एसआईयूडी SIUD

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State Institute for Urban Developmentआईआईएचएस ने राजकीय नगरीय विकास संस्थान (एसआईयूडी), मैसूर, कर्नाटक से एक तीन वर्षीय समझौता ज्ञाप गठित किया। पूरे कर्नाटक में सरकारी कार्मिकों को प्रभावी क्षमता सृजन प्रदान करने के लिए एसआईयूडी, निर्धारित केंद्रीय सार्वजनिक संस्थान है। वित्तीय वर्ष 2013-14 में, आईआईएचएस ने प्रशिक्षण देना आरंभ कर दिया है जिसमें किफायती आवासन, जल आपूर्ति तथा स्वच्छता, और भौगोलिक सूचना प्रणालियों के क्षेत्रों में कार्यशालाओं एवं पाठ्‌यक्रमों के माध्यम से कर्नाटक में लगभग 900 कार्मिकों को सम्मिलित किया जाएगा।

कार्यक्रम

क्षमता सृजन कार्यक्रम | 21 - 24 अगस्त, 2013 | 16 - 19 सितम्बर, 2013 | 18 - 21 दिसम्बर, 2013 | 12 - 15 फरवरी, 2014

पाठ्‌यक्रम विवरणः
आवास एक मूलभूत आवश्यकता है जो मानव कल्याण को बढ़ाती है और परिवारों तथा नगरों के लिए उत्पादक आर्थिक परिसंपत्ति होती है। यह नागरिकों को सामाजिक एवं मानवीय विकास के लाभ प्रदान करने में अद्वितीय है जिसके साथ वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन में सक्रिय रूप से रत है तथा उनके परिवार, नगर और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान करता है। फिर भी आवास का प्राविधान-विशेषकर ऐसा जो सुरक्षित एवं पर्याप्त हो-नगरीय क्षेत्र में एक ऐसी बड़ी चुनौती बनी हुई है जिसका सामना वर्तमान में नीति-निर्माता तथा नगरीय वृत्तिकार कर रहे हैं। आवास, एवं नगरीय निर्धनता उन्मूलन मंत्रालय (MoHUPA) भारत सरकार (GoI) के नगरीय आवास की कमी पर तकनीकी समूह के अनुसार, नगरीय भारत में 18 मिलियन से अधिक परिवार भीड़भरे, जीर्ण-शीर्ण या गैर-मरम्मतयोग्य घरों में रहते हैं। इसके अलावा, इनमें से आधा मिलियन से अधिक परिवारों के पास कोई मकान नहीं है। ऐसा अनुमान है कि इन परिवारों की बड़ी संख्या (95%) आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) तथा निम्नतर आय समूह (एलआईजी) वर्गों से आती है।

कर्नाटक राज्य किफायती आवास तथा आवास वित्त क्षेत्र में अनेक कार्यक्रम और योजनाएं लागू करते हुए इन चिंताओं का समाधान करने के लिए निरंतर तत्पर है। कर्नाटक में वर्तमान में अनेक संस्थान इन योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में लगे हुए हैं। हाल ही में, केंद्र सरकार के नीतिगत प्रयासों ने इन समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया है। जवाहरलाल नेहरू नगरीय नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम), जो कि भारत में नगरीय समस्याओं के समाधान के लिए 2005 में शुरू किया गया भारत सरकार का प्रमुख कार्यक्रम है में निधियों का 35 प्रतिशत भाग निम्न आय आवास परियोजनाओं हेतु आवंटित किया गया है। नगरीय विकास मंत्रालय (MoUD) द्वारा गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति (HPEC) ने 2012-2013 की अवधि में इस निवेश में दस गुने वृद्धि अनुमानित की है। किफायती आवास के क्षेत्र में कमी को प्रयास करते हुए दूर करने के लिए निजी विकासकर्ताओं से लेकर समुदाय आधारित संगठनों तक अनेक गैर-राजकीय कार्यकर्ता सक्रिय हो गए हैं।

2009 में, भारत सरकार ने सभी पूर्ववर्ती नगरीय निम्न-आय आवास योजनाओं को राजीव आवास योजना (आरएवाई) में समाहित कर दिया। बहु-आयामी ‘समग्र-नगर’ प्रविधि अपनाते हुए समस्त भारतीय नगरों को मलिन बस्ती रहित बनाना आरएवाई का प्रमुख ध्येय है। आरएवाई, स्थानीय दशाओं पर आधारित तथा स्थानीय प्राधिकारियों के नेतृत्व वाले समाधान प्रोत्साहित करती है।

