एमओएचयूपीए (MoHUPA)

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आवास, एवं नगरीय निर्धनता उन्मूलन मंत्रालय (MoHUPA) ने आMinistry of Housing & Urban Poverty Alleviationईआईएचएस को राष्ट्रीय संसाधन केंद्र (NRC) के रूप में पैनलबद्ध किया है। एनआरसी के रूप में आईआईएचएस ऐसे चयनित संस्थानों के सेट में शामिल है जिनको मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम-राजीव आवास योजना के तहत मलिन बस्ती रहित नगर नियोजन, तथा जीआईएस के क्षेत्रों में क्षमता विकास कार्यशालाएं आयोजित करने का कार्य सौंपा गया है। एनआरसी के रूप में हमारा कार्य चेन्नई में अक्टूबर 2013 में तमिलनाडु मलिन बस्ती उन्मूलन बोर्ड हेतु कार्यशाला आयोजन के साथ शुरू हुआ। इस सम्बद्धता के अंतर्गत आरएवाई पर एक कार्यशाला का आयोजन चेन्नई में 7 एवं 8 अक्टूबर, 2013 को किया गया।13.

कार्यक्रम

TNSCB हेतु RAY पर क्षमता सृजन कार्यक्रम | 7-8 अक्टूबर 2013

पाठ्‌यक्रम विवरण

आवास एक मूलभूत आवश्यकता है जो मानव कल्याण को बढ़ाती है और परिवारों तथा नगरों के लिए उत्पादक आर्थिक परिसंपत्ति होती है। यह नागरिकों को सामाजिक एवं मानवीय विकास के लाभ प्रदान करने में अद्वितीय है जिसके साथ वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन में सक्रिय रूप से रत है तथा उनके परिवार, नगर और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान करता है। फिर भी आवास का प्राविधान-विशेषकर ऐसा जो सुरक्षित एवं पर्याप्त हो-नगरीय क्षेत्र में एक ऐसी बड़ी चुनौती बनी हुई है जिसका सामना वर्तमान में नीति-निर्माता तथा नगरीय वृत्तिकार कर रहे हैं। आवास, एवं नगरीय निर्धनता उन्मूलन मंत्रालय (MoHUPA) भारत सरकार (GoI) के, नगरीय आवास की कमी पर तकनीकी समूह के अनुसार, नगरीय भारत में 18 मिलियन से अधिक परिवार भीड़भरे, जीर्ण-शीर्ण या गैर-मरम्मतयोग्य घरों में रहते हैं। इनमें से आधा मिलियन से अधिक परिवारों के पास कोई मकान नहीं है। ऐसा अनुमान है कि इन परिवारों की बड़ी संख्या (95%) आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) तथा निम्नतर आय समूह (एलआईजी) वर्गों से आती है।

इस संदर्भ में, केंद्र सरकार ने राजीव आवास योजना (आरएवाई) की शुरूआत की, जो ऐसी एकीकृत प्रविधि पर केंद्रित थी जिसका ध्येय उन लोगों को औपचारिक प्रणाली में लाना था जो अतिरिक्त-औपचारिक जगहों पर रहने के लिए बाध्य होते हैं, तथा नगर में वैध स्थिति के साथ रहने वालों को मिलने वाली सेवाओं और सुविधाओं के अधिकारों से वे वंचित हो जाते हैं, तथा समावेशन तथा समानता की दशाएं निर्मित करने में विफल रहने वाली नगरीय विकास एवं शहरी नियोजन की औपचारिक प्रणाली की कमियां ठीक करने का ध्येय रखा गया, ताकि नए नगरीय परिवार, चाहे वे अन्य जगह से वहां आकर बसें या वहां की जनसंख्या की स्वाभाविक वृद्धि के परिणाम हों, को पालिका सेवाओं के साथ आवास सुविधा मिले, और वे अतिक्रमण करने या मलिन बस्तियां बनाने के लिए, तथा अधिकारों एवं सुविधाओं से वंचित दशाओं में गैरकानूनी ढंग से जीवनयापन करने के लिए विवश न हों। राजीव आवास योजना को 2 चरणों में परिकल्पित किया गया-नियोजन एवं क्रियान्वयन। नियोजन चरण अब समाप्त हो चुका है और आरएवाई अब 2013-2022 के लिए केंद्र प्रायोजित योजना है।

दि इंडियन इंस्टीट्‌यूट ऑफ ह्‌यूमन सेटलमेन्ट्‌स, बंगलौर (आईआईएचएस), जो कि आरएवाई के लिए क्षमता सृजन हेतु आवास एवं नगरीय निर्धनता उन्मूलन मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक राष्ट्रीय संसाधन केंद्र है, ने 7 और 8 अक्टूबर, 2013 को चेन्नई में तमिलनाडु मलिन बस्ती उन्मूलन बोर्ड (टीएनएससीबी) के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

