध स्तरों पर सूक्ष्म एवं वृहद राजनैतिक संस्थानों की, उदाहरण के लिए जो प्रशासन के स्थलों के रूप में कार्य करते हैं, संदर्भगत तथा व्यावहारिक समझ प्रदान करेगा। यह इसका केंद्रीय अवलोकन करेगा कि किस तरह से लोक नीति, विधि एवं संस्थान, विविध स्तरों की बस्तियों जिनमें लाखों नगर और महानगरीय क्षेत्र सम्मिलित हैं, में कार्य करते, प्रशासन और प्रबंधन करते हैं। यह सीखने वालों को राजनैतिक, नियोजन एवं संस्थागत प्रक्रियाएं समझने में मदद करेगा जिनके द्वारा बस्तियों का निर्माण, प्रशासन, रखरखाव और रूपांतरण किया जाता है।

बस्तियां एवं अवसंरचना स्कूल स्वयं को व्याप भौगोलिक पैमाने पर स्थापित करेगा जो न केवल नगरों बल्कि नगरीय और क्षेत्रीय प्रणालियों व बस्तियों का परीक्षण करेगा जिनमें नगरीय और ग्रामीण दोनों शामिल हैं। यह स्कूल, अनेक पक्षकारों व सेक्टरों की आवश्यकताओं व प्राथमिकताओं हेतु प्रतिक्रिया में स्थानीय, नगरीय और क्षेत्रीय स्तरों पर नियोजन और अभिकल्प की भूमिका तथा विस्तार, समानता, कार्यकुशलता, सौंदर्यबोध, धारणीयता एवं संस्कृति का परीक्षण करेगा। यह सभी पारिस्थितिकीय सेवाओं, गतिशीलता, ऊर्जा, सूचना एवं मूल सेवाओं की आपूर्ति सहित पर्यावरणीय प्रबंधन सांतत्य में एकीकृत अवसरंचनात्मक एवं निर्मित प्रणालियों के अवधारण, अभिकल्पन, नियोजन एवं क्रियान्वयन के पूर्ण चक्र का समाधान करेगा।