एचयूडीसीओ HUDCO

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HUDCOनगरीय वृत्तिकार कार्यक्रम के भाग के रूप में, भारतीय नगरों में किफायती आवासन तथा नगरीय जल आपूर्ति एवं स्वच्छता जैसे मसलों पर चर्चाओं एवं चिन्तन हेतु एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए, आईआईएचएस ने आवास एवं नगरीय विकास निगम लिमिटेड (HUDCO) से साझेदारी की है। गोल-मेज (राउंड-टेबल) सम्मेलनों के जरिए पक्षकारों को लोक सेवाओं में सुधार लाने के लिए अपने अनुभवों पर विचार करने में सक्षम बनाया जाता है, तथा किसी भी सांस्थनिक सम्बद्धता वाले पक्षकारों को दृष्टिकोण व अनुभव साझा करने के लिए एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाता है।

कार्यक्रम

किफायती आवासन राज्य नीतियां एवं कार्यवाहियां में प्रबंधन विकास कार्यक्रम (एमडीपी) | 22-23 जुलाई, 2014

2007 की राष्ट्रीय नगरीय आवास एवं वासस्थान नीति में कहा गया है कि आश्रय एक आधारभूत मानवीय आवश्यकता है, भोजन व वस्त्र के बाद इसी का स्थान आता है, इस तरह सभी के लिए आवास की उपलब्धता को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि नगरीय आवासों की कमी पर एमओएचयूपीए का तकनीकी समूह 2012 (टीजी-12) का अनुमान है कि 18 मिलियन से अधिक आवासों की कमी है और समाज में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) तथा निम्नतर आय समूह (एलआईजी) इससे सर्वाधिक प्रभावित हैं।

केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के अलावा, कुछ राज्यों ने राजकीय आवास नीतियां अधिसूचित की हैं- पंजाब ने 2008 में (पीएचएचपी-2008) तथा केरल ने 2011 में (केएसएचपी-2011), जबकि 2009 में अधिसूचित ‘किफायती आवास नीति’ के माध्यम से राजस्थान ने एक नए संभावनाशील आयाम को अपनाया है। इसी के साथ, आंध्र प्रदेश ने भी साझेदारी में किफायती आवास योजना पर अपने दिशानिर्देश जारी किए हैं (एसएएचआईपी-2009)। कुछ राज्यों ने हाल ही में इसका अनुसरण किया है और उड़ीसा ने 2012 में अपनी ‘किफायती आवास योजना’ प्रस्तुत की। कर्नाटक ने हाल ही में अपनी किफायती आवास नीति 2013 (केएएचपी-2013) प्रस्तुत की और कुछ अन्य राज्य भविष्य में ऐसी नीति लागू करने पर विचार कर रहे हैं। ये आवास नीतियां एक उचित रूपरेखा बनाने का प्रयास करती हैं जो मांग और आपूर्ति हस्तक्षेपों के माध्यम से समाज के ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्गों के लिए किफायती आवासों की उपलब्धता सुगम बनाए।

हालांकि क्या किफायती आवास के लिए मांग और आपूर्ति आधारित प्रविधि सर्वोत्तम प्रविधि है? क्या ऐसी कोई संभावना है कि आवास के प्रश्न को मांग और आपूर्ति आधारित स्तर तक घटाने से केवल तकनीकी आधारित समाधान ही प्रोत्साहित होंगे, जबकि यह सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थिति है? यदि हां, तो आवश्यकता इस बात की है कि इस तरीके से हटकर आवास के प्रश्न पर अधिक अखंड दृष्टिकोण से विचार किया जाए, जो कि विकास, ग्रामीण-नगरीय विभाजन, रोजगार एवं आजीविकाओं, मानवीय विकास के परिणामों, व अन्य प्रश्नों से समग्र रूप में एकीकृत है।

क्या इन प्रयासों का ध्येय, लक्षित उन्मुखता से मांग प्रेरित प्रविधि की ओर प्रगामी स्थानांतरण प्रेरित करने पर तथा इसके साथ ही अधिकार आधारित प्रविधि की रूपरेखा में सब्सिडी आधारित आवास योजना से लागत साझेदारी या लागत वसूली-सह-सब्सिडी योजनाओं की ओर होना चाहिए?

इन व्यापक प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए, प्रबंधन विकास कार्यक्रम का लक्ष्य प्रतिभागियों को किफायती आवास के बारे में राज्यों द्वारा लागू की जा रही नीतियों से परिचित कराना, उनकी उपलब्धियों तथा भावी चुनौतियों का मूल्यांकन करना, और उनकी स्थितियों के बारे में अद्यतन जानकारी साझा करना है।

यह कार्यक्रम, सार्वजनिक क्षेत्र के ऐसे आवासन पेशेवरों के लिए है जो सार्वजनिक क्षेत्र की नगरीय सामाजिक आवास योजनाओं की अवधारणा, डिजाइन, प्रबंधन और आपूर्ति से जुड़े हुए हैं।

किफायती आवास पर राष्ट्रीय राउंड-टेबलः राज्य कार्यवाहियों में नए आयाम | 28 जनवरी, 2014

2007 की राष्ट्रीय नगरीय आवास एवं वासस्थान नीति में कहा गया है कि ‘आश्रय एक आधारभूत मानवीय आवश्यकता है, भोजन व वस्त्र के बाद इसी का स्थान आता है, इस तरह सभी के लिए आवास की उपलब्धता को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि नगरीय भारत में 2012 के अनुमान के अनुसार 18 मिलियन से अधिक आवासों की कमी है जिससे पता चलता है कि अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। इस कमी से समाज में ईडब्ल्यूएस तथा एलआईजी सर्वाधिक प्रभावित (95%) हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर विशिष्ट कार्यवाहियों की आवश्यकता है।

राज्य सरकारों तथा सह-राजकीय संस्थानों ने अभी तक सामान्यतः आवास नीति में बहुत मजबूत कदम नहीं उठाए हैं, यद्यपि वे अपने राज्य में आवास समस्याओं से बहुत निकट रूप में परिचित और कार्यरत हैं। एक स्वागतयोग्य परिवर्तन शुरू हुआ है। दो राज्यों ने पृथक राजकीय आवास नीतियां अधिसूचित की हैं- पंजाब ने 2008 में (पीएचएचपी-2008) तथा केरल ने 2011 में (केएसएचपी-2011)। 2009 में अधिसूचित ‘किफायती आवास नीति’ के माध्यम से राजस्थान ने एक नए संभावनाशील आयाम को अपनाया है। कर्नाटक ने हाल ही में अपनी किफायती आवास नीति 2013 (केएएचपी-2013) प्रस्तुत की और कुछ अन्य राज्यऐसी नीति लागू करने पर विचार कर रहे हैं।

आवास एवं नगरीय विकास निगम (एचयूडीसीओ), कर्नाटक आवास बोर्ड (केएचबी) तथा दि इंडियन इंस्टीट्‌यूट फॉर ह्‌यूमन सेटलमेन्ट्‌स (आईआईएचएस) ने साझेदारी करते हुए, राजकीय आवास नीतियों के प्रतिपादन और क्रियान्वयन में विविध विशेषज्ञता से लाभान्वित करने तथा किफायती आवास क्षेत्र से संबंधित विभिन्न अलग-अलग स्थानों वाले पक्षकारों के बीच सहशिक्षण को सुगम बनाने के लिए, ‘किफायती आवासः राज्य कार्यवाहियों में नए आयाम’ विषय पर 1-दिवसीय राष्ट्रीय राउंड-टेबल कॉन्फ्रेन्स का आयोजन किया।

प्रतिभागियों को किफायती आवास के बारे में राज्यों द्वारा लागू की जा रही नीतियों से परिचित कराना, उनकी उपलब्धियों तथा भावी चुनौतियों का मूल्यांकन करना, और इन राज्यों के चयनित प्रतिनिधि समूह तथा आवास वित्त संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों और निजी विकासकर्ताओं के विविध प्रतिनिधियों के बीच जानकारियों का आदान-प्रदान और विचार-विमर्श सुगम बनाना इस राउंड टेबल का ध्येय था।

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नगरीय जल आपूर्ति एवं स्वच्छता पर प्रबंधन विकास कार्यक्रम (एमडीपी) | 16-17 जनवरी, 2014

पाठ्‌यक्रम विवरण
नगरीय वृत्तिकार कार्यक्रम के भाग के रूप में, भारतीय नगरों में नगरीय जल आपूर्ति एवं स्वच्छता जैसे नवीन मसलों पर (आवधिक गोल-मेज (राउंड-टेबल के माध्यम से) चर्चाओं एवं चिन्तन हेतु एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए, तथा प्रबंधन विकास कार्यक्रमों के आयोजन द्वारा सेक्टर के वृत्तिकारों के बीच क्षमता एवं ज्ञान संवर्धन के लिए आईआईएचएस ने आवास एवं नगरीय विकास निगम लिमिटेड (HUDCO) से साझेदारी की है।