आरएवाई के अंतर्गत, स्थानीय नोडल एजेंसियों जैसे कि आवास बोर्ड एवं मलिन बस्ती विकास प्राधिकरणों को, रोजगार एवं आजीविका के अवसर, सामाजिक नेटवर्क एवं समुदाय, धारणीयता के सिद्धांत एवं हरित भवन, तथा विभिन्न अध्यासन मॉडल जैसे कि स्वामित्व और किराएदारी आदि को ध्यान में रखते हुए, किफायती आवास समाधानों की खोज हेतु प्रोत्साहित किया गया है। नगर-व्यापी प्रविधि के पक्षसमर्थन में आरएवाई अद्वितीय है और पहली बार, ‘अधिसूचित’ तथा ‘गैर-अधिसूचित’ मलिन बस्तियों के बीच अंतरों से आगे बढ़कर, नगर में सभी बस्तियों और निवासियों को आच्छादित करते हुए, सभी को आश्रय का अधिकार   प्रदान करने के लिए महत्त्वाकांक्षी प्रयास किया गया है। निम्न-आय वाले निवासियों के आजीविका अवसरों तथा सामाजिक नेटवर्कों को बनाए रखने के लिए इसमें मलिन बस्तियों के उन्नयन की संभावनाओं पर जोर दिया गया है। इसमें इस तथ्य को मान्यता दी गई है कि आवास क्षेत्र में भारी कमी को पूरा करने के लिए सार्वजनिक व्यय ही पर्याप्त नहीं होगा। अतः इसमें राज्य सरकार को निजी विकासकर्ताओं हेतु ऐसी रूपरेखा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है कि वे किफायती आवास परियोजनाओं में स्वयं तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) स्वरूप के द्वारा निवेश करें।

किफायती आवास पर क्षमता सृजन कार्यक्रम का ध्येय

किफायती आवास पर क्षमता सृजन कार्यक्रम का ध्येय, नगरीय क्षेत्रों में आवास के प्राविधान एवं प्रबंधन से जुड़े सरकारी कार्मिकों के ज्ञान तथा व्यावहारिक क्षमता का विकास करना है।

लक्षित वर्ग

यह कार्यक्रम, यूएलबी, आवास बोर्ड, मलिन बस्ती उन्मूलन तथा विकास विभागों, नगरीय विकास प्राधिकरणों, तथा एसआईयूडी द्वारा अधिसूचित अन्य के वरिष्ठ तथा मध्यवर्ती कार्यकारियों हेतु लक्षित है।

कार्यक्रम के उद्‌देश्य

  • राष्ट्रीय तथा कर्नाटक राज्य स्तर पर किफायती आवास से संबंधित नीतियों, कार्यक्रमों एवं परिप्रेक्ष्यों के बारे में प्रतिभागियों का ज्ञान संवर्धन करना।
  • किफायती आवास के क्षेत्र में कार्य करने की इच्छुक सार्वजनिक एजेंसियों से लेकर विकासकर्ताओं व समुदायों के कार्यकर्ताओं व हस्तक्षेपों की व्यापक रेंज से प्रतिभागियों को परिचित कराना।
  • सार्वजनिक, निजी या पीपीपी आधारित किफायती आवास परियोजनाओं की अवधारणा, क्रियान्वयन और प्रबंधन हेतु ढांचा बनाने के लिए आवश्यक टूल्स से प्रतिभागियों को सुसज्जित करना।
  • प्रतिभागियों को उनके शहरों व नगरों में आरएवाई तथा कर्नाटक राज्य व राष्ट्रीय स्तर की अन्य योजनएं क्रियान्वित करने से जुड़ी विशिष्ट चुनौतियां पहचानने के लिए सक्षम बनाना, ताकि उनके प्रत्यक्ष समाधान किए जा सकें।
  • राज्य में सभी यूएलबी और नगर निकायों में सूचना नेटवर्क और अनुभवों का आदान-प्रदान संभव बनाना।
  • परियोजना एवं वित्तीय प्रबंधन समेत परियोजना प्रबंधन तथा क्रियान्वयन के लिए आवश्यक मूलभूत प्रबंधन कौशल प्रस्तुत करना।

ULB की सेवाओं के लिए GIS और GPS हेतु आवेदन | 9 - 12 जुलाई, 2013 | 21 - 24 अगस्त, 2013 | 16 - 19 दिसम्बर, 2013 | 16 - 19 जून, 2014 | 22 - 25 जुलाई, 2014

पाठ्‌यक्रम का विवरण
नगरीय एवं क्षेत्रीय संदर्भ में विविध परियोजनाओं की योजनाएं बनाने के लिए जीआईएस का एक टूल के रूप में महत्त्व बढ़ता जा रहा है। सभी आकारों की परियोजनाओं में नियोजन एवं डेटा विजुअलाइजेशन के लिए जीआईएस का उपयोग बढ़ता जा रहा है। जीआईएस ने उपयोक्ताओं की बढ़ती संख्या के लिए तथा बहुल प्रयोजनों से विश्व में स्थानिक डेटा, पैटर्नों और संबंधों को अंतक्रियात्मक ढंग से प्रक्रमित करने, विश्लेषित करने, मानचित्रीकरण तथा मॉडल बनाने और प्रदर्शित कर सकने के तौर-तरीकों को बदल दिया है।