उद्‌देश्य
आरएवाई के क्रियान्वयन चरण से संबंधित, योजना के नए दिशानिर्देशों से परिचित कराना इस कार्यशाला का उद्‌देश्य था। पुनरीक्षित दिशानिर्देशों में, नगरों की जनसंख्या, तथा लागत प्रति बेघर इकाई के आधार पर वित्तपोषण के पैटर्न शामिल हैं। मलिन बस्ती उन्मूलन बोर्ड के सदस्यों को स्वस्थाने उन्नयन, पुनर्विकास तथा स्थान-परिवर्तन परियोजनाओं के बीच चयन के महत्त्व को लेकर संवेदनशील बनाना भी इस कार्यशाला का लक्ष्य था। परियोजना अवधारण तथा निष्पादन हेतु महत्त्वपूर्ण घटक के रूप में प्रभावी सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

प्रतिभागियों का परिचय
कार्यशाला में 2 दिनों की अवधि के दौरान कुल 59 प्रतिभागियों ने भागीदारी की। अधिकांश प्रतिभागी, तमिलनाडु मलिन बस्ती उन्मूलन बोर्ड के सहायक अभियन्ता, योजनाकार, जीआईएस विशेषज्ञ, तथा सामुदायिक विकास अधिकारी थे। एमआईडीएस के कुछ अध्येताओं तथा सीआरआईटी के निजी परामर्शदाताओं ने भी भाग लिया।

संबंधित छवियाँ
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RAY पर कार्यशाला | 23-24 सितम्बर, 2013 | 22-23 नवम्बर, 2013

पाठ्‌यक्रम विवरण

आवास एक मूलभूत आवश्यकता है जो मानव कल्याण को बढ़ाती है और परिवारों तथा नगरों के लिए उत्पादक आर्थिक परिसंपत्ति होती है। यह नागरिकों को सामाजिक एवं मानवीय विकास के लाभ प्रदान करने में अद्वितीय है जिसके साथ वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन में सक्रिय रूप से रत है तथा उनके परिवार, नगर और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान करता है। फिर भी आवास का प्राविधान-विशेषकर ऐसा जो सुरक्षित एवं पर्याप्त हो-नगरीय क्षेत्र में एक ऐसी बड़ी चुनौती बनी हुई है जिसका सामना वर्तमान में नीति-निर्माता तथा नगरीय वृत्तिकार कर रहे हैं। नगरीय निर्धनों, तथा नगरों में रहने वाले मलिन बस्ती निवासियों के लिए आवास की कमी की समस्या और गंभीर है। इस संदर्भ में नगरों में सभी मलिन बस्ती निवासियों को पर्याप्त तथा सुरक्षित आवास प्रदान करते हुए नगरों को मलिन बस्तियों से रहित बनाना राजीव आवास योजना का ध्येय है।

दि इंडियन इंस्टीट्‌यूट ऑफ ह्‌यूमन सेटलमेन्ट्‌स, बंगलौर (आईआईएचएस), जो कि आरएवाई के लिए क्षमता सृजन हेतु आवास एवं नगरीय निर्धनता उन्मूलन मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक राष्ट्रीय संसाधन केंद्र है, ने राजकीय नगरीय विकास संस्थान, मैसूर के साथ 23 और 24 सितम्बर, 2013 को बंगलौर में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यक्रम के उद्‌देश्य
राजीव आवास योजना पर कार्यशाला का उद्‌देश्य, आरएवाई आवास परियोजनाओं के नियोजन, प्राविधान एवं प्रबंधन के संदर्भ में नगरीय स्थानीय निकायों की नियोजन एवं क्रियान्वयन क्षमताएं विकसित और संवर्धित करना था। इसमें प्रतिभागियों को राजीव आवास योजना की विशिष्ट विशेषताओं से परिचित कराया गया और सार्वजनिक एजेंसियों से लेकर विकासकर्ताओं व समुदायों, जिनको आरएवाई के ढांचे में सम्बद्ध किया जा सकता है, के कार्यकर्ताओं व हस्तक्षेपों की व्यापक रेंज से उन्हें परिचित कराया गया। आरएवाई परियोजना की अवधारणा, क्रियान्वयन और प्रबंधन हेतु ढांचा बनाने के लिए आवश्यक टूल्स तथा ज्ञान से प्रतिभागियों को सुसज्जित किया गया। वृत्तिकारों को उनके शहरों व नगरों में आरएवाई योजनाएं क्रियान्वित करने से जुड़ी विशिष्ट चुनौतियां पहचानने के लिए सक्षम बनाया गया, ताकि उनके प्रत्यक्ष समाधान किए जा सकें। क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में समुदायों तथा अन्य गैर-राजकीय कार्यकर्ताओं को किस प्रकार समझा और जोड़ा जाए, इसकी प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।

प्रतिभागियों का परिचय
यह कार्यशाला, कर्नाटक मलिन बस्ती विकास बोर्ड, वित्त, आवास एवं नगरीय विकास विभाग, कर्नाटक सरकार, कर्नाटक नगरीय अवसंरचना विकास वित्त निगम, कर्नाटक राज्य सुदूर संवेदन एवं अनुप्रयोग केंद्र, पालिका प्रशासन निदेशालय, तथा कर्नाटक के नगरीय स्थानीय निकायों के अधिकारियों हेतु आयोजित की गई थी।