प्रस्तावित एमडीपी का ध्येय मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के नगरीय वृत्तिकार हैं, जो लगातार इस प्रकार के प्रश्नों का सामना करते हैं कि वे क्रियान्वित की जा रही योजनाओं व कार्यक्रमों में क्या और कैसे वास्तविक योगदान कर सकते हैं। जल संसाधन, जल आपूर्ति तथा वितरण, अपशिष्ट जल समेत जल एवं स्वच्छता क्षेत्र में समस्त अनिवार्य विषयों को कवर करने के अतिरिक्त इस कार्यक्रम में नीतिगत, संस्थागत, वित्तीय, पीपीपी इत्यादि से संबंधित मसलों को भी दायरे में लिया जाएगा। (मार्च और नवम्बर 2013) में आयोजित राउंड-टेबल्स में पक्षकारों की चर्चाएं और अंतर्दृष्टि भी कार्यक्रम को समृद्ध बनाएगी। आईआईएचएस के अपने विशेषज्ञों के अलावा, अकादमिक और प्रैक्टिस पृष्ठभूमि वाले विशेषज्ञों का योगदान वास्तविक एवं अखंड दृष्टिकोण हेतु लिया जाएगा जो भारतीय नगरों की जटिल वास्तविकताओं में कार्य करने वाले नगरीय वृत्तिकारों हेतु आवश्यक है। एमडीपी के लिए प्रतिभागियों के रूप में एचयूडीसीओ के अधिकारी, तथा उपयुक्त राज्य सरकार व नगरीय एजेंसियों से नामांकन अपेक्षित हैं।

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नगरीय जल आपूर्ति एवं स्वच्छता पर राष्ट्रीय राउंड टेबल | 11 नवम्बर, 2014

क्षेत्रीय जल संसाधन एवं प्रदूषण  के प्रश्न

नगरीय वृत्तिकार कार्यक्रम के भाग के रूप में, भारतीय नगरों में नगरीय जल आपूर्ति एवं स्वच्छता जैसे नवीन मसलों पर चर्चाओं एवं चिन्तन हेतु एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए, आईआईएचएस ने आवास एवं नगरीय विकास निगम लिमिटेड (HUDCO) से साझेदारी की है।

नगरीय वृत्तिकार कार्यक्रम के भाग के रूप में, भारतीय नगरों में किफायती आवासन तथा नगरीय जल आपूर्ति एवं स्वच्छता जैसे मसलों पर चर्चाओं एवं चिन्तन हेतु एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए, आईआईएचएस ने आवास एवं नगरीय विकास निगम लिमिटेड (HUDCO) से साझेदारी की है। गोल-मेज (राउंड-टेबल) सम्मेलनों के जरिए पक्षकारों को नगरीय जल एवं स्वच्छता में सुधार लाने के लिए अपने अनुभवों पर विचार करने में सक्षम बनाया जाता है, तथा किसी भी सांस्थनिक सम्बद्धता वाले पक्षकारों को दृष्टिकोण व अनुभव साझा करने के लिए एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाता है।

‘भारतीय नगरों एवं शहरों में जल आपूर्ति सेवा स्तरों में सुधार-सतत आपूर्ति बनाम क्रमिक सुधार’ विषय पर पहली राउंड टेबल का आयोजन 01 मार्च, 2013 को किया गया।

‘नगरीय जल आपूर्ति एवं स्वच्छताः क्षेत्रीय जल संसाधन एवं प्रदूषण के प्रश्न’ विषय पर दूसरी राउंड टेबल कॉन्फ्रेन्स का आयोजन 11 नवम्बर, 2013 को आईआईएचएस सिटी कैम्पस, बंगलौर में किया गया।

यह राउंड टेबल, एक ओर तो नगर स्तरीय जल एवं स्वच्छता तथा क्षेत्रीय जल संसाधन के प्रश्नों के बीच संबंधों की पड़ताल करने तथा दूसरी ओर अपशिष्ट जल प्रदूषण तथा प्रबंधन के प्रश्नों पर आधारित थी। राउंड टेबल में इन प्रश्नों पर चर्चा की गईः

  1. क्या जल संसाधनों की क्षेत्रीय उपलब्धता, विभिन्न प्रदेशों/राज्यों में नगरों हेतु जलापूर्ति नियोजन की मुख्य प्रेरक होनी चाहिए?
  2. नगरीय एवं औद्योगिक अपशिष्ट जल शोधन को क्षेत्रीय जल संसाधनों एवं पर्यावरणीय दशाओं के अनुरूप किस प्रकार संरेखित किया जा सकता है?
  3. जल संसाधन प्रबंधन (शोधर/पुनःउपयोग सहित) को संस्थागत रूप से किस तरह अवधारित किया जाना चाहिए? क्षेत्रीय/स्थानीय जल संसाधन उपलब्धता से अनुकूलन करने के लिए नगरों को किस तरह प्रोत्साहित किया जा सकता है? उन्हें उनका अपशिष्ट जल शोधित करने हेतु किस प्रकार उत्तरदायी बनाया जा सकता है?
  4. भूमिगत जल आधारित निजी स्व-आपूर्ति एवं निजी पानी के टैंकरों का बाज़ार, समस्या या समाधान में से किसका भाग है?
  5. क्या नगरीय जल एवं स्वच्छता के लिए सेवा स्तरों के मानक निर्धारित करने संबंधी राज्य स्तरीय नीतियों का कोई उदाहरण है?

राउंड टेबल में कर्नाटक सरकार (पालिका प्रशासन निदेशालय, वित्त, खनन एवं भूगर्भ, उद्योग एवं वाणिज्य सहित), बीडब्ल्यूएसएसबी, केयूडब्ल्यूएस एंड डीबी, केंद्रीय भूजल बोर्ड, के राज्य स्तरीय अधिकारी, टीडब्ल्यूएडी बोर्ड (तमिलनाडु), एनजीओ (अर्ध्यम, वॉटर लिटरेसी फाउंडेशन), डब्ल्यूएसपी-एसए, विश्व बैंक, भारतीय विज्ञान संस्थान, के अधिकारी तथा हुडको और आईआईएचएस के प्रतिनिधि शामिल हुए।

भारतीय नगरों में जल आपूर्ति सेवा स्तरों में सुधार पर राष्ट्रीय राउंड-टेबल | 01 मार्च, 2013

जल, जीवन एवं आजीविका का आधार है। बारहवीं योजना में भारतीय अर्थव्यवस्था तथा समाज द्वारा इस क्षेत्र में सामना की जाने वाली महत्त्वपूर्ण चुनौतियों पर ध्यान देते हुए जल संसाधन प्रबंधन में आयामी परिवर्तन का आह्‌वान किया गया है। भारतीय नगरीय अवसंरचना तथा सेवाओं पर एचपीईसी रिपोर्ट का अनुमान है कि जल आपूर्ति, वाहित मल, तथा वर्षा जल निकासी निवेश, क्रमशः समस्त नगरीय क्षेत्र आवश्यकताओं का 24% पूंजीगत तथा ओएंडएम के लिए 41% है।

यद्यपि इस बहुमूल्य संसाधन की संभाल करने के लिए अनेक संस्थान उत्तरदायी हैं, लेकिन जल को एक संसाधन के रूप में प्रबंधित करने तथा मांग का प्रबंधन करने के लिए एक एकीकृत प्रविधि का अभाव प्रतीत होता है। जनसंख्या में वृद्धि के साथ इस चुनौती का समाधान करना, हमारी मानवीय बस्तियों को बचाए रखने के लिए बहुत अनिवार्य है। जल के प्रभावी तथा कार्यक्षम प्रबंधन के लिए, राष्ट्रीय जल नीति में संस्थागत सुधार, जागरूकता सृजन, तथा क्षमता सृजन हेतु कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए।

यद्यपि पेयजल आपूर्ति योजनाओं को अनवरत आपूर्ति के लिए डिजाइन किया गया, लेकिन अधिकांश नगरों को अनियमित आपूर्ति मिलती है जो दिन में एक बार से लेकर दो से तीन दिन में एक बार तक है। अनवरत आपूर्ति प्रदान करने के लिए आवश्यक अवसंरचना स्थापित करने तथा मौजूदा प्रणाली में क्रमिक सुधार लागू करने के पक्ष में तर्क मौजूद हैं।

आईआईएचएस और हुडको ने भारतीय नगरों में नगरीय जल आपूर्ति एवं स्वच्छता में सुधारों हेतु विकल्पों पर चर्चाओं एवं चिन्तन हेतु एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए साझेदारी की है। इस दिशा में, आईआईएचएस बंगलौर सिटी कैम्पस में 01 मार्च, 2013 को कर्नाटक के चुनिंदा पक्षकारों के साथ राउंड-टेबल प्रस्तावित है।

कार्यक्रम के उद्‌देश्यः
राउंड-टेबल के उद्‌देश्य निम्न हैं:

  • नगरीय जल एवं स्वच्छता हेतु व्यवस्थित सुधार मॉडलों के अनुभवों पर चिंतन करने के लिए कर्नाटक में नगरीय क्षेत्र के चुनिंदा पक्षकारों को आमंत्रित करना
  • किसी भी सांस्थनिक सम्बद्धता/एसोसिएशनों वाले पक्षकारों को दृष्टिकोण व अनुभव साझा करने के लिए एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाना।
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