नगर ऐसा स्थानिक निकाय होता है जहां प्रचालनों व निर्णय-सृजन में प्रयुक्त 80% से अधिक सूचनाओं में अवस्थिति का गुण होता है। जीआईएस की शक्ति का लाभ प्राप्त करने के लिए, सॉफ्टवेयर तथा स्थानीय डेटा सेट दोनों ही आवश्यक हैं। प्रतिलिप्याधिकार मसलों के कारण सार्वजनिक क्षेत्रों में मानचित्रों एवं मानचित्रों के आंकड़ों का उपयोग विरल है, जो विभिन्न परियोजनाओं हेतु उन्हें उपयोग करने के लिए प्राप्त करना महंगा और परेशानीभरा बनाता है। इसके अलावा, अधिकांश जीआईएस सॉफ्टवेयर भी अधिकृत हैं, जिससे अनेक वृत्तिकारों के लिए इसकी संभावना का सहज उपयोग करने के लिहाज से बड़ा अवरोध निर्मित होता है। अतः आईआईएचएस में जीआईएस टीम ने पाठ्‌यक्रम को विविध मुक्त स्रोत जीआईएस टूल्स तथा डेटा स्रोतों के आधार पर अवधारित किया हे और इसका ध्यान रखा गया है कि उपलब्ध डेटा को किस प्रकार प्रक्रमित तथा विभिन्न परिदृश्यों में उपयोग हेतु अनुकूलित किया जा सकता है।

लक्षित वर्ग
यह पाठ्‌यक्रम ऐसे लक्षित वर्ग के लिए है जिसमें आयुक्त, मुख्य अधिकारी, नोडल अधिकारी, अधिशासी अभियन्ता, तथा वरिष्ठ प्रोग्रामर शामिल हैं।

किफायती आवास-नीतियां, संस्थान, साधन और अभ्यास पर कार्यशाला | 20 जुलाई 2013

पाठ्‌यक्रम विवरण
निवासियों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा निम्न आय समूहों के लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराना, भारत के नगरीय केंद्रों के लिए प्रमुख चुनौती बन गई है।

आवास एवं नगरीय निर्धनता उन्मूलन मंत्रालय द्वारा गठित तकनीकी समूह (टीजी-12) का अनुमान है कि भारतीय नगरों में लगभग 18.78 मिलियन इकाई आवासों की कमी है, जिनमें से आधा मिलियन परिवार पूरी तरह से घरविहीन हैं। केवल नगरीय कर्नाटक में ही 1 मिलियन से अधिक इकाईयों की कमी है। इस अभाव के काफी बड़ा भाग का सामना आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न-आय समूहों के लोगों द्वारा किया जाता है।

नगरीय आवास में इस कमी को दूर करने के लिए पक्षकारों द्वारा मिलकर कार्य किया जाना, समय की मांग है, क्योंकि यह कमी, आश्रय की आधारभूत मानवीय आवश्यकता को उपेक्षित करती है और नगरीय भारतीय नागरिकों की उत्पादकता को अत्यधिक प्रभावित करती है। इस तथ्य के आलोक में राजकीय नगरीय विकास संस्थान (एसआईयूडी), मैसूर ने दि इंडियन इंस्टीट्‌यूट फॉर ह्‌यूमन सेटलमेन्ट्‌स (आईआईएचएस), बंगलौर के सहयोग से ‘किफायती आवास-नीतियां, संस्थान, साधन और अभ्यास’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया।

लक्षित वर्ग
यह कार्यशाला विविध पक्षकारों जैसे कि नगरीय स्थानीय निकायों तथा सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य नगरीय नियोजन एवं विकास एजेंसियों के अधिकारियों, निजी विकासकर्ताओं, अकादमिकों, पेशेवर संस्थानों, तथा एनजीओ के लिए लक्षित थी।

कार्यक्रम के उद्‌देश्य
कार्यशाला, ‘किफायती आवास-नीतियां, संस्थान, साधन और अभ्यास’, उन रणनीतिक जागरूकता कार्यशालाओं की श्रृंखला में प्रथम है, जो किफायती नगरीय आवास के मसले पर कार्य करने वाले अनेक पक्षकारों को एकजुट करने के लिए एसआईयूडी-आईआईएचएस द्वारा आयोजित की गई है। कार्यशाला के उद्‌देश्य निम्नांकित हैं:

  • नगरीय आवास की कमी, तथा नगरीय स्थान व रहन-सहन पर इसके प्रभावों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना,
  • किफायती आवास के बारे में नगरीय भारत में वर्तमान परिदृश्य को प्रस्तुतिकरणों तथा संवाद चक्रों के माध्यम से स्पष्ट करना,
  • पक्षकारों द्वारा अपने अभ्यास क्षेत्र में की जा सकने वाली संभावनाशील कार्यवाहियों की पहचान करना।